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जमीनें उगल रहीं जहरीली शराब, पाउच और फ्रूटी में बिक रही मौत, गुना पुलिस की ताबड़तोड़ कार्रवाई से हड़कंप

सागर में जहरीली शराब से हुई भीषण त्रासदी के बाद अब गुना जिले में पुलिस और आबकारी विभाग पूरी तरह हरकत में आ गया है। महज एक सप्ताह के भीतर जिलेभर में दबिश देकर 30 लाख रुपये से अधिक मूल्य की अवैध शराब और लहान को नष्ट किया गया है।

सागर जिले की त्रासदी के बाद गुना में पुलिस और आबकारी विभाग ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए लाखों रुपए की अवैध शराब और लहान को नष्ट किया है।
गुना: सागर जिले में जहरीली शराब के सेवन से हुई भयावह मौतों के बाद आखिरकार गुना जिले का आबकारी और पुलिस प्रशासन गहरी नींद से जाग गया है। स्थिति यह है कि पिछले महज एक सप्ताह के भीतर जिलेभर में ताबड़तोड़ दबिश देकर 30 लाख रुपये से अधिक मूल्य की अवैध शराब, लहान और कच्ची भट्टियों को नष्ट किया गया है। जमीन के भीतर गाड़कर तैयार की जा रही यह जहरीली शराब पाउच और फ्रूटी के पैकेटों में धड़ल्ले से बेची जा रही थी, जिससे साफ है कि गुना जिला किसी बड़े हादसे के मुहाने पर खड़ा था।

एक हफ्ते में 30 लाख का लहान और शराब नष्ट

हालिया आंकड़ों पर गौर करें तो प्रशासनिक सक्रियता का यह दौर केवल एक औपचारिकता से बढ़कर एक बड़े सिंडिकेट का पर्दाफाश करता है। 27 अगस्त 2026 को धरनावदा के मुरादपुर में 5,000 लीटर लहान नष्ट किया गया, तो वहीं 9 सितंबर 2026 को राघौगढ़ के राजपुरा गांव में संयुक्त टीम ने करीब 8,600 लीटर लहान और सैकड़ों लीटर अवैध कच्ची शराब बरामद की। इसी तरह बजरंगगढ़ और चांचौड़ा समेत कई अन्य इलाकों में लगातार कार्रवाई करते हुए पुलिस ने स्पष्ट कर दिया है कि यह अवैध नेटवर्क रातों-रात नहीं, बल्कि लंबे समय से बेखौफ फल-फूल रहा था।

जिले के ये इलाके बने अवैध शराब के बड़े हॉटस्पॉट

प्रशासनिक कार्रवाइयों से यह बात सामने आई है कि जिले में कुछ खास गांव और इलाके कच्ची शराब के सबसे बड़े गढ़ बन चुके हैं। चांचौड़ा का भानपुरा, राघौगढ़ का साकोन्या, राजपुरा कंजर डेरा, गोचा आमल्या, बरसत, मधुसूदनगढ़, पीपलखेड़ी, भिदरा, हरिपुर, बीनागंज का खेजड़ा कला रानी, धरनावदा का मुरादपुर, विनायकखेड़ी और गुना शहर का मातापुरा क्षेत्र इसमें शामिल हैं। इन इलाकों की भौगोलिक स्थिति और जंगलों का फायदा उठाकर तस्कर बार-बार जमीन के अंदर टंकियां गाड़कर और हैंडपंप के जरिए अवैध शराब का काला कारोबार संचालित करते हैं।

30 लाख से अधिक की जब्ती: महज एक हफ्ते में पुलिस और आबकारी विभाग ने लाखों की अवैध शराब और लहान नष्ट किया।
त्रासदी के बाद जागा प्रशासन: सागर में हुई दर्दनाक मौतों के बाद गुना में ताबड़तोड़ छापे मारे जा रहे हैं।
जमीन के अंदर चल रहा धंधा: नालों और खेतों के पास जमीन में टंकियां गाड़कर लहान और शराब छिपाई जाती है।
प्रमुख हॉटस्पॉट: राघौगढ़, चांचौड़ा, धरनावदा और बजरंगगढ़ के कई गांव अवैध शराब के पुराने गढ़ हैं।

क्या किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा था प्रशासन?

तथ्यों और बरामदगी के इस विशाल आंकड़े ने सबसे बड़ा सवाल यह खड़ा कर दिया है कि जब तक सागर जैसी भीषण त्रासदी नहीं हुई, तब तक स्थानीय प्रशासन और पुलिस इन अड्डों को बंद कराने में नाकाम क्यों रहे? हर साल या छह महीने में पुलिस बल इन इलाकों में दबिश देकर भट्टियां और लहान नष्ट कर देता है, लेकिन मुख्य सरगना अक्सर भाग खड़े होते हैं और कुछ ही दिनों बाद यह अवैध धंधा फिर से शुरू हो जाता है।

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