मध्य प्रदेश के मुरैना-हेतमपुर रेलखंड के बीच हुए ट्रेन हादसे में आगरा के तीन लोगों की मौत हो गई है। इनका शव घर पहुंचने के बाद परिवार में कोहराम मच गया।
मध्य प्रदेश के मुरैना में हुए ट्रेन हादसे में जान गंवाने वाले लोगों में आगरा की आफरीन, उसका 4 साल का बेटा और 60 साल की शुकंतला देवी शामिल हैं। ट्रेन में मची अफरा-तफरी और भगदड़ इनकी मौत की वजह बनी। लोग एक दूसरे को रौंदते हुए भाग रहे थे। रविवार को आफरीन और उसके बेटे के शव घर पहुंचे तो हाहाकार मच गया। आफरीन अपने मायके से ससुराल लौट रही थी। वहीं, शकुंतला बागेश्वर धाम से आगरा लौट रही थीं।
मोबाइल के फटने से ट्रेन में मची भगदड़
रविवार शाम करीब 4 बजे खजुराहो-उदयपुर इंटरसिटी ट्रेन की जनरल बोगी में अफरा-तफरी और भगदड़ मच गई। ये सब एक यात्री के मोबाइल फोन के फटने से हुआ। ट्रेन में सवार लोगों ने हंगामा मचा दिया कि बोगी में आग लग गई है। इससे यात्रियों में भगदड़ मच गई। इसी बीच किसी ने ट्रेन को रोकने के लिए चेन पुलिंग कर दी। ट्रेन के रुकते ही एक दूसरे को रौंदते हुए यात्री भागने लगे और उतरकर ट्रैक के पास खड़े हो गए। इसी बीच पातालकोट के आने से ट्रेन की चपेट में 4 यात्री आ गए। इसमें तीन आगरा के थे।
मायके से लौट रही थी आफरीन
हादसे के चश्मदीद न्यू आगरा थाना क्षेत्र सुल्तानगंज की पुलिया के रहने वाले नदीम ने बताया कि वह अपनी पत्नी आफरीन, दो बेटे रिजवान और असद के साथ अपने ससुराल से लौट रहे थे। 23 मई से आफरीन अपने मायके छतरपुर गई थी। वह उसे वहां से लेने के लिए गए थे। उन्होंने बताया कि वह जनरल बोगी में बैठे थे। तभी अचानक तेज धमाका हुआ था। इसके बाद किसी ने अफवाह फैला दी कि बोगी में आग लग गई है। उनकी पत्नी और असद बोगी के गेट के पास बेठे थे। जबकि रिजवान ऊपर की सीट पर था। उनकी बोगी इंजन के बगल वाली थी।
‘आग लग गई भागो-भागो’
नदीम ने बताया कि पीछे से अवाज आई, ‘भागो-भागो, आग लग गई’। उन्होंने देखा तो एक तरफ धुंआ उठ रहा था। भगदड़ के बीच किसी ने चेन पुलिंग कर दी। ट्रेन के ब्रेक लगने के बाद यात्री बेतहाशा भागने लगे। लोग एक दूसरे को रौंदते हुए भाग रहे थे। कई महिलाएं और बच्चे लोगों के पैरों के नीचे आ गए। उसने तेजी दिखाते हुए आनन-फानन में आफरीन और असद को नीचे उतार दिया। मगर रिजवान उन्हें नजर नहीं आया तो वह उसकी खोज में बोगी के भीतर चले गए। तभी पीछे से आई ट्रेन की चपेट में आने से आफरीन और असद की मौत हो गई।
हादसे के बहुत देर बाद मिली मदद
नदीम ने बताया कि उसकी पत्नी और बेटे की ट्रेन की चपेट में आने से मौत हो गई थी, लेकिन रेलवे की ओर से मदद उन्हें काफी देर बाद मिली। पत्नी और बच्चे के शव को देखकर उसकी हालत खराब हो गई। परिजनों को सूचना दी। रविवार रात वह दोनों के शव को आगरा लेकर पहुंचे थे। दोनों के शव आने के बाद परिवार में कोहराम मच गया। पिता नदीम का रो-रोकर बुरा हाल है। शवों का पोस्टमार्टम कराया है।
बागेश्वर धाम से लौट रही शकुंतला की मौत
रुनकता कचहरा थोक निवासी भूरी सिंह की पत्नी शकुंतला भी इस ट्रेन हादसे का शिकार हो गईं। उनके भतीजे बबलू ने बताया कि ताई शुक्रवार को बागेश्वर धाम के दर्शन करने के लिए गई थीं। उनके साथ बेटी धेवती समेत 7 अन्य लोग थे। उदयपुर इंटरसिटी से सभी लोग घर आ रहे थे। रविवार शाम को फोन आया कि ट्रेन हादसा हो गया है। जिसमें ताई शकुंतला देवी की मौत हो गई है। जानकारी होते ही परिवार के लोग मुरैना पहुंच गए थे।

