सत्य निकेतन PG हादसे के बाद MCD ने आसपास की जर्जर इमारतों को खाली कराकर तोड़ने के नोटिस दिए थे। कुछ मालिकों ने कोर्ट का रुख किया, जिसके बाद फिलहाल डिमोलिशन पर रोक है। अधिकारियों के मुताबिक कोर्ट की शर्तें नहीं मानी गईं तो कार्रवाई फिर हो सकती है।
नई दिल्ली: मोती बाग के सत्य निकेतन पीजी हादसे के बाद एमसीडी ने आसपास की कई जर्जर और खतरनाक बिल्डिंगों को खाली कराने के बाद उन्हें तोड़ने का नोटिस दिया था। नोटिस देने के बाद एमसीडी दूसरी खतरनाक बिल्डिंग को तोड़ने में व्यस्त रही। इसका फायदा उठाकर बाकी बिल्डिंग मालिकों ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। कोर्ट ने फिलहाल एमसीडी के डिमोलिशन एक्शन पर रोक लगा दी है। एमसीडी अधिकारियों का कहना है कि कोर्ट ने बिल्डिंग मालिकों पर कुछ शर्तें भी लगाई हैं। यदि बिल्डिंग मालिकों ने कोर्ट द्वारा लगाई गई शर्तों का पालन नहीं किया तो बिल्डिंगों पर एक्शन होना तय है। बता दें कि 6 सितंबर को पांच मंजिला पीजी हॉस्टल हादसे में पांच स्टूडेंट्स सहित सात लोगों की मौत हुई थी और पांच अन्य जख्मी हुए थे।
हादसे के बाद एक बड़ी लापरवाही यह सामने आई कि बिल्डिंग मालिकों ने 5-6 दशक पुरानी बिल्डिंगों के ऊपर कई मंजिलें बगैर पिलर के ही बना डालीं।
जिस पीजी में यह हादसा हुआ, उसका मालिक बेसमेंट को कवर करके कुछ और कमरे बनाने की तैयारी कर रहा था।
इसी दौरान यह हादसा हुआ और पांच मंजिला बिल्डिंग भरभराकर जमीन पर आ गिरी।
तब लोगों को पता चला कि पांच मंजिला बिल्डिंग बगैर पिलर के ही खड़ी हुई थी। इसके ठीक बराबर वाली बिल्डिंग को भी इसी तरह से बनाया गया था।
खतरनाक हालत में थी बिल्डिंग
बिल्डिंग कितनी जर्जर थी, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि बिल्डिंग को तोड़ने से पहले ग्राउंड फ्लोर पर मोटे-मोटे लोहे के गार्डर लगाकर बिल्डिंग को सपोर्ट देना पड़ा था। तब कहीं जाकर तोड़ा जा सका। एमसीडी ने इस बिल्डिंग के आसपास 3-4 जर्जर और खतरनाक बिल्डिंगों को पहले एहतियात के तौर पर खाली कराया। इसके बाद इन्हें तोड़ने का नोटिस दिया। बिल्डिंग मालिकों ने एक्शन के खिलाफ कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। कोर्ट ने डिमोलिशन एक्शन पर रोक लगा दी।
क्या है स्ट्रक्चरल सर्टिफिकेट ?
यह प्रमाणपत्र आमतौर पर किसी योग्य स्ट्रक्चरल इंजीनियर द्वारा दिया जाता है। इसमें यह बताया जाता है कि इमारत के ढांचे- जैसे नींव, कॉलम, बीम, स्लैब और छत की जांच के बाद वह कितनी सुरक्षित और मजबूत है।

