मुंबई के ऐतिहासिक बाणगंगा तालाब में हजारों मछलियों की मौत के बाद पानी की क्वालिटी पर सवाल उठे हैं. पितृ पक्ष के दौरान होने वाले पिंडदान को लेकर भी चर्चा है. हालांकि, मछलियों की मौत की वजह अभी तय नहीं हुई है.
महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई में ऐतिहासिक बाणगंगा तालाब (टैंक) में हजारों मछलियां मरी मिली हैं. मरी हुई मछलियों से आसपास बदबू फैल रही है. इस घटना ने टैंक के पानी की हालत को लेकर चिंता बढ़ा दी है. फिलहाल मछलियों की मौत की पक्की वजह सामने नहीं आई है.
यह मामला दक्षिण मुंबई के मालाबार हिल इलाके का है. बाणगंगा तालाब धार्मिक लिहाज से भी खास माना जाता है. यहां पितृ पक्ष के दौरान पिंडदान किया जाता है. स्थानीय लोगों का कहना है कि इस बार पितृ पक्ष शुरू होने के करीब 10 दिन के भीतर ही मछलियों के मरने की घटना सामने आ गई. पहले ऐसी घटनाएं पितृ पक्ष के आखिरी दिनों में होती थीं.
स्थानीय लोगों ने आशंका जताई है कि पिंडदान के दौरान इस्तेमाल होने वाली खाद्य सामग्री या दूसरी चीजों के पानी में जाने से प्रदूषण बढ़ सकता है. उनका कहना है कि इससे पानी में ऑक्सीजन की मात्रा कम हो सकती है, जो मछलियों की मौत की वजह बन सकती है. हालांकि, इसे अभी मछलियों की मौत की तय वजह नहीं माना गया है. स्थानीय लोगों के साथ कुछ पुजारियों ने गर्मी को भी संभावित कारण बताया है. यानी फिलहाल कई वजहों पर चर्चा हो रही है, लेकिन असली कारण सामने आना बाकी है.
बाणगंगा में लंबे समय से पूजा कराने वाले पुजारी सेवालाल तिवारी ने पिंडदान की सामग्री पानी में डालने की बात से इनकार किया. उन्होंने बताया कि पूजा के दौरान पानी को तीन बार स्पर्श कराया जाता है. इसके बाद पूजा में इस्तेमाल होने वाली चीजों को बाहर रखे ड्रम में डाल दिया जाता है. तिवारी ने यह भी कहा कि कुछ लोग अपनी तरफ से पिंडदान करते हैं. ऐसे मामलों में कभी-कभी पूजा की सामग्री पानी में डाल दी जाती है. इस पहलू को लेकर स्थानीय लोगों के बीच चर्चा है.
इस बार पहले ही सामने आई मछलियों की मौत
स्थानीय निवासी भरत गुरव ने बताया कि बाणगंगा टैंक में मछलियों के मरने की घटना पहले भी होती रही है. हालांकि, इस बार यह घटना जल्दी सामने आई है. उन्होंने बताया कि वह मृत मछलियों को हटाने के काम में मदद कर रहे हैं.
पितृ पक्ष की शुरुआत इस साल 26 सितंबर से हुई. स्थानीय लोगों के मुताबिक, पहले मछलियों की मौत पितृ पक्ष के करीब आखिर में देखने को मिलती थी. इस बार करीब 10 दिन के भीतर ही बड़ी संख्या में मछलियां मर गईं.
मामले को लेकर BMC ने स्थानीय लोगों और पुजारियों के साथ बैठक बुलाई है. इसमें मछलियों की मौत के मामले पर चर्चा की जाएगी. तालाब को आगे होने वाले नुकसान से बचाने के उपायों पर भी बात होगी. बाणगंगा तालाब का धार्मिक महत्व काफी पुराना है. इससे जुड़ी एक मान्यता रामायण काल से जुड़ी है. कहा जाता है कि भगवान राम जब सीता को बचाने लंका की ओर जा रहे थे, तब उन्हें प्यास लगी. उन्होंने लक्ष्मण से पानी लाने को कहा. मान्यता के अनुसार, लक्ष्मण ने इसी जगह जमीन पर बाण चलाया. इसके बाद भूमिगत गंगा का पानी यहां आया और तालाब का निर्माण हुआ. इसी वजह से इसका नाम बाणगंगा पड़ा. इस जगह का संबंध भगवान परशुराम से भी जोड़ा जाता है.
फिलहाल हजारों मछलियों की मौत की असली वजह साफ नहीं है. पानी की क्वालिटी, ऑक्सीजन की कमी, गर्मी या दूसरी वजहों में से किसका कितना असर पड़ा, यह आगे की जांच के बाद ही स्पष्ट होगा.

