सागरपुर के अंसारी अस्पताल पर पुलिसकर्मी की पत्नी के इलाज का कथित तौर पर बढ़ा-चढ़ाकर मेडिकल बिल बनाने के आरोप में विजिलेंस थाने में केस दर्ज हुआ है। 4,96,678 रुपये के बिल में मरीज को 14 दिसंबर तक भर्ती दिखाया गया, जबकि डिस्चार्ज समरी में 3 दिसंबर को छुट्टी की बात दर्ज थी।
नई दिल्ली: सागरपुर के अंसारी अस्पताल पर एक पुलिसकर्मी की पत्नी के इलाज का कथित तौर पर फर्जी और बढ़ा-चढ़ाकर मेडिकल बिल तैयार करने के आरोप में विजिलेंस थाने में केस दर्ज हुआ है। अस्पताल ने इलाज का बिल 4.96 लाख रुपये का बनाया था। जांच में बिल में मरीज को 2 से 14 दिसंबर 2025 तक अस्पताल में भर्ती दिखाया गया, जबकि डिस्चार्ज समरी में उन्हें 3 दिसंबर को ही छुट्टी दिए जाने की बात सामने आई। विजिलेंस पुलिस ने इस मामले के साथ ही इसी अस्पताल से जुड़े एक दूसरे मेडिकल बिल की जांच के आधार पर केस दर्ज किया।
पुलिस सूत्रों के अनुसार, एसीपी (हेडक्वार्टर) सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट धर्मपाल सिंह ने एक सितंबर को विजिलेंस के डीसीपी को शिकायत भेजी थी। शिकायत के मुताबिक, रंजीत नगर थाने में तैनात हेड कॉन्स्टेबल कैलाश चंद मीणा की पत्नी मंजू को 2 दिसंबर 2025 को सागरपुर के अंसारी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। कैलाश ने बताया कि 3 दिसंबर को उनकी पत्नी को अस्पताल से छुट्टी मिल गई। उन्होंने डिस्चार्ज समरी भी पुलिस को दी।
डिस्चार्ज समरी से 11 दिन ज्यादा भर्ती दिखाकर भेजा बिल
इसके बावजूद अस्पताल ने बिल नंबर 1551 के जरिए 4,96,678 रुपये का बिल तैयार कर विभाग को भेजा। यह बिल 13 जनवरी को सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट की अकाउंट्स ब्रांच में मिला। इसमें भर्ती की अवधि 2 दिसंबर से 14 दिसंबर दिखाई गई थी। यानी डिस्चार्ज समरी के मुकाबले करीब 11 दिन ज्यादा भर्ती दिखाए गए। पुलिस के मुताबिक, यह जानकारी पुलिसकर्मी के बयान और उपलब्ध डिस्चार्ज समरी से मेल नहीं खाती।

