मध्य प्रदेश के 17 सरकारी विश्वविद्यालयों में असिस्टेंट प्रोफेसर के लगभग 74% पद खाली पड़े हैं। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने सीएम मोहन यादव को पत्र लिखकर फैकल्टी की कमी, परीक्षाओं में देरी और रिजल्ट आने में सालभर की लेटलतीफी का मुद्दा उठाया है। कैग रिपोर्ट के हवाले से सामने आई इन कमियों से छात्रों का भविष्य खतरे में पड़ गया है।
मध्य प्रदेश के सरकारी विश्वविद्यालयों में 74% असिस्टेंट प्रोफेसर के पद खाली होने और परीक्षाओं में देरी को लेकर शिक्षा व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं।
भोपाल: मध्य प्रदेश के सरकारी विश्वविद्यालयों में उच्च शिक्षा की स्थिति लगातार चिंताजनक होती जा रही है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी द्वारा मुख्यमंत्री मोहन यादव को लिखे गए एक पत्र के अनुसार, राज्य के 17 सरकारी विश्वविद्यालयों में स्वीकृत असिस्टेंट प्रोफेसर के लगभग 74 प्रतिशत पद खाली पड़े हैं। आंकड़ों के मुताबिक, इन 17 विश्वविद्यालयों में स्वीकृत 1,069 पदों में से 793 पद खाली हैं। फैकल्टी की इस भारी कमी और परीक्षा परिणामों में लगातार हो रही देरी के कारण लाखों छात्रों का अकादमिक और पेशेवर करियर संकट में आ गया है।
तांत्या भील यूनिवर्सिटी से लेकर जीवाजी विश्वविद्यालय तक बदहाली
पत्र में चौंकाने वाले आंकड़े सामने रखते हुए बताया गया है कि खरगोन स्थित क्रांतिसूर्य तांत्या भील विश्वविद्यालय में शिक्षण के सभी 140 स्वीकृत पद खाली पड़े हैं, जिसमें 80 असिस्टेंट प्रोफेसर, 40 एसोसिएशन प्रोफेसर और 20 प्रोफेसर के पद शामिल हैं। इसके अलावा, ग्वालियर के जीवाजी विश्वविद्यालय पर CAG की रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया गया कि 2023-24 के दौरान पीजी प्रथम और तृतीय सेमेस्टर के परिणाम घोषित करने में 244 से 380 दिनों तक की भारी देरी पाई गई, और इस यूनिवर्सिटी में भी 72% शिक्षण पद खाली मिले।
परीक्षाओं की लेटलतीफी, आरजीपीवी पर बढ़ता दबाव
बरकतउल्ला यूनिवर्सिटी, विक्रम यूनिवर्सिटी, आरजीपीवी, रानी दुर्गावती यूनिवर्सिटी और अहिल्या यूनिवर्सिटी जैसे संस्थानों में मार्कशीट व एडमिट कार्ड में गड़बड़ी, कॉपियों के मूल्यांकन में लापरवाही और समय पर परीक्षा न होने जैसी समस्याएं आम हो गई हैं। खासकर आरजीपीवी से 585 से अधिक कॉलेजों के जुड़े होने के कारण परीक्षा और रिजल्ट प्रक्रिया बुरी तरह चरमरा गई है। इसी प्रशासनिक दबाव को कम करने के लिए अब सरकार इस विश्वविद्यालय को तीन हिस्सों में बांटने की तैयारी कर रही है।
पोर्टल दोबारा खोलने की नौबत
सप्लीमेंट्री परीक्षाओं के रिजल्ट में देरी के कारण उच्च शिक्षा विभाग को ई-प्रवेश पोर्टल दोबारा खोलना पड़ा है, जिससे एडमिशन, डिग्री वितरण, नौकरी के आवेदन और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों के चक्र में बड़ी बाधा उत्पन्न हुई है। जानकारों का मानना है कि यदि समय रहते इन खाली पदों पर भर्तियां नहीं की गईं, तो मध्य प्रदेश की उच्च शिक्षा व्यवस्था का स्तर और अधिक गिर सकता है।
एमपी के 17 सरकारी विश्वविद्यालयों में असिस्टेंट प्रोफेसर के 74% पद खाली।
क्रांतिसूर्य तांत्या भील यूनिवर्सिटी में सभी 140 शिक्षण पद रिक्त पड़े हैं।
जीवाजी यूनिवर्सिटी में रिजल्ट घोषित करने में 380 दिन तक की देरी का खुलासा (CAG रिपोर्ट)।
अत्यधिक दबाव के चलते आरजीपीवी को तीन हिस्सों में विभाजित करने की तैयारी।

