इंदौर के वार्ड 9 से बीजेपी पार्षद राहुल जायसवाल और भजन गायक गन्नू महाराज के बीच विवाद का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। कमला नेहरू कॉलोनी में संस्कार भवन के बाहर बिजली का पोल लगाने की ऊंचाई को लेकर दोनों के बीच तीखी बहस हुई। इस घटना का वीडियो अब तेजी से वायरल हो रहा है, जिससे इलाके में सनसनी फैल गई है।
इंदौर में कमला नेहरू कॉलोनी के पास संस्कार भवन के बाहर बिजली का पोल लगाने को लेकर बीजेपी पार्षद और भजन गायक गन्नू महाराज के बीच तीखी नोकझोंक हुई।
इंदौर: शहर के वार्ड क्रमांक 9 के भाजपा पार्षद राहुल जायसवाल और भजन गायक गन्नू महाराज के बीच विवाद का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वीडियो में दोनों के बीच बिजली के पोल लगाने को लेकर बहस होती दिखाई दे रही है। बातचीत के दौरान गन्नू महाराज पार्षद से नाराजगी जताते हुए कहते सुनाई दे रहे हैं- कई आए, कई गए… तेरे जैसे भी कई आए और चले गए।
बताया जा रहा है कि पूरा मामला कमला नेहरू कॉलोनी का है। यहां उद्यान विभाग की जमीन पर संस्कार भवन और योग केंद्र का निर्माण किया गया है। रविवार को भवन का शुभारंभ होना है। इससे पहले शनिवार को नगर निगम के कर्मचारी भवन के बाहर बिजली के पोल लगाने का काम कर रहे थे। इसी दौरान पोल की ऊंचाई और उसे किस स्थान पर लगाया जाए इसको लेकर गन्नू महाराज और पार्षद राहुल जायसवाल के बीच बहस हो गई।
जानकारी के मुताबिक गन्नू महाराज का मकान संस्कार भवन के ठीक सामने है। उनके मुताबिक भवन के सामने उनके वाहन के साथ-साथ किराएदारों के वाहन भी खड़े होते हैं। निगम कर्मचारी यहां करीब 8 फीट की ऊंचाई पर बिजली का पोल लगाने की बात कर रहे थे। गन्नू महाराज ने इसका विरोध करते हुए पोल को 10 फीट की ऊंचाई पर लगाने की बात कही।
वायरल वीडियो में गन्नू महाराज निगम कर्मचारियों से कहते नजर आ रहे हैं कि पोल को 10 फीट की ऊंचाई पर लगाया जाए। वे यह भी कहते सुनाई दे रहे हैं कि वे हाथ जोड़कर और चरण छूकर कह रहे हैं कि पोल 10 फीट पर लगा दें लेकिन 8 फीट की ऊंचाई पर इसे नहीं लगाने देंगे। उन्होंने मौके पर नगर निगम के अधिकारियों को बुलाने की बात भी कही।
पार्षद ने पहले भी विवाद होने की बात कही
विवाद को लेकर पार्षद राहुल जायसवाल का कहना है कि इस स्थान पर बच्चों को संस्कार की शिक्षा देने के उद्देश्य से संस्कार भवन और योग केंद्र बनाया गया है। निर्माण के दौरान भी विवाद की स्थिति बनी थी और काम को रोकने का प्रयास किया गया था। इसके बाद क्षेत्र के रहवासियों ने हस्ताक्षर अभियान चलाया था। रहवासियों के समर्थन के बाद निर्माण कार्य आगे बढ़ सका।

