उज्जैन में महाकाल मंदिर से रामघाट जाने वाले मार्ग पर स्थित 14वीं सदी का ऐतिहासिक महाकाल द्वार देर रात अचानक भरभराकर गिर गया। गनीमत रही कि इस हादसे में कोई जनहानि नहीं हुई। करीब 2 करोड़ 12 लाख रुपये की लागत से इस धरोहर का जीर्णोद्धार किया जा रहा था
उज्जैन: महाकाल मंदिर से सीधे रामघाट की ओर जाने वाले प्राचीन मार्ग पर स्थित करीब 14वीं सदी का ऐतिहासिक ‘महाकाल द्वार’ देर रात अचानक भरभराकर जमींदोज हो गया। गनीमत यह रही कि घटना के वक्त आसपास कोई भी व्यक्ति मौजूद नहीं था, वरना एक बहुत बड़ा जानलेवा हादसा हो सकता था। इस ऐतिहासिक धरोहर के ढहने के बाद अब शहर के विकास कार्यों और निर्माण गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं।
क्यों गिरा 14वीं सदी का ऐतिहासिक महाकाल द्वार?
रविवार सुबह जैसे ही घटना की जानकारी मिली, स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के अधिकारी मौके पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया। प्रारंभिक तौर पर यह सामने आया है कि द्वार के ठीक पास बड़े पैमाने पर डीप एक्सकेवेशन (गहरी खुदाई) का काम चल रहा था। इसके अलावा पिछले दो-तीन दिनों से लगातार हो रही बारिश के कारण जमीन में अत्यधिक नमी आ गई थी। विशेषज्ञों का मानना है कि जमीन के सेटलमेंट और कंपन के कारण इस प्राचीन संरचना की नींव हिल गई, जिससे यह ऐतिहासिक द्वार टिक नहीं पाया। हालांकि, वास्तविक कारणों का खुलासा विस्तृत जांच के बाद ही हो पाएगा।
तकनीक पर उठे सवाल
सबसे बड़ा सवाल इसलिए भी उठ रहा है क्योंकि इस ऐतिहासिक द्वार के जीर्णोद्धार और पुनर्विकास के लिए करीब 2 करोड़ 12 लाख रुपये की बड़ी राशि खर्च की जा रही थी। कागजों पर यह दावा किया गया था कि निर्माण कार्य के दौरान आधुनिक सीमेंट के बजाय पारंपरिक चूना तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है और इसके लिए चंदेरी तथा ललितपुर के विशेष कारीगरों को बुलाया गया था। इसके बावजूद यदि इतनी पुरानी और मजबूत धरोहर गिर जाती है, तो यह सीधे तौर पर निर्माण एजेंसी और निगरानी तंत्र की बड़ी लापरवाही को दर्शाता है।
इतिहास के पन्नों में कितना पुराना है यह मार्ग?
जानकारी के अनुसार, यह महाकाल द्वार करीब 14वीं सदी के शुरुआती दौर का एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक स्थल है। बेसाल्ट पत्थरों और ईंटों से तैयार इस परिसर में प्राचीन मेहराब, पत्थर की सीढ़ियां, सुंदर नक्काशीदार अवशेष और रामघाट तक जाने वाला वह पुराना रास्ता मौजूद है, जिससे पीढ़ियों से श्रद्धालु गुजरते आए हैं। समय-समय पर इसके पुनरुद्धार के प्रयास हुए हैं, और सिंहस्थ 2004 के दौरान भी यहां कुछ कार्य कराए गए थे, लेकिन इस बार का यह हादसा प्रशासन के लिए बड़ी चेतावनी है।
उज्जैन में 14वीं सदी का ऐतिहासिक महाकाल द्वार देर रात अचानक ढहा।
हादसे के वक्त कोई मौजूद नहीं था, टला बड़ा जनहानि का खतरा।
2 करोड़ 12 लाख रुपये की लागत से चल रहा था द्वार का जीर्णोद्धार कार्य।
पास में चल रही गहरी खुदाई और बारिश को माना जा रहा है मुख्य वजह।

