भोपाल में सरकारी शिक्षक भर्ती के उम्मीदवारों ने शुक्रवार को बड़ा प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्रियों शिवराज सिंह चौहान व ज्योतिरादित्य सिंधिया के काफिले को रोककर ज्ञापन सौंपा। 99 प्रतिशत से ज्यादा अंक लाने के बाद भी नियुक्ति न मिलने से युवाओं में भारी नाराजगी है।
भोपाल: राजधानी में शुक्रवार को उस वक्त हड़कंप मच गया जब नौकरी की मांग कर रहे युवा सड़कों पर उतर आए। भोपाल के नीलाम पार्क के बाहर शुक्रवार को जबरदस्त हाई ड्रामा देखने को मिला, जब सरकारी शिक्षक भर्ती की मांग कर रहे उम्मीदवारों ने मुख्यमंत्री के काफिले का रास्ता रोक लिया। इसके बाद प्रदर्शनकारियों ने केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान और ज्योतिरादित्य सिंधिया के काफिलों को भी रोककर अपनी मांगों का ज्ञापन सौंपा।
पिछले कई दिनों से चल रहा था मौन व्रत और धरना
ग्रेड-2 और ग्रेड-3 शिक्षक पदों पर भर्ती की मांग को लेकर ये उम्मीदवार पिछले पखवाड़े भर से सड़क पर मौन व्रत रखकर बैठे थे। वहीं, दूसरी ओर ग्रेड-1 के पदों के लिए आंदोलन कर रहे उम्मीदवारों का एक छोटा समूह पिछले 12 दिनों से क्रमिक भूख हड़ताल पर बैठा हुआ है। इस बीच आंदोलन की स्थिति तब और गंभीर हो गई जब भूख हड़ताल पर बैठी कीर्ति झा नाम की एक अभ्यर्थी की अचानक तबीयत बिगड़ गई। उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया, लेकिन इसके बावजूद बाकी प्रदर्शनकारियों ने अपना हौसला नहीं छोड़ा और वे अपनी मांग पर डटे रहे।
1.15 लाख पद खाली, फिर भी नहीं मिल रही नौकरी
प्रदर्शन में शामिल लेखा दास ने दावा किया कि मध्य प्रदेश के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों के 1.15 लाख पद खाली पड़े हैं, लेकिन सरकार इसके मुकाबले बहुत कम पदों पर ही नियुक्तियां कर रही है। इन पदों को भरने के लिएपात्रता परीक्षा साल 2024 में कराई गई थी, जबकि मुख्य चयन परीक्षा साल 2025 में आयोजित की गई थी। परीक्षा के लिए क्वालिफाइंग मार्क्स भी जनरल कैटेगरी के लिए 50 प्रतिशत और आरक्षित वर्ग के लिए 40 प्रतिशत तक कड़े रखे गए थे।
99% अंक लाने वाले युवा भी नियुक्ति के इंतजार में
इस भर्ती प्रक्रिया की सबसे बड़ी विडंबना यह है कि कड़े इम्तिहान पास करने वाले मेधावी छात्र भी आज दर-दर भटक रहे हैं। कई युवाओं ने परीक्षा में शानदार स्कोर हासिल किया है, जो उनकी नौकरी की गारंटी होना चाहिए था। दीप्ति राय ने 99.60 अंक, ममता गौतम ने 99.06 अंक और श्रेष्ठ जोशी ने 99.047 अंक हासिल किए हैं। इसके बावजूद इनमें से किसी भी उम्मीदवार को अब तक नियुक्ति पत्र नहीं मिला है।
क्या मेधा को इंतजार करना होगा?
प्रदर्शनकारियों ने एक कड़वा सच सबके सामने रखा है कि एक ऐसी व्यवस्था है जो कड़े इम्तिहान लेकर बड़े पैमाने पर उम्मीदवारों को पास तो करती है, लेकिन नौकरियां बहुत सीमित पदों पर देती है। जब राज्य के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी के कारण क्लासरूम खाली पड़े हैं, तो क्या वास्तव में मेधा को इस तरह गेट पर इंतजार कराया जाएगा? इस सवाल ने अब सियासत और प्रशासनिक हलकों में हलचल बढ़ा दी है।
ग्रेड-2 और ग्रेड-3 के उम्मीदवारों ने दो हफ्ते तक मौन व्रत रखा।
ग्रेड-1 के अभ्यर्थी पिछले 12 दिनों से भूख हड़ताल पर हैं।
परीक्षा में 99 प्रतिशत से ज्यादा अंक लाने वाले अभ्यर्थी भी नियुक्ति से वंचित हैं।
प्रदर्शनकारियों ने सीएम और केंद्रीय मंत्रियों के काफिले को रोककर ज्ञापन दिया।

