वडोदरा जिले की राजनीति और डेयरी सेक्टर में भ्रष्टाचार का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। सरकारी ऑडिट रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है कि वडोदरा जिला पंचायत अध्यक्ष के पति ने बड़ौदा डेयरी के करजन तालुका के सागडोल में मौजूद चिलिंग प्लांट में लाखों रुपये का गबन किया है। यह पशुपालकों और दूध उत्पादकों की मेहनत की कमाई से अपनी जेबें भरने का खुला खेल है।
ऑडिट रिपोर्ट में भ्रष्टाचार के काले कारनामे उजागर:
झूठे बिल और फर्जी पेमेंट: ऑडिट रिपोर्ट के मुताबिक, सागडोल चिलिंग प्लांट के नाम पर फर्जी और झूठे बिल लगाकर लाखों रुपये का गबन किया गया है।
टेंडर प्रोसेस में बड़ी गड़बड़ियां: सभी नियम-कानूनों को ताक पर रखकर अपनी पसंदीदा कंपनियों और चमचों को भारी मात्रा में काम दिया गया। नियमों का उल्लंघन और ज़्यादा पेमेंट: सरकारी और डेयरी नियमों का घोर उल्लंघन करके और खास कागज़ों पर असली कीमत से ज़्यादा पेमेंट दिखाकर एक बहुत बड़ा स्कैम किया गया है।
क्या यह स्कैम BJP के किसी ‘बाहुबली’ नेता की छत्रछाया में दब जाएगा?
सूत्रों से मिली बेहद चौंकाने वाली जानकारी के मुताबिक, करजन तालुका में एक्टिव एक BJP ‘बाहुबली’ नेता का इस पूरे स्कैम और इसके आकाओं में सीधा हाथ है। राजनीतिक ताकत और ताकत के दम पर इस करप्शन को दबाने की पूरी कोशिश की जा रही है। अब सबसे बड़ा सवाल यह उठता है:
क्या BJP सरकार अपनी ही पार्टी के पदाधिकारियों और नेताओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की हिम्मत करेगी?
क्या विजिलेंस या एंटी-करप्शन ब्यूरो (ACB) इन स्कैमर्स के खिलाफ जांच सौंपेगी या हर बार की तरह “जांच के नाम पर ड्रामा” करके इस मामले को रफा-दफा कर दिया जाएगा?
राज्य सरकार को तुरंत एक स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) बनानी चाहिए! यह मामला सिर्फ़ कुछ लाख रुपये का नहीं है, बल्कि करजण और पूरे वडोदरा ज़िले के हज़ारों गरीब पशुपालकों की मेहनत की कमाई का है। राज्य के मुख्यमंत्री और गृह विभाग को बिना किसी देरी के इस मामले की निष्पक्ष जांच का आदेश देना चाहिए। अगर वडोदरा ज़िला पंचायत अध्यक्ष के पति और उनके आकाओं के ख़िलाफ़ तुरंत FIR दर्ज नहीं की गई और कार्रवाई नहीं की गई, तो
‘महानगर मेट्रो ‘ इस घोटाले के एक-एक कागज़ और पर्दे के पीछे के ‘बाहुबली’ चेहरों को जनता की अदालत में उजागर करता रहेगा।

