Homeटॉप न्यूज़भ्रष्टाचार के गड्ढे में आम लोगों की ज़िंदगी: सांसरोद-नरेश्वर रोड 'मौत का...

भ्रष्टाचार के गड्ढे में आम लोगों की ज़िंदगी: सांसरोद-नरेश्वर रोड ‘मौत का जाल’ बन गई है, प्रशासन के पापों का खामियाजा लोग भुगत रहे हैं!

‘टेम्पररी ड्रामा बंद करो, पक्की सड़क बनाओ’ — तीर्थस्थल की ओर जाने वाली मुख्य सड़क पर 1 से 2 फीट गहरे गड्ढों के कारण गाड़ी चलाने वालों की जान दांव पर लगी; प्रशासन के पापों के कारण अगर एम्बुलेंस फंस जाए तो कौन ज़िम्मेदार होगा?

सनपुरा/करजण:

सरकार करोड़ों रुपये के विकास का दावा करती है, लेकिन करजण तालुका के सांसरोद से प्रसिद्ध तीर्थस्थल नरेश्वर तक जाने वाली सड़क प्रशासन की घोर लापरवाही और भ्रष्टाचार की जीती-जागती तस्वीर पेश करती है। पिछले कुछ सालों से यह सड़क इतनी खराब हो गई है कि यह तय करना मुश्किल हो गया है कि इसे ‘सड़क’ कहें या ‘मौत का कुआं’। सड़क से डामर गायब हो गया है और जगह-जगह 1 से 2 फीट गहरे गड्ढों का साम्राज्य बन गया है। मानसून में गड्ढे ‘साइलेंट किलर’ बन जाते हैं

मानसून के मौसम में बारिश का पानी भरने से ये गड्ढे ‘साइलेंट किलर’ साबित हो रहे हैं। इनमें पानी भरा होने की वजह से गाड़ी चलाने वालों को गड्ढे की गहराई का ज़रा भी अंदाज़ा नहीं होता। खासकर रोज़ाना काम और बिज़नेस पर जाने वाले चार पहिया वाहन और गाड़ी चलाने वालों के लिए इस सड़क से गुज़रना अपनी जान हथेली पर रखने जैसा है। गड्ढों से बचने के लिए अचानक ब्रेक लगाना पड़ता है या गाड़ी घुमानी पड़ती है, जिससे रोज़ाना छोटे-बड़े एक्सीडेंट हो रहे हैं।

गांवों की आर्थिक और सामाजिक रीढ़ टूट गई है

यह सड़क सिर्फ़ एक सड़क नहीं, बल्कि आस-पास के दर्जनों गांवों की लाइफ़लाइन है:

स्टूडेंट्स-एम्प्लॉई: स्कूल-कॉलेज जाने वाले स्टूडेंट और एम्प्लॉई समय पर नहीं पहुंच पाते और हमेशा एक्सीडेंट का डर बना रहता है।

किसानों की हालत: अपनी उपज और सामान को मंडी ले जाते समय किसानों की गाड़ियां खराब हो जाती हैं और उन्हें दोगुना किराया देना पड़ता है।

मरीजों के लिए मुसीबत: सबसे शर्मनाक बात यह है कि इस सड़क पर एम्बुलेंस जैसी इमरजेंसी गाड़ियां भी फंस जाती हैं। किसी गंभीर रूप से बीमार मरीज़ या गर्भवती महिला को अस्पताल ले जाने में देरी किसी की जान भी ले सकती है।

करोड़ों का फ्यूल या करप्शन की गंगोत्री? नेता और वकील आक्रामक

एडवोकेट मिनेश वकीलन, करजन तालुका कांग्रेस प्रेसिडेंट पिंटू पटेल के साथ-साथ लोकल वकीलों और नेताओं ने सिस्टम पर कड़ा हमला बोला है और सवाल उठाए हैं, “हर साल कागज़ पर दावा किया जाता है कि जनता के टैक्स के करोड़ों रुपये खर्च करके सड़कें बनाई जा रही हैं, तो ये सड़कें कुछ ही महीनों में क्यों बह जाती हैं? इतना घटिया मटीरियल इस्तेमाल करने वाले कॉन्ट्रैक्टर और अधिकारियों की मिलीभगत की जांच क्यों नहीं होती?”

जनता का गुस्सा: ‘अब आटे, पानी और लकड़ी से गड्ढे भरने से काम नहीं चलेगा’

लोकल गांववालों और गाड़ी चलाने वालों की बर्दाश्त की हद अब हो गई है। लोग साफ तौर पर मांग कर रहे हैं कि हर बार सिर्फ मिट्टी या बजरी डालकर गड्ढे भरने का टेम्पररी ड्रामा बंद होना चाहिए। जनता को अच्छी क्वालिटी की और हमेशा चलने वाली CC सड़कें या मजबूत डामर की सड़कें चाहिए। अगर संबंधित रोड और बिल्डिंग डिपार्टमेंट और ज़िम्मेदार अधिकारियों ने जल्द से जल्द कोई पक्का हल नहीं निकाला, तो लोकल लोगों ने आने वाले दिनों में रोड ब्लॉक करने और हिंसक आंदोलन करने की धमकी दी है।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -
Google search engine

Most Popular

Recent Comments