Homeभारतछतीसगढ़जिनके घर शीशे के होते हैं तो दूसरों के घर में पत्थर...

जिनके घर शीशे के होते हैं तो दूसरों के घर में पत्थर नहीं मारते गांव में सामाजिक बहिष्कार की धमकी देकर अवैध वसूली करने वाले कितने दलाल

डोंगरगांव विशेष संवाददाता राजनांदगांव छत्तीसगढ़ : कहते हैं जिसके घर शीशे के होते हैं उन्हें दूसरों पर पत्थर नहीं मारना चाहिए इसी तरीके से इस दुनिया में जिसने भी अगर अपनी मां का दूध पिया है और उसके बाद भी उसका पेट नहीं भरा है तो यह मानकर चलें दुनिया में वह किसी भी चीज या वस्तु को खा पीकर अपने पेट नहीं भर सकता राजनांदगांव जिले में लगातार हैरान कर देने वाली घटनाक्रम सामने आ रही है वह है सामाजिक बहिष्कार का मसलन गांव में बैठक में नहीं गया उसे सामाजिक बहिष्कार किसी की बेटी अगर दूसरे से शादी कर लिया तो सामाजिक बहिष्कार इतना ही नहीं सरकार अंतर राज्य विवाह के लिए ₹50000 प्रोत्साहन राशि दे रही है

लेकिन गांव के कुछ दलाल एक से लेकर ₹2 लाख तक के ऐसे मामले पर वसूली कर रहे हैं हर गांव की स्थिति यही है छत्तीसगढ़ में लगभग सभी गांव में यही स्थिति है यहां कानून से अलग समानांतर सरकार चलती है आज मामला राजनांदगांव से कुछ किलोमीटर की दूरी पर स्थित डिलापहरी गांव का आया है जहां पर 22 परिवारों को इसलिए समाज से बहिष्कृत कर दिया कि किसी ने इंटर कास्ट मैरिज किया है तो किसी ने सामाजिक बैठक की बात को नहीं मानी है तो किसी को एक लाख की डिमांड की गई थी जिन्होंने 50000 जमा की है इसलिए सामाजिक बहिष्कार और मजेदार बात यह है कि इसमें कुछ जनप्रतिनिधि शामिल है हैरान और परेशान करने वाली बात तो यह है कि जो काम कानून के दायरे में रहकर संविधान के दायरे में रहकर होना चाहिए वह काम दिन के उजाले में गांव के कुछ चंद दलाल नुमा लोगों के व्यक्तिगत खुन्नस की वजह से हो रही है ऐसे बेतुके निर्णय सामने आ रहे हैं

इसी तरीके से छुरिया ब्लॉक के बननवागांव में पन्नालाल रामटेके को इसलिए समाज से बहिष्कृत कर दिया कि उन्होंने गांव में चंदा नहीं दिया इसी तरीके से छुरिया ब्लाक के घेरूघाट निवासी करण यादव को को इसलिए समाज से बहिष्कृत कर दिया कि उन्होंने अपने गली में पढ़ने वाले एक पेड़ को काट दिया वहां के मुखियाओं को नागवार गुजरा और उन्होंने उसे समाज से बहिष्कृत कर दिया जब किसी व्यक्ति को समाज से बहिष्कृत किया जाता है तो उनका खान-पान राग रंग हंसी खुशी सारा कुछ छीन जाता है कुछ ऐसा ही डीलापहरी के शेषनारायण वर्मा के साथ हुआ जब उन्हें समाज से बहिष्कृत किया गया और लंबी चौड़ी पैसे की डिमांड की गई उसकी पत्नी और उसमें बहस हो गई और उसकी पत्नी घर छोड़कर एक महीने से गायब है उनकी बेटी दूसरे कास्ट से मैरिज कर ली है गौरतलब है की इंटर कास्ट मैरिज में सरकार प्रोत्साहन राशि देती है लेकिन यहां गांव देहात के कुछ दलाल नुमा लोग तो इन्हें कमाई का जरिया बना लिया है

इसी तरीका से राजनांदगांव से महाराष्ट्र रोड पर 13 किलोमीटर दूरी पर स्थित जी रोड कोपेडीह में भारत लाल वर्मा को इसलिए समाज से बहिष्कृत किया गया है कि उन्होंने मंच की जगह में कुछ जगह को अतिक्रमण कर लिया है लेकिन मजेदार बात यह है कि जिन लोगों ने उन्हें समाज से बहिष्कृत किया वह खुद भी पाख साफ नहीं है एक का अवैध तरीके से पॉन ठेला चलता है 20 साल से दूसरा गांव में शराब बेचवा चुका है तीसरा का तो कैरेक्टर ही लेस है मतलब यहां तुम करो तो चमत्कार और हम करें तो अत्याचार वाली कहावत चल रही है गांव-गांव ऐसे दलाल से भरी पड़ी है इसी गांव में एक और बेतुका निर्णय लिया गया है कि जो गाली गलौज करेगा उसे ₹21000 दंड लिया जाएगा और मजेदार बात यह है कि जो जिसने इस नियम को बनाया है वह खुद गुहरा नंबर वन है पूछने वाली बात है की गाली गुप्तार जैसे चीजों में पुलिस चौकी में मचलका जमानत होता है यानी की मुप्त में होने वाले काम के जवज में गांव के दलालों को ₹21000 देना पड़ेगा धत तेरी के सिस्टम शासन प्रशासन इस पर एक्शन ले और ऐसे दलाल लोगों को कर्फ्यू लगा लगाकर एक-एक को अंदर डालें तब कहि सामाजिक बहिष्कार का भूत उनके सर से उतरेगा

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