यह समाज और मानव स्वभाव की एक कड़वी सच्चाई है। जब तक आप शांत बैठे हैं, भीड़ का हिस्सा बनकर एक सामान्य जीवन जी रहे हैं, तब तक किसी को आपसे कोई परेशानी नहीं होती। लेकिन जिस पल आप कुछ अलग करने की सोचते हैं, अपने सपनों के पीछे भागना शुरू करते हैं और सफलता की दिशा में
एक कदम आगे बढ़ाते हैं, ठीक उसी पल सवालों, रुकावटों और आलोचनाओं की बौछार शुरू हो जाती है।
सच्चाई यह है कि यह दुनिया आपके लिए कभी रेड कार्पेट नहीं बिछाएगी। सफलता के रास्ते में सबसे बड़ी चुनौती कोई पहाड़ नहीं, बल्कि लोगों की नकारात्मक मानसिकता होती है।
आलोचकों की मानसिकता और टांग खींचने की आदत
समाज में एक बड़ा वर्ग ऐसा है जो खुद कुछ नया करने का साहस नहीं जुटा पाता। जब कोई व्यक्ति अपनी मेहनत के दम पर आगे बढ़ता है, तो निष्क्रिय बैठे लोगों को अपनी कमियां चुभने लगती हैं। खुद को सही साबित करने के लिए वे काम करने वाले की गलतियां ढूंढने लगते हैं।
यह ठीक ‘केकड़े की प्रवृत्ति’ जैसी है—यदि टोकरी में से एक केकड़ा बाहर निकलने की कोशिश करे, तो बाकी सब मिलकर उसे नीचे खींच लेते हैं। कुछ नया रचने में बरसों की तपस्या और पसीना लगता है, लेकिन उस पर उंगली उठाने में केवल एक पल।
पतंग भी आसमान की ऊंचाइयों को तभी छूती है जब वह हवा के अनुकूल नहीं, बल्कि विपरीत दिशा में उड़ती है। जीवन में लोगों का विरोध भी उसी विपरीत हवा की तरह है वह आपको गिराने के लिए नहीं, बल्कि और ऊंची उड़ान भरने की ताकत देने आता है। “हाथी जब बाजार से गुजरता है, तो पीछे कई आवाजें होती हैं, लेकिन हाथी कभी रुककर सफाई नहीं देता; वह अपनी ही धुन में आगे बढ़ता रहता है।”
आलोचनाओं के बीच आगे कैसे बढ़ें?
जब लोग आलोचना करें: गुस्से में आकर विवाद में न पड़ें; मौन रहकर अपने काम पर ध्यान दें।
जब लोग शक करें: अपना आत्मविश्वास न खोएं; बेहतरीन परिणाम देकर उनकी बोलती बंद करें।
जब लोग रास्ता रोकें: डरकर पीछे न हटें; अपने संकल्प को दोगुना करके आगे बढ़ते रहें।
चिराग बनकर जलना आसान नहीं है, क्योंकि हवा हमेशा उसे बुझाने की फिराक में रहती है। लेकिन जो तूफानों से लड़कर जलता है, इतिहास उसी को याद रखता है।
जो लोग आपके संघर्ष में कभी साथ नहीं थे, उन्हें आपकी सफलता पर टिप्पणी करने का कोई अधिकार नहीं है। लोग आपको आसानी से आगे नहीं बढ़ने देंगे, यह सच है; लेकिन उससे भी बड़ा सच यह है कि आपको आगे बढ़ने से रोकने की ताकत भी किसी में नहीं है, जब तक कि आप खुद हार न मान लें।
लोगों की बातों को दरकिनार करें, अपने परिश्रम पर अटूट भरोसा रखें और मजबूत इरादों के साथ अपने लक्ष्य की ओर बढ़ते रहें!
दर्शना पटेल (नेशनल मेडलिस्ट, नेशनल अवॉर्ड से सम्मानित) स्पोर्ट्स टीचर.

