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‘ऐसे रास्ता नहीं रोक सकते, डीएम कार्यालय कूच कर रहे किसानों को सीओ सुचिता सिंह ने रोका, जमकर नोक-झोंक

मेरठ में 11 सूत्रीय मांगों को लेकर डीएम कार्यालय कूच कर रहे किसानों और सीओ शुचिता सिंह के बीच रास्ते को बाधित करने को लेकर तीखी नौंकझोंक हुई।

उत्तरप्रदेश के मेरठ में किसानों और पुलिस के बीच सोमवार को उस समय तनावपूर्ण स्थिति बन गई, जब किसानों को जिलाधिकारी कार्यालय जाने से रोक दिया गया। किसानों को समझाने पहुंची सीओ शुचिता सिंह और किसानों के बीच रास्ते को बाधित करने को लेकर तीखी नौंकझोंक भी हुई।

सीओ ने किसानों को रास्ता न बाधित करने और शांतिपूर्ण तरीके से जाने को कहा। इस पर किसान नाराज हो गए। एसपी सिटी के हस्तक्षेप पर मामला शांत हुआ और किसानों ने ज्ञापन सौंपकर धरना समाप्त कर दिया। सीओ और किसानों के बीच हुए संवाद का वीडियो सामने आया है।

11 सूत्रीय मांगों को लेकर डीएम से मिलने निकले किसान

मेरठ मे भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) के कार्यकर्ता 11 सूत्रीय मांगों को लेकर डीएम से मिलने निकले। किसान नेताओं ने विरोध स्वरूप कमिश्नरी चौराहे पर धरना शुरू कर दिया और ट्रैक्टर खड़े कर तीन दिशाओं से रास्ता अवरुद्ध कर दिया। इस दौरान कई घंटों तक प्रदर्शन चला। किसानों का कहना था कि वे खाद, कृषि, बिजली, सिंचाई, भूमि विवाद समेत विभिन्न समस्याओं से संबंधित 11 मांगों को जिलाधिकारी के समक्ष रखना चाहते थे। पुलिस ने उन्हें बीच रास्ते में ही रोक दिया और आगे बढ़ने की अनुमति नहीं दी।

पुलिस प्रशासन की रोक से नाराज किसानों ने कमिश्नरी चौराहे पर ही पुलिस ओर प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए किसानों ने अपने ट्रैक्टर सड़क पर खड़े कर दिए, जिससे चौराहे के तीन ओर का यातायात प्रभावित हो गया। इसके बाद किसान सड़क पर दरी बिछाकर धरने पर बैठ गए और प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी। किसान नेताओं ने आरोप लगाया कि उनकी समस्याओं को लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है।

किसानों द्वारा दिए जा रहे धरने के कारण कमिश्नरी चौराहे पर यातायात व्यवस्था प्रभावित होने लगी। मौके पर भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया। इस दौरान सीओ सिविल लाइन शुचिता सिंह ने किसानों को कहा कि आप रास्ता नहीं बाधित कर सकते। उन्होंने किसानों से शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन करने को कहा। इसके बाद सीओ ने ट्रैक्टर हटाने के निर्देश दिए और क्रेन बुलाने की तैयारी शुरू कर दी। जिसको लेकर किसानों ने चेतावनी दी कि यदि किसी ट्रैक्टर को जबरन हटाने का प्रयास किया गया तो बड़ा आंदोलन खड़ा हो जाएगा, जिसकी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी। इसकी सूचना सीओ शुचिता सिंह ने वरिष्ठ अधिकारियों को दी। सूचना के मिलने के बाद एसपी सिटी विनायक गोपाल भौंसले मौके पर पहुंचे। उन्होंने किसान नेताओं से बातचीत की और उनकी मांगों को गंभीर बताते हुए समाधान का भरोसा दिलाते हुए खुद किसानों के बीच धरना स्थल पर बैठ गए, जिससे माहौल पूरी तरह शांत हो गया।

कौन हैं शुचिता सिंह

शुचिता सिंह मूल रूप से उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले के बहुचरा गांव की रहने वाली हैं। 2018 बैच की पीसीएस अफसर हैं। उनके पिता अखिलेश सिंह मध्य प्रदेश में पीसीएस अधिकारी रह चुके हैं। उन्होंने दिल्ली के हिंदू कॉलेज से अपनी पढ़ाई पूरी की और गोल्ड मेडल हासिल किया। शैक्षणिक उपलब्धियों के बाद उन्होंने मध्य प्रदेश में लगभग डेढ़ वर्ष तक जिला जनसंपर्क अधिकारी (डीपीआरओ) के पद पर कार्य किया। इसके बाद उनका चयन पुलिस सेवा में हुआ। पुलिस विभाग में आने के बाद उन्होंने मुरादाबाद में करीब डेढ़ वर्ष का प्रशिक्षण प्राप्त किया। जहां उन्हें सर्वश्रेष्ठ कैडेट का सम्मान भी मिला। प्रशिक्षण पूरा होने के बाद उनकी पहली तैनाती मेरठ में हुई। जहां उन्होंने लगातार साढ़े तीन वर्षों तक अपनी सेवाएं दीं। कई चर्चित मामलों की वजह से शुचिता को लेड़ी सिंघम के नाम से जाना जाने लगा।

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