HomeUncategorizedNH-52 पर “हरियाली का कत्ल”: बिना अनुमति उखाड़े गए 15 साल पुराने...

NH-52 पर “हरियाली का कत्ल”: बिना अनुमति उखाड़े गए 15 साल पुराने नीम के पेड़

10 गुना पौधारोपण नियम की अनदेखी, वन विभाग मौन—ग्रामीणों और पर्यावरण प्रेमियों में भारी आक्रोश

टोंक क्षेत्र में नेशनल हाईवे-52 पर चल रहे सड़क चौड़ीकरण कार्य ने पर्यावरण संरक्षण की हकीकत को कठघरे में खड़ा कर दिया है। मिर्च मंडी सोहेला से बनास पुलिया तक बन रही सर्विस रोड के लिए हरे-भरे नीम के पेड़ों को दिनदहाड़े उखाड़कर फेंक दिया गया। यह कार्रवाई न केवल पर्यावरणीय नियमों की अवहेलना है, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही का भी बड़ा उदाहरण बनकर सामने आई है।

जानकारी के अनुसार, यह मार्ग पहले नेशनल हाईवे-12 था, जिसे बाद में NH-52 में परिवर्तित किया गया। उस दौरान सामाजिक वानिकी योजना के तहत वन विभाग ने सड़क किनारे बड़े पैमाने पर पौधारोपण किया था। आज वही पेड़ करीब 15 साल में विकसित होकर घने और पर्यावरण के लिए बेहद महत्वपूर्ण बन चुके थे। लेकिन सड़क चौड़ीकरण के नाम पर इन पेड़ों को जड़ से उखाड़ दिया गया।

सबसे गंभीर बात यह है कि नियमों के अनुसार किसी भी पेड़ को हटाने से पहले वन विभाग से अनुमति लेना अनिवार्य होता है। साथ ही, एक पेड़ के बदले कम से कम 10 नए पौधे लगाने का प्रावधान है। लेकिन इस पूरे मामले में न तो अनुमति ली गई और न ही 10 गुना पौधारोपण का नियम लागू किया गया। उखाड़े गए पेड़ों को वन विभाग की तारबंदी में डाल दिया गया, जिससे यह सवाल और भी गहरा हो गया है कि आखिर विभाग की भूमिका क्या है।

स्थानीय लोगों और वन्य प्रेमियों में इस घटना को लेकर भारी रोष है। उनका कहना है कि यह सिर्फ पेड़ों की कटाई नहीं, बल्कि “हरियाली का कत्ल” है। वर्षों से पर्यावरण संतुलन बनाए रखने वाले इन पेड़ों को इस तरह खत्म करना भविष्य के लिए खतरे की घंटी है। उन्होंने मांग की है कि प्रत्येक पेड़ के बदले तुरंत 10 पौधे लगाए जाएं और उनकी नियमित निगरानी सुनिश्चित की जाए।

ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया है कि ठेकेदार कंपनी ने पूरी तरह मनमानी करते हुए नियमों को ताक पर रख दिया। यदि समय रहते सख्त कार्रवाई नहीं की गई, तो भविष्य में ऐसे मामले और बढ़ सकते हैं।

अब इस पूरे प्रकरण में कई अहम सवाल खड़े हो रहे हैं—
बिना अनुमति पेड़ उखाड़ने की जिम्मेदारी किसकी है?
10 गुना पौधारोपण का नियम क्यों नहीं अपनाया गया?
और सबसे बड़ा सवाल, वन विभाग अब तक मौन क्यों है?

देखना यह होगा कि प्रशासन इस गंभीर मुद्दे पर कब जागता है और दोषियों के खिलाफ क्या कार्रवाई करता है, या फिर “हरियाली का कत्ल” यूं ही जारी रहेगा।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -
Google search engine

Most Popular

Recent Comments