महानगर मेट्रो के बारे में अफवाह फैलाने वाले किसी भी साजिशकर्ता को बख्शा नहीं जाएगा: पवन माकन (ग्रुप एडिटर)
अहमदाबाद: ईडर से एक ऐसा खौफनाक और चौंकाने वाला सच सामने आया है, जिसने पूरे जैन समाज की आत्मा को झकझोर कर रख दिया है। यह सिर्फ आरोप नहीं, बल्कि आस्था की आड़ में पनप रहे एक ‘वसूली सिंडिकेट’ का कच्चा चिट्ठा है। इस संगठित गिरोह ने जैन संतों की पवित्र छवि को मिट्टी में मिलाने और करोड़ों रुपये ऐंठने की खौफनाक साजिश रची थी।
‘महानगर मेट्रो न्यूज़’ ने आज इस महा-घोटाले और इसके पीछे छिपे सफेदपोश चेहरों को पूरी तरह से बेनकाब कर दिया है।
हनीट्रैप का जाल और ब्लैकमेलिंग का गंदा खेल
यह पूरी खौफनाक साजिश जैन मुनि राजतिलक सागरजी महाराज को निशाना बनाकर बुनी गई थी। सूत्रों और जांच रिपोर्टों के अनुसार, मुनि को एक मनगढ़ंत ‘हनीट्रैप’ मामले में फंसाने के लिए एक बेहद शातिर जाल बिछाया गया और उनके खिलाफ एफआईआर तक दर्ज करा दी गई। इस घटना ने शुरुआत में पूरे जैन समाज में दहशत और आक्रोश का माहौल पैदा कर दिया था।
लेकिन, पुलिस की गहरी तफ्तीश के सामने झूठ का यह महल ताश के पत्तों की तरह ढह गया। जांच में साफ हो गया कि इस पूरी साजिश का इकलौता मकसद मुनि पर दबाव बनाकर करोड़ों की भारी-भरकम रकम ऐंठना था।
हलफनामे ने फाड़ा झूठ का नकाब, सामने आया सच
इस महा-षड्यंत्र में सबसे बड़ा धमाका तब हुआ जब शिकायतकर्ता किरण हर्षदभाई दोशी और उनकी पत्नी ने अधिकारियों के सामने एक हलफनामा (Affidavit) पेश किया।
इस हलफनामे ने सिंडिकेट की पोल खोल दी। शिकायतकर्ताओं ने खुद कबूल किया कि यह पूरा नाटक सिर्फ और सिर्फ पैसों के लालच में रचा गया था। पुलिस और न्यायपालिका की पारदर्शी जांच के बाद, जैन मुनि राजतिलक सागरजी महाराज बेदाग और पूरी तरह निर्दोष साबित हुए हैं।
इस एक्सपोज़ में ब्लैकमेलिंग गिरोह के मुख्य किरदारों के नाम सामने आए हैं। सूत्रों के मुताबिक, जगत पारेख, विक्रम सिंघवी, हार्दिक हुडिया और विक्रम बाफना जैसे नाम इस घिनौनी साजिश से जुड़े हैं। यह सिंडिकेट जैन समाज के प्रतिष्ठित लोगों को टारगेट करके धन उगाही का काला कारोबार चलाता है।
एक्सपोज़ से बौखलाया सिंडिकेट, ‘महानगर मेट्रो’ पर कीचड़ उछालने की नाकाम कोशिश
जब महानगर मेट्रो ने निडर पत्रकारिता करते हुए इस ब्लैकमेलिंग रैकेट की धज्जियां उड़ाईं और इनका असली चेहरा बेनकाब किया, तो यह पूरा गिरोह तिलमिला उठा। अपनी काली करतूतों पर पर्दा डालने और सच की आवाज को दबाने के लिए इस सिंडिकेट ने एक नई और ओछी चाल चली।
चैनल की बेदाग साख को नुकसान पहुंचाने के लिए, इन साजिशकर्ताओं ने महानगर मेट्रो को ‘बिकाऊ’ बताते हुए झूठी अफवाहें फैलाना शुरू कर दिया है। यह उनकी हार और छटपटाहट का सीधा सबूत है।
अफवाह फैलाने वाले बख्शे नहीं जाएंगे” – पवन माकन की दो टूक चेतावनी
सिंडिकेट की इन गीदड़ भभकियों और झूठे प्रोपेगेंडा पर महानगर मेट्रो के ग्रुप एडिटर पवन माकन ने बेहद कड़ा और आक्रामक रुख अपनाया है। उन्होंने ब्लैकमेलर्स को खुली चेतावनी देते हुए कहा है:
“महानगर मेट्रो न कभी झुका है, न कभी बिकेगा। जिन लोगों ने धर्म को अपनी काली कमाई का जरिया बनाया है, अब उनकी उल्टी गिनती शुरू हो चुकी है। अपनी पोल खुलते देख जो लोग ‘महानगर मेट्रो’ के खिलाफ झूठी अफवाहें फैला रहे हैं, उन्हें किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। हम ऐसे ब्लैकमेलर्स की धमकियों से डरने वाले नहीं हैं। इस पूरे नेक्सस को जड़ से उखाड़ फेंकने और दोषियों को जेल की सलाखों के पीछे पहुंचाने तक हमारा यह महा-अभियान जारी रहेगा।”
जैन समाज में उबाल: “दोषियों को मिले सख्त सजा”
इस महा-खुलासे के बाद पूरे जैन समाज में भारी आक्रोश का ज्वालामुखी फूट पड़ा है। समाज के दिग्गजों और आम लोगों ने इसे केवल एक संत पर नहीं, बल्कि “जैन धर्म की पवित्रता, गरिमा और आस्था पर सबसे बड़ा आतंकी हमला” करार दिया है।
पूरे देश से अब एक ही मांग उठ रही है— इस पूरे सिंडिकेट और इसमें शामिल हर एक सफेदपोश चेहरे को बेनकाब कर उनके खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।
महानगर मेट्रो समाज के साथ खड़ा है। मुनिराज का निर्दोष साबित होना सत्य की पहली जीत है, लेकिन इन साजिशकर्ताओं के खिलाफ असली और आर-पार की लड़ाई अब शुरू हो चुकी है!

