स्पेशल ओपिनियन आर्टिकल : “आज़ादी सिर्फ़ गोरे मालिकों को निकालने से नहीं मिलती, आज़ादी तभी बनी रहती है जब लोग अपने अधिकारों के लिए हमेशा जागरूक रहें…” दशकों पहले, राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने देशवासियों को चेतावनी दी थी, “अगर आप जागरूक नहीं हुए, तो आपके देसी मालिक अंग्रेज मालिकों से भी बुरे साबित होंगे।”
आज 21वीं सदी के भारत में, शासकों के घमंड, भ्रष्टाचार और ज़ुल्म को देखकर, बापू की ये बातें एक खुलासे या दिल दहला देने वाली भविष्यवाणी जैसी साबित हो रही हैं!
गोरे मालिक चले गए, लेकिन शासकों की सोच नहीं बदली!
अंग्रेज़ों के राज में जनता को ‘गुलाम’ माना जाता था, और आज डेमोक्रेसी के नाम पर चुने गए नेता और अधिकारी जनता को ‘पादपीठ’ समझते हैं। एजुकेशन सेक्टर में हुआ पेपर लीक कांड हो, गरीब पशुपालकों की कमाई के करोड़ों रुपये हड़पना हो, या अपने हक के लिए आवाज़ उठाने वाले बेकसूर स्टूडेंट्स और युवाओं पर बेरहमी से लाठीचार्ज हो—ये सब इस बात की गवाही देते हैं कि सत्ता के नशे में अंधा सिस्टम, अंग्रेजों के काले कानूनों से भी ज़्यादा क्रूर हो गया है।
चुप रहोगे तो कुचल दिए जाओगे: जागरूकता ही एकमात्र हथियार है
गांधीजी कहते थे कि जब ताकत बहुत ज़्यादा हो जाती है, तो वह हमेशा लोगों के हक छीनने की कोशिश करती है। बापू ने चेतावनी दी थी कि अगर लोग झूठ और अन्याय के सामने आंखें मूंद लेते हैं और चुप रहते हैं, तो शासकों की ताकतें इतनी बेकाबू हो जाएंगी कि वे ब्रिटिश राज से भी ज़्यादा क्रूर रूप ले लेंगी।
आज जब शासक विरोध की आवाज़ दबाने के लिए खुलेआम खाकी वर्दी और गुंडा तत्वों का इस्तेमाल कर रहे हैं, तो लोगों की चुप्पी इस देश के लिए सबसे बड़ा खतरा बन गई है। ‘पाको गुजरात’ का नारा:
प्यारे बापू के ये शब्द सिर्फ़ बीते हुए कल की बात नहीं हैं, बल्कि आज के देश के हर नागरिक, युवा और रखवाले के लिए एक चेतावनी हैं। अगर हम आज भी अपने हक़, शिक्षा और न्याय के लिए जागरूक नहीं हुए, तो आने वाली पीढ़ियाँ हमें कभी माफ़ नहीं करेंगी।
अधिकारियों को याद रखना चाहिए कि यह देश लोगों का है, किसी मालिक का नहीं! अब समय आ गया है कि वे जागें और इन नकली शासकों की आँखों में आँखें डालकर सवाल पूछें!

