महानगर मेट्रो: विशेष रिपोर्ट
ऑयल इम्पोर्ट 89% पार: क्या ONGC की बदहाली और ‘गुजरात मॉडल’ का केजी बेसिन दांव देश को भारी पड़ा?
नई दिल्ली | विशेष संवाददाता
देश की ऊर्जा सुरक्षा को लेकर बड़े दावे किए जाते रहे हैं, लेकिन वर्तमान आंकड़े और CAG की हालिया टिप्पणियां एक अलग ही कहानी बयां कर रही हैं। जहाँ यूपीए सरकार के दौरान कच्चे तेल का आयात 77% था, वहीं अब यह बढ़कर 89% के खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए पूरी तरह विदेशों पर निर्भर होता जा रहा है?
ONGC: नेहरू की विरासत से वर्तमान की बदहाली तक
पंडित जवाहरलाल नेहरू के कार्यकाल से लेकर बाद की सरकारों ने ONGC (तेल और प्राकृतिक गैस निगम) को एक महारत्न कंपनी के रूप में सींचा ताकि भारत आत्मनिर्भर बन सके। लेकिन हाल ही में CAG (नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक) की रिपोर्ट ने खलबली मचा दी है। रिपोर्ट के अनुसार:
- ONGC के तेल और गैस कुओं के मरम्मत और रखरखाव (Maintenance) में बड़े स्तर पर अनियमितताएं पाई गई हैं।
- रखरखाव के कार्यों में देरी और कुप्रबंधन के कारण उत्पादन क्षमता में भारी गिरावट आई है।
- विपक्ष का आरोप है कि जानबूझकर सरकारी संपत्तियों को कमजोर किया जा रहा है।
केजी बेसिन का ‘मिराज’: 17,000 करोड़ का क्या हुआ?
गुजरात के मुख्यमंत्री रहते हुए नरेंद्र मोदी ने कृष्णा गोदावरी (KG) बेसिन में 20 TCF (ट्रिलियन क्यूबिक फीट) गैस मिलने का दावा किया था। उस दौरान जोश में कहा गया था— “अब मेरा गुजराती नल खोलेगा तो पेट्रोल और डीजल आएगा।”
महानगर मेट्रो की पड़ताल और RTI के खुलासे:
- 51 कुओं का रहस्य: केजी बेसिन ब्लॉक के लिए भारी निवेश हुआ, 51 कुएं खोदे गए।
- शून्य उत्पादन: RTI से मिली जानकारी के अनुसार, इन कुओं से पेट्रोल या डीजल की एक बूंद भी प्राप्त नहीं हुई है।
- 17,000 करोड़ का बोझ: आरोप है कि गुजरात स्टेट पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन (GSPC) के इस ‘विफल’ प्रोजेक्ट को बाद में ONGC के मत्थे मढ़ दिया गया, जिससे सरकारी खजाने को लगभग 17,000 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।
वित्त मंत्री से सीधे सवाल
सदन और जनता के बीच अब यह मांग उठ रही है कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण इन बिंदुओं पर स्पष्टीकरण दें:
“अगर गुजरात के केजी बेसिन से ONGC ने 51 कुएं अपने नियंत्रण में लिए थे, तो आज तक उनमें से कुल कितना तेल और गैस निकला? क्या 17,000 करोड़ का निवेश सिर्फ एक चुनावी नारा बनकर रह गया?”
महानगर मेट्रो का नजरिया:
आयात पर बढ़ती निर्भरता और घरेलू उत्पादन में भ्रष्टाचार के आरोप देश की अर्थव्यवस्था की कमर तोड़ रहे हैं। अगर सरकारी कंपनियों (PSUs) को इसी तरह ‘मैनेजमेंट’ के नाम पर खोखला किया गया, तो आत्मनिर्भर भारत का सपना केवल कागजों तक सीमित रह जाएगा।
चूंकि यह डेटा सीधा आरटीआई (RTI) और कैग (CAG) की रिपोर्ट पर आधारित है, तो इसे पब्लिश करते समय हम इन 3 मुख्य बिंदुओं पर जोर दे सकते हैं:
- इम्पोर्ट का गणित: 77% (UPA) बनाम 89% (NDA) – आत्मनिर्भरता की दिशा में पीछे हटते कदम।
- ONGC का संकट: क्या जानबूझकर रखरखाव में लापरवाही बरतकर सार्वजनिक क्षेत्र की इस महारत्न कंपनी को कमजोर किया जा रहा है?
- KG बेसिन का ‘सफेद हाथी’: 17,000 करोड़ का निवेश और परिणाम ‘शून्य’।

