Homeभारतगुजरात“बेटी बचाओ” सिर्फ़ होर्डिंग्स तक सीमित, गुजरात में “आरोपी बचाओ” मॉडल का...

“बेटी बचाओ” सिर्फ़ होर्डिंग्स तक सीमित, गुजरात में “आरोपी बचाओ” मॉडल का असली चेहरा: गांधीनगर पुलिस ताकतवर लोगों के आगे झुकी!

सेक्टर-21 पुलिस स्टेशन में कानून-व्यवस्था बेचने के गंभीर आरोप: चुने हुए MLA जिग्नेश मेवाणी के परिवार की एक महिला के खिलाफ़ अभद्र टिप्पणी करने वाले BJP नेता को बचाने के लिए पुलिस दौड़ी!

गांधीनगर/अहमदाबाद : गुजरात में BJP सरकार महिला सुरक्षा और “बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ” का बड़ा शोर मचाती है, लेकिन ज़मीनी हकीकत यह है कि राज्य में महिलाओं और विपक्षी पार्टी के नेताओं के परिवार की इज़्ज़त सुरक्षित नहीं है और सरकार के इशारे पर अब खाकी वर्दी भी अपराधियों के आगे झुक गई है। गांधीनगर के सेक्टर-21 पुलिस स्टेशन से एक बेहद शर्मनाक और चौंकाने वाली घटना सामने आई है, जहाँ कानून सत्ता के दबाव में बेबस बैठा है और पुलिस स्टेशन एक राजनीतिक पार्टी का ऑफिस बन गया है।

परिवार की एक महिला के खिलाफ़ अभद्र टिप्पणी के बावजूद पुलिस में शिकायत दर्ज!

मिली जानकारी के मुताबिक, MLA जिग्नेश मेवाणी के परिवार की महिलाओं के खिलाफ सोशल मीडिया और पब्लिक में बहुत ही घटिया और अभद्र कमेंट्स किए गए। जब ​​जिग्नेश मेवाणी और उनके समर्थक इस मामले में कानूनी शिकायत दर्ज कराने सेक्टर-21 पुलिस स्टेशन पहुंचे, तो पुलिस अधिकारियों का अहंकार और राजनीतिक दबाव खुलकर सामने आ गया। अगर एक चुने हुए जनप्रतिनिधि के परिवार की महिला को सरेआम बेइज्जत किया जा रहा हो और पुलिस स्टेशन में बैठे अधिकारी शिकायत लेते समय हाथ मल रहे हों, तो आम लोगों की सुरक्षा का अंदाजा कैसे लगाया जा सकता है?

क्या यह पुलिस स्टेशन है या BJP के IT सेल का प्रोटेक्शन सेंटर?

इस घटना पर बहुत गुस्सा जताते हुए आरोप लगाए गए हैं कि यह पुलिस स्टेशन गुजरात के लोगों का है या यह IT सेल या किसी राजनीतिक पार्टी के नेताओं के प्रोटेक्शन का सेंटर बन गया है? जब BJP नेता की इस घटिया हरकत के खिलाफ शिकायत दर्ज करने की बारी आई, तो लोकल अधिकारियों के कहने पर पुलिस शिकायत दर्ज करने से बचती नजर आई। इससे साबित होता है कि महिलाओं और बहन-बेटियों के प्रति BJP की सोच किस लेवल तक गिर चुकी है।
आने वाले विधानसभा चुनाव में जनता इसका करारा जवाब देगी।

आज गुजरात में महिलाओं और विपक्षी नेताओं की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। अगर कानून का राज कमजोर होता रहा और सत्ताधारी पार्टी के अपराधियों को पनाह मिलती रही, तो जनता अब चुप नहीं बैठेगी। इस अन्यायपूर्ण और दमनकारी नीति की गूंज आने वाले विधानसभा चुनाव में साफ सुनाई देगी और राजनीतिक क्षेत्र में इस बात पर तीखी चर्चा शुरू हो गई है कि गुजरात की जनता वोटिंग के जरिए इस घमंडी सत्ता को सही सबक सिखाएगी।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -
Google search engine

Most Popular

Recent Comments