सरकारी भर्तियों के लिए फ़्री ट्रेनिंग की आड़ में चल रहे संदिग्ध खेल पर उठे सवाल: सिर्फ़ बेटियों को ट्रेनिंग देने के पीछे क्या छिपा एजेंडा है? क्या प्रशासन सो रहा है या जानबूझकर अनजान है?
जूनागढ़ : गुजरात के पवित्र और धार्मिक शहर जूनागढ़ से एक बहुत ही सेंसिटिव, चौंकाने वाली और गंभीर रूप से चिंताजनक जानकारी सामने आई है। पिछले कुछ समय से जूनागढ़ शहर में एक नया और विवादित टॉपिक चर्चा के सेंटर में आ गया है, जिसे स्थानीय लोग और जागरूक नागरिक ‘ट्रेनिंग जिहाद’ कह रहे हैं। पुलिस डिपार्टमेंट, फ़ॉरेस्ट डिपार्टमेंट या दूसरे एग्ज़ाम जैसी सरकारी नौकरियों की भर्तियों में पास कराने के नाम पर सिर्फ़ हिंदू लड़कियों को फ़्री फ़िज़िकल ट्रेनिंग देने का एक बड़ा कैंपेन चल रहा है, जिससे अब पूरे इलाके में हलचल मच गई है।
सिर्फ़ हिंदू लड़कियां ही क्यों? लड़कों को क्यों बाहर रखा गया है?
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा और चौंकाने वाला सवाल यह है कि जब ग्राउंड या फिजिकल ट्रेनिंग देनी ही है, तो सिर्फ हिंदू लड़कियों को ही क्यों टारगेट किया जा रहा है? अगर यह एक नॉर्मल सोशल या एजुकेशनल एक्टिविटी है, तो इसमें लड़कों के लिए जगह क्यों नहीं है? एक खास व्यक्ति द्वारा जानबूझकर चलाई जा रही इस एक्टिविटी में सिर्फ हिंदू लड़कियों को फ्री ट्रेनिंग देने के पीछे असली मकसद क्या हो सकता है? क्या इन लड़कियों की सिक्योरिटी और भविष्य से छेड़छाड़ करने की कोई सोची-समझी साजिश तो नहीं है? ऐसे कई सवाल आज हर जागरूक नागरिक के मन में उठ रहे हैं।
सामाजिक असंतुलन और सिक्योरिटी को खतरा
ऐसे गंभीर मुद्दों पर पहले भी कई बार सामाजिक संगठनों ने चिंता जताई है। शक बढ़ रहा है कि यह लड़कियों को सरकारी नौकरी का सपना दिखाकर या फ्री ट्रेनिंग का लालच देकर किसी खास सोच या जाल में फंसाने की कोशिश तो नहीं है। अगर इस मामले में समय रहते सही एक्शन नहीं लिया गया, तो आने वाले समय में सोशल टेंशन और गंभीर स्थिति पैदा हो सकती है। सरकार और प्रशासन से ज़ोरदार आवाज़: तुरंत जांच की मांग
‘महानगर मेट्रो न्यूज़ पेपर’ के ज़रिए जूनागढ़ के जागरूक नागरिकों और हिंदू संगठनों ने गुजरात सरकार, गृह विभाग और स्थानीय प्रशासन से ज़ोरदार मांग की है कि इस मामले की गंभीरता को देखते हुए तुरंत हाई-लेवल जांच की जाए।
यह मुफ़्त ट्रेनिंग देने वाला खास व्यक्ति कौन है और इसके पीछे कौन से संगठन या फंडिंग सोर्स काम कर रहे हैं? इसकी गहराई से जांच होनी चाहिए।
सरकारी भर्ती के नाम पर इस काम में कौन से छिपे हुए मकसद काम कर रहे हैं, यह सामने आना ज़रूरी है।
सरकार और खुफिया एजेंसियों को इस मामले को हल्के में न लेते हुए तुरंत एक्शन मोड में आना होगा, ताकि हमारी बेटियों की सुरक्षा और सामाजिक ढांचा बना रहे।

