VIT भोपाल कैंपस में ‘नो बैग डे’ के दौरान छात्रों ने इंटरनेट के ‘एनीथिंग बट ए बैग’ ट्रेंड का अनोखा नजारा पेश किया। पारंपरिक बैग्स को छोड़कर छात्र प्रेशर कुकर, बाल्टी और बेल्ट जैसे घरेलू सामान में अपनी किताबें और नोट्स भरकर क्लास पहुंचे।
भोपाल: मध्य प्रदेश के प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थान VIT भोपाल में इन दिनों एक अलग ही नजारा देखने को मिला, जिसने सोशल मीडिया से लेकर कैंपस तक हर किसी का ध्यान खींच लिया है। छात्रों की पीठ पर टंगे आम दिनों वाले पारंपरिक बैग्स की जगह अचानक घरेलू सामान और अनोखे कैरियर्स ने ले ली। मौका था कैंपस में आयोजित ‘नो बैग डे’ का, जहां छात्रों ने इंटरनेट के मशहूर ‘एनीथिंग बट ए बैग’ (Anything But a Bag) ट्रेंड का खुलकर लुत्फ उठाया।
क्लासरूम में दिखा गजब का जुगाड़
सामान्य दिनों में कंधे पर बैग टांगे भागदौड़ करने वाले छात्र इस बार पूरी तैयारी के साथ क्लास पहुंचे, लेकिन उनके हाथ या कंधे पर बैग नहीं बल्कि कुछ और ही था। कोई छात्र प्रेशर कुकर में अपने नोट्स और जरूरी सामान भरकर लाया, तो किसी ने बाल्टी का इस्तेमाल मोबाइल और किताबों के स्टोरेज के रूप में किया। वहीं कुछ छात्रों ने बेल्ट और अन्य घरेलू चीजों के जरिए अपनी रचनात्मकता का प्रदर्शन किया। यहां तक कि कैंपस में एक आइसक्रीम के ठेले के इस्तेमाल की चर्चा भी खूब जोरों पर रही, जिसने इस पूरी मस्ती को एक अलग ही स्तर पर पहुंचा दिया।
तनाव से राहत और रचनात्मकता का अनूठा मेल
यूनिवर्सिटी के पीआरओ पुष्पकांत जैन ने इस पहल के बारे में बात करते हुए कहा, ‘हम छात्रों को एक दिन के लिए पढ़ाई के तनाव से ब्रेक देना चाहते थे। छात्रों ने ‘नो बैग डे’ का भरपूर आनंद लिया।’ यह दिन सिर्फ मस्ती तक सीमित नहीं था, बल्कि इसने छात्रों को बिना किसी लैब, सॉफ्टवेयर या इंजीनियरिंग ड्राइंग के अपनी तात्कालिक समस्याओं और सूझबूझ को प्रदर्शित करने का बेहतरीन मौका दिया।
सोशल मीडिया पर छाया वीडियो
क्लासरूम और कॉरिडोर का यह मजेदार नजारा जल्द ही सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर भी छा गया। इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर शेयर किए गए रील्स और वीडियो में छात्र गर्व के साथ अपने इन अनोखे कैरियर्स को फ्लॉन्ट करते नजर आए। इंटरनेट यूजर्स ने भी इस पर जमकर चुटकी ली और कहा कि पढ़ाई-लिखाई थोड़े समय के लिए पीछे छूट गई और विशुद्ध ‘देसी जुगाड़’ ने कमान संभाल ली। हालांकि, अगले ही दिन कैंपस अपनी सामान्य रफ्तार पर लौट आया, बैग्स वापस आ गए और प्रेशर कुकर अपनी सही जगह यानी रसोईघरों या हॉस्टल में पहुंच गए, लेकिन यह दिन कॉलेज लाइफ की एक यादगार याद जरूर बन गया।

