अनूपपुर जिले में वेयरहाउस से 24 ईवीएम गायब होने और चोरी की एफआईआर दर्ज होने के मामले में बड़ा खुलासा हुआ है। शुरुआती जांच में सामने आया है कि ये मशीनें चोरी नहीं हुई थीं, बल्कि पांच साल पहले 2021 में ही भोपाल भेजी जा चुकी थीं, जहां इन्हें नष्ट कराया जा चुका है। ऑनलाइन रिकॉर्ड अपडेट न होने की वजह से यह पूरा भ्रम पैदा हुआ था।
अनूपपुर: जिले से एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। जिला मुख्यालय स्थित पुराने तहसील कार्यालय भवन के वेयरहाउस से 24 ईवीएम (EVM) के गायब होने और चोरी की आशंका पर सनसनी फैल गई थी। स्थिति यह बन गई थी कि पुलिस में बाकायदा एफआईआर तक दर्ज करा दी गई थी, लेकिन जब मामले की परतें खुलीं तो जो सच सामने आया, उसने सभी को चौंका दिया।
चोरी की आशंका और एफआईआर तक का सफर
पूरा मामला तब शुरू हुआ जब हाल ही में पुराने तहसील भवन के डिस्मेंटल कार्य के दौरान वेयरहाउस प्रभावित हुआ। 21 सितंबर को ईवीएम को शासकीय पॉलीटेक्निक कॉलेज में शिफ्ट किए जाने के बाद 24 से 28 सितंबर के बीच जब भौतिक सत्यापन कराया गया, तो वहां 8 बैलेट यूनिट और 16 कंट्रोल यूनिट यानी कुल 24 मशीनें कम मिलीं। जांच के दौरान वेयरहाउस के कमरे की पिछली दीवार भी टूटी हुई मिली, जिसके बाद अधिकारियों को लगा कि मशीनें चोरी हो गई हैं। बिना पुराने अभिलेखों की पूरी जांच किए अनूपपुर कोतवाली में अज्ञात चोरों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करा दी गई।
असली सच: 5 साल पहले ही भोपाल भेजी जा चुकी थीं मशीनें
उप जिला निर्वाचन अधिकारी व अपर कलेक्टर बलवीर रमन ने मामले से पर्दा उठाते हुए बताया कि यह पूरा हाई-वोल्टेज ड्रामा सिर्फ एक प्रशासनिक चूक और ऑनलाइन रिकॉर्ड अपडेट न होने की वजह से हुआ। असलियत यह है कि ये ईवीएम वर्ष 2014 से तहसील परिसर के पीछे एक अस्थाई कक्ष में सुरक्षित रखी गई थीं और इनमें तकनीकी खराबी थी।
वर्ष 2020 में राज्य स्तर से खराब मशीनों की जानकारी मांगी गई थी, जिसके बाद तत्कालीन उप जिला निर्वाचन अधिकारी सरोधन सिंह के आदेश पर 11 अक्टूबर 2021 को इन सभी 24 मशीनों को भोपाल भिजवा दिया गया था। भोपाल से इन्हें आगे हैदराबाद स्थित ईसीआइएल (ECIL) कंपनी को भेजकर नष्ट भी कराया जा चुका है।
ऑनलाइन चूक ने खड़ा कर दिया बड़ा बवंडर
मशीनें भोपाल भेजे जाने और नष्ट होने की प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद निर्वाचन शाखा द्वारा इसका ऑनलाइन रिकॉर्ड अपडेट नहीं किया गया था। यही छोटी सी लापरवाही पांच साल बाद बड़े प्रशासनिक भ्रम और पुलिस थाने तक मामला पहुंचने की वजह बन गई। अब इस पूरे घटनाक्रम के बाद अनूपपुर निर्वाचन शाखा के जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका पर सवाल खड़े हो गए हैं, और प्रशासनिक स्तर पर लापरवाही की जांच की जा रही है।

