डूसू चुनाव के नतीजे ABVP की तीन सीटों की जीत के रूप में देखे जा रहे हैं, जो सामान्य होते हुए भी खास हैं। इस बार ABVP ने प्रेजिडेंट, सेक्रेटरी और जॉइंट सेक्रेटरी के पद जीते। पेपर लीक और अन्य विवादों के बीच ABVP के सामने चुनौतियां थीं, जबकि NSUI और लेफ्ट ने Gen 2 के मुद्दों पर अपनी स्थिति मजबूत की। ABVP की जीत और NSUI का एक से जीरो पर आ जाना महत्वपूर्ण है।
नई दिल्ली : डूसू चुनाव के नतीजों को इस बार सिर्फ ABVP की तीन सीटों की जीत के तौर पर देखना तस्वीर का एक हिस्सा है। डूसू पैनल की चार पोस्ट में ABVP ने पिछले कुछ सालों की तरह ही प्रेजिडेंट, सेक्रेटरी और जॉइंट सेक्रेटरी जीतीं, जो सामान्य होते हुए भी इस बार सामान्य नहीं था। पेपर लीक से उठा जंतर-मंतर पर Gen 2 का आंदोलन, इसके बाद सत्य निकेतन में इमारत गिरने से डीयू स्टूडेंट्स की मौत और हॉस्टल इंफ्रास्ट्रक्चर पर डीयू और सरकार से उठते सवालों के बीच ABVP के सामने चुनौती थी। NSUI और लेफ्ट, Gen 2 के बदलते विचार और आक्रोश पर लगातार बोल रहा था, ऐसे में ABVP की तीन सीटों पर जीत और NSUI का एक से जीरो पर आ जाना मायने रखता है।
ABVP की अलग रणनीतिः ABVP के
समर्थक इस नतीजे को डीयू जैसे देशभर के स्टूडेंट्स वाले यूनिवर्सिटी में युवा समर्थन की राजनीति से जोड़ रहे हैं। स्टूडेंट्स के मुद्दों पर गहमागहमी के बीच ABVP ने डूसू चुनाव को स्मार्ट तरीके से हैंडल किया। ABVP ने जंतर-मंतर आंदोलन पर चुप्पी बनाए रखी, लेकिन झारखंड में पेपर लीक के खिलाफ मोर्चा खोला। दूसरी ओर, सत्य निकेतन हादसे के बाद एबीवीपी ने एमसीडी के खिलाफ प्रदर्शन किया और फौरन कॉलेज-कॉलेज हॉस्टल का मुद्दा उठाते हुए चुनावी मैदान में उतर गए। ‘नो मोर सत्य निकेतन’ कैंपेन के साथ संगठन कॉलेजों में उतरा।
वक्त पर अपने उम्मीदवार तय किए। स्टूडेंट नेटवर्क पर ABVP सालभर काम करता है। ABVP के दिल्ली प्रदेश मंत्री सार्थक शर्मा कहते हैं कि जंतर मंतर की वजह से Gen 2 ने हमारा साथ नहीं छोड़ा, वो तो 2017 से ही हमें डूसू जीता रहे है। नीट पेपर लीक के बाद सबसे पहले ABVP ने ही आवाज उठाई थी। PG में रहने वाले स्टूडेंट्स से इनपुट लेने के लिए वेबसाइट तक बनाई और अधिकारियों से सेफ्टी ऑडिट करवाने का वादा किया।
NSUI के मुद्दे वोट में क्यों नहीं बदले?
डूसू का रिजल्ट NSUI के लिए बड़ी हताशा लेकर आया। पेपर लीक और सत्य की एनर्जी को NSUI वोट में नहीं बदल पाई। प्रेजिडेंट पोस्ट पर जाट-गुर्जर समीकरण से हटकर राजस्थान से उम्मीदवार उतारकर ट्राइबल आवाज को खींचने की कोशिश हुई, एक्सपरिमेंट कारगर भी दिखा मगर यह जीत में नहीं बदल पाया। NSUI के राष्ट्रीय अध्यक्ष विनोद झाखड़ कहते हैं कि मुकाबला सिर्फ ABVP से नहीं, बल्कि प्रशासन और सत्ताधारी ताकत से था।
वह कहते हैं कि जब देश के प्रधानमंत्री ही इस् चुनाव में स्टार प्रचारक की भूमिका में उतर जाएं और दिल्ली की सीएम पूरी ताकत चुनाव जिताने में लग जाएं, तो निष्पक्ष लोकतांत्रिक मुकाबले के लिए कुछ नहीं बचता। हालांकि, NSUI के सामने यह सवाल भी है कि डूसू की चुनावी वाइव में कांग्रेस के नेता ज्यादा नजर क्यों नहीं आए। जंतर मंतर में कॉकरोच जनता पार्टी से अलग रहना भी NSUI को भारी पड़ा। दूसरी ओर, सालभर स्टूडेंट नेटवर्क बनाने के लिए भी संगठन एक्टिव नहीं दिखा।
प्रेजिडेंटः यश डबास 2053 वोटों से जीते
यश ने 2053 वोटो से जीत दर्ज की। बुद्धिस्ट स्टडीज विभाग के एमए फर्स्ट ईयर विभाग के स्टूडेंट यश डबास को 24576 वोट मिले, वही इसी डिपार्टमेंट के स्टूडेंट विजय शंकर मीणा को 22523 वोट मिले। शुरुआत में दोनों में ही टफ फाइट रही। 20 राउंड की काउंटिंग में 10 राउंड तक विजय, यश से आगे रहे। 15 राउंड के बाद विजय से सीट निकलती नजर आने लगी। तीसरे नंबर पर लेफ्ट की अनन्या रतूड़ी रही, जिन्होंने 5377 वोट खीचे।
वाइस प्रेजिडेंटः जीत का मार्जिन 13705
निर्दलीय दीपांशु शौकीन ने वाइस प्रेजिडेंट की सीट 13705 वोटों से जीती। बुद्धिस्ट स्टडीज के स्टूडेंट शौकीन ने ABVP प्रत्याशी ईशू मौर्य को बहुत पीछे छोड़ा और NSUI से सीट छीन ली। NSUI से इस पोस्ट पर टिकट ना मिलने पर दीपाशु ने निर्दलीय उतरने का फैसला लिया। शौकीन को डूसू पैनल में सबसे ज्यादा 30615 वोट मिले। ABVP के ईशू 16910 वोटों के साथ दूसरे नंबर पर रहे। तीसरे नंबर पर NSUI कैंडिडेट वीर छत्रथ को सिर्फ 4313 वोट मिले।
सेक्रेटरीः रिया 6781 वोटों से जीती
सेक्रेटरी पोस्ट पर ABVP के रिया छावड़ी ने बाजी मारी। श्री अरबिंदो कॉलेज की स्टूडेंट रिया को कुल वोट में से 21650 वोट मिले, वहीं NSUI की नम्रता चौधरी को 14869 वोट मिले। 6781 वोटों से रिया आगे रही। शुरुआती कुछ राउंड के बाद इस पोस्ट पर ABVP ही आगे रही। लेफ्ट कैंडिडेट स्टैजिन देसक्योग ने अपने पैनल के बाकी तीनों कैंडिडेट के मुकाबले अच्छी परफॉर्मेंस दी और सबसे ज्यादा वोट 8734 खीचे।
जॉइंट सेक्रेटरीः यहां भी ABVP का ‘लक्ष्य’ पूरा
जॉइंट सेक्रेटरी पोस्ट पर भी ABVP ऊपर रही। कुल 60825 वोटों में से लक्ष्यराज सिंह को 16615 वोट मिले, तो समाजवादी छात्र सभा के प्रत्याशी विशेष यादव को 15778 वोट मिले। इस सीट पर भी NSUI को धक्का लगा, विशेष को टिकट ना मिलने पर वो अलग से खड़े हुए और बड़ी संख्या में वोट हासिल किए। तीसरे नंबर पर NSUI के गोपाल चौधरी रहे, जिन्हें कुल 15206 वोट मिले। इसके अलवा, लेफ्ट पैनल से बी परिजात ने 5837 वोट पाए।

