मध्यप्रदेश के राजगढ़ जिले के पचोर में यूजीसी के नए प्रावधानों के विरोध में क्षत्रिय करणी सेना और स्वर्ण समाज ने बोड़ा नाका से तहसील कार्यालय तक शांतिपूर्ण रैली निकाली। स्वर्ण समाज के छात्रों के साथ भेदभाव का आरोप लगाते हुए मुख्यमंत्री और यूजीसी अध्यक्ष के नाम तहसीलदार को ज्ञापन सौंपा गया।
राजगढ़: जिले के पचोर में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) द्वारा लागू किए गए नए प्रावधानों को लेकर विरोध प्रदर्शन अब तेज हो गया है। सोमवार को समस्त संगठन क्षत्रिय करणी सेना एवं सवर्ण समाज जिला राजगढ़ (तहसील पचोर) के बैनर तले समाज के लोगों ने बोड़ा नाका से लेकर तहसील कार्यालय तक एक शांतिपूर्ण रैली निकाली और अपनी मांगों को लेकर ज्ञापन सौंपा।
समानता के अधिकार के उल्लंघन का आरोप
प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि यूजीसी के इन नए प्रावधानों में सवर्ण समाज के छात्र-छात्राओं के साथ भेदभाव किया गया है। संगठन का कहना है कि यह नियम भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14 और 15 में दिए गए समानता के अधिकार का सीधा उल्लंघन करते हैं। इसके अलावा, दिल्ली के जंतर-मंतर पर यूजीसी के इन नियमों के खिलाफ चल रहे आंदोलन को भी इस दौरान समर्थन दिया गया।
उच्च शिक्षा के अवसरों पर असर की आशंका
संगठन के प्रतिनिधियों ने बताया कि इन नए नियमों की वजह से गरीब और मध्यमवर्गीय सवर्ण समाज के विद्यार्थियों की उच्च शिक्षा के अवसर बुरी तरह प्रभावित हो सकते हैं। ज्ञापन के जरिए मुख्य रूप से यह मांग की गई है कि यूजीसी के इन नए प्रावधानों को तत्काल प्रभाव से वापस (रोलबैक) लिया जाए और शिक्षा के क्षेत्र में सिर्फ योग्यता एवं समानता को ही प्राथमिकता दी जाए।
रैली के दौरान प्रदर्शनकारी सीधे तौर पर कलेक्टर को ही ज्ञापन सौंपने पर अड़े रहे।
बाद में तहसीलदार ने मौके पर पहुंचकर आंदोलनकारियों से ज्ञापन स्वीकार किया।
संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि 7 दिन में मांगें पूरी नहीं हुईं तो उग्र आंदोलन किया जाएगा।
ज्ञापन की प्रतियां मुख्यमंत्री मध्य प्रदेश शासन और यूजीसी अध्यक्ष नई दिल्ली को भी भेजी गई हैं।
शासन-प्रशासन को दी गई चेतावनी
क्षत्रिय करणी सेना और स्वर्ण समाज ने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि आगामी 7 दिनों के भीतर उनकी मांगों पर सकारात्मक कार्रवाई नहीं की जाती है, तो वे राजगढ़ से लेकर दिल्ली तक उग्र आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे। संगठन ने इस स्थिति के लिए पूरी तरह से शासन-प्रशासन को जिम्मेदार ठहराने की बात कही है।

