मुंबई के एक मोबाइल मैकेनिक को जीएसटी और इनकम टैक्स विभाग की ओर से 31.80 करोड़ रुपये के कथित बकाये का नोटिस मिला है. मैकेनिक ने आरोप लगाया कि उसके नाम पर खोली गई कंपनी के जरिए वित्तीय लेनदेन करने के लिए उसकी पहचान और दस्तावेजों का गलत इस्तेमाल किया गया.
मुंबई के कॉटन ग्रीन इलाके में मोबाइल रिपेयरिंग का काम करने वाले एक मैकेनिक के पास जीएसटी और इनकम टैक्स डिपार्टमेंट का 31.80 करोड़ रुपये का कथित बकाये का नोटिस पहुंचा, जिसे देखकर उसके होश उड़ गए.
मैकेनिक, महेंद्र म्हापांकर ने इसके बाद इकोनॉमिक ऑफेंस विंग (EOW) से संपर्क किया और आरोप लगाया कि उनके नाम पर खोली गई कंपनी के जरिए फाइनेंशियल ट्रांजैक्शन करने के लिए उनकी पहचान और दस्तावेजों का गलत इस्तेमाल किया गया था.
शिकायत के आधार पर, कालाचौकी पुलिस स्टेशन में संजय तांबे, उनके दोस्त सुभान कुरैशी और उनके साथियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC), 1860 की धाराओं 406, 420, 120(B) और 506(2) के तहत FIR दर्ज की गई है. आगे की जांच EOW को सौंप दी गई है.
पुलिस सूत्रों के अनुसार, कालाचौकी इलाके में रहने वाले म्हापांकर कॉटन ग्रीन में मोबाइल रिपेयर की एक छोटी सी दुकान चलाते हैं. COVID-19 महामारी के दौरान, उन्होंने BMC क्लीन-अप मार्शल के तौर पर काम किया, जहां कथित तौर पर उनकी जान-पहचान तांबे से हुई, जो उस समय क्लीन-अप मार्शल के तौर पर भी काम कर रहे थे.
म्हापांकर ने आरोप लगाया कि बाद में तांबे ने उन्हें साथ मिलकर बिजनेस शुरू करने का सुझाव दिया और इसके लिए उनके जरूरी दस्तावेज इकट्ठा किए. कथित तौर पर इन दस्तावेजों इस्तेमाल बैंक अकाउंट खोलने और बाद में म्हापांकर के नाम पर ‘गैलेक्सी ट्रेडर्स’ शुरू करने के लिए किया गया. GST और इनकम टैक्स के नोटिस ईमेल के जरिए मिले और ये नोटिस म्हापांकर के चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) की नजर में भी आए.
शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि तांबे, कुरैशी और उनके साथियों ने उनकी जानकारी के बिना गैलेक्सी ट्रेडर्स के जरिए फाइनेंशियल ट्रांजैक्शन करने की साजिश रची. शिकायत के अनुसार, गैलेक्सी ट्रेडर्स का GST अकाउंट केनरा बैंक और एक्सिस बैंक के अकाउंट से जुड़ा हुआ था, जिसके जरिए कथित तौर पर ट्रांजैक्शन किए गए.
शिकायत में कहा गया है कि जब म्हापांकर ने इन ट्रांजैक्शन पर आपत्ति जताई, तो कुरैशी ने कथित तौर पर उन्हें जान से मारने की धमकी दी. म्हापांकर ने आगे आरोप लगाया कि उनके नाम पर खोली गई कंपनी के जरिए करोड़ों रुपये के फाइनेंशियल ट्रांजैक्शन किए गए, जिससे उन पर ₹31,80,05,709 की GST बकाया हो गया. उन्होंने आरोप लगाया कि इन ट्रांजैक्शन से उन्हें और सरकार को आर्थिक नुकसान हुआ.

