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इंदौर नगर निगम को हाईकोर्ट से लगा झटका, वेंडर लिस्ट रद्द की, सराफा में फूड स्टॉल फिर से बहाल किए

हाईकोर्ट से इंदौर नगर निगम को बड़ा झटका लगा है। साथ ही निगम की वेंडर लिस्ट रद्द कर दी है। याचिकाकर्ताओं के फूड स्टॉल फिर से बहाल करने के निर्देश दिए हैं।

हाइलाइट्स

सराफा मामले में इंदौर नगर निगम को लगा झटका
हाईकोर्ट की इंदौर बेंच ने रद्द की निगम की सूची
वेंडरों को फिर से स्टॉल लगाने के निर्देश दिए
सराफा मार्केट में रात को लगते हैं खाने-पीने के स्टॉल

इंदौर: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच ने सराफा नाइट चौपटी में सामान बेचने वालों की एक रिट याचिका को मंजूरी दे दी है। कोर्ट ने कहा है कि इंदर नगर निगम ने मनमाने ढंग से औप अपनी शक्तियों से बाहर जाकर काम किया है क्योंकि उसने सिर्फ 80 वेंडर्स की एक चुनिंदा लिस्ट को ही फिर से काम करने की इजाजत दी है।

याचिकाकर्ता कई साल से लगा रहे थे स्टॉल

जस्टिस सुबोध अभ्यंकर और जस्टिस जय कुमार पिल्लई की डिवीजन बेंच ने 23 सितंबर को यह आदेश दिया है। यह आदेश कौशल लोधी और अन्य लोगों की याचिका पर दिया गया था। याचिकाकर्ताओं ने कहा था कि वे कई सालों से सराफा बाजार में अपने स्टॉल लगा रहे थे। पक्की जूलरी की दुकानें बंद होने के बाद स्टॉल लगाते थे और सुबह होने से पहले उन्हें हटा लेते थे।

नगर निगम ने बिना किसी नोटिस के हटा दिया

उनलोगों ने आरोप लगाया कि इंदौर नगर निगम ने नवंबर-दिसंबर 2025 में बिना किसी नोटिस, लिखित आदेश या सुनवाई के उन्हें हटा दिया। बाद में, सराफा सोना-चांदी एसोसिएशन और रात्रिकाली सराफा चौपाटी एसोसिएशन के पदाधिकारियों द्वारा हस्ताक्षरित एक लिस्ट के आधार पर पहले 69 और फिर 80 वेंडर्स को वापस आने की इजाजत दी गई।

चाइनीज स्टॉल भी थे शामिल

आरटीआई से पता चला कि पारंपरिक भोजन की कथित नीति के बावजूद, लिस्ट में गैर-पारंपरिक चीनी भोजन और पिज्जा के स्टॉल भी शामिल थे। उन्होंने दावा किया कि उनके पास वैध एफएसएसएआई रजिस्ट्रेशन और दुकान मालिकों की लिखित सहमति थी।

अपनी जगह पर काम करने की इजाजत दें

इंदौर नगर निगम की पाबंदी और चुनिंदा लिस्ट को रद्द करते हुए कोर्ट ने प्रतिवादियों को निर्देश दिया कि वे याचिकाकर्ताओं को तुरंत उनकी संबंधित जगहों पर वापस काम करने की इजाजत दें। यह इजाजत उनके पक्के दुकान मालिकों की जरूरी सहमति या अनुमति के अधीन होगी, जिनकी दुकानों के बाहर वे अपना काम करते हैं।

वहीं, कोर्ट ने एसोसिएशनों को दुकान मालिकों की सहमति को नजरअंदाज करने से रोक दिया। याचिकाकर्ताओं के वकील उमंग नलवाया ने सवंधिना और स्ट्रीट वेंडर्स एक्ट के उल्लंघन का आरोप लगाया है।

इसके साथ ही इंदौर नगर निगम के वकील अनुनय श्रीवास्तव ने इस एक्ट के लागू होने पर सवाल उठाया है। उन्होंने कहा कि कोई नोटिफाइड वेंडिंग जोन नहीं है। बेंच ने माना कि नगर निगम के पास सराफा स्ट्रीट पर जगह आवंटित करने की शक्ति नहीं है और एसोसिएशनों की लिस्ट और चयन के तरीकों को मनमाना बताया है। नगर निगम नियमों के उल्लंघन पर कानूनी रूप से कार्रवाई या जुर्माना लगा सकता है।

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