700 करोड़ रुपये के मेडिकल उपकरण खरीद घोटाले के कथित मास्टरमाइंड राजीव रंगीला ने एंटी करप्शन ब्रांच (ACB) के सामने सरेंडर कर दिया है, जिसके बाद कोर्ट ने उसे 4 दिन की पुलिस रिमांड पर भेज दिया।
नई दिल्ली: करीब 700 करोड़ के मेडिकल उपकरण खरीद घोटाले में कथित मास्टरमाइंड राजीव रंगीला को एंटी करप्शन ब्रांच (ACB) ने गिरफ्तार किया है। रंगीला गुरुवार को एसीबी के सामने सरेंडर करने पहुंचा था।
आरोपी को शुक्रवार को कोर्ट में किया गया पेश
शुक्रवार को उसे कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उसे चार दिन की पुलिस रिमांड पर भेजा गया। जांच एजेंसी अब उससे उसकी कथित शेल कंपनियों, उन्हें खड़ा करने में मदद करने वालों और विभाग की गायब फाइलों के बारे में पूछताछ कर रही है।
इस बात का पता लगा रही ACB
सूत्रों के मुताबिक, ACB को यह भी पता लगाना है कि खरीद प्रक्रिया से जुड़ी कौन-कौन सी फाइलें गायब हैं और उन्हें किसने हटाया। जांच में यह भी देखा जा रहा है कि टेंडर की शर्ते और तकनीकी स्पेसिफिकेशंस किन लोगों ने तैयार किए और क्या इन्हें किसी खास कंपनी को फायदा पहुंचाने के लिए तैयार किया गया था।
नौकर-चाय वालों के नाम पर कंपनियां
रंगीला पर आरोप है कि उसने नकली मालिकों के नाम पर फर्जी कंपनियां बनाई। इन कंपनियों में नौकरों और चाय बेचने वालों तक को मालिक दिखाया, जबकि असली संचालन रंगीला करता था। एफ मेड डिवाइसेस, Technocrats, राज श्री, आशी सर्जिकल एंड फार्मास्युटिकल और एम साहिब एंड संस प्राइवेट लिमिटेड जैसी कंपनियों के नाम जांच में सामने आए हैं।
आरोपी ने की ये व्यवस्था
सूत्रों के मुताबिक, रंगीला ने मेडिकल उपकरण बनाने वाली कंपनियों के साथ मिलीभगत कर सप्लाई रेट तय कराने और कथित तौर पर कैश में किकबैक लौटाने की व्यवस्था की। आरोप है कि निर्माताओं के साथ मिलकर प्रतिबंधात्मक स्पेसिफिकेशंस तैयार किए जाते थे। इसके बाद दस्तावेज CPA के हेड ऑफ ऑफिस डॉ. विनोद कुमार रंगा तक पहुंचते थे, जो उन्हें टेंडर कमिटी के सामने रखते थे।
कब सामने आया मामला
रंगा 18 जून को गिरफ्तार होने वाले पहले आरोपी थे। यह घोटाला इस साल मई में सामने आया था। विजिलेंस विभाग की शिकायत के बाद एसीबी ने 2 जून को एफआईआर दर्ज की थी। एक सप्ताह पहले एसीबी ने रंगीला समेत अन्य आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट भी दाखिल की थी।
पूछताछ के लिए जुलाई में बुलाया था
सूत्रों के अनुसार, रंगीला को एसीबी ने जुलाई में पूछताछ के लिए बुलाया था, लेकिन कई नोटिस के बावजूद वह पेश नहीं हुआ। इसके बाद दिल्ली-एनसीआर और उत्तराखंड में उसकी तलाश की गई। पता चला कि उसकी दिल्ली, हरियाणा और उत्तराखंड में संपत्तियां है।
आरोपी ने 2014 में लड़ा था चुनाव
कोर्ट उसे भगोड़ा घोषित कर चुका था और अक्टूबर के पहले हफ्ते में उसकी संपत्तिया जब्त करने की तैयारी थी। वह जून से फरार था और पहली गिरफ्तारी के बाद अमेरिका भागने की भी बात सामने आई है। रंगीला 2014 में हरियाणा में हुए विधानसभा चुनाव में करनाल सीट से निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर खड़ा हुआ था, लेकिन हार गया था।

