दिल्ली में गणपति विसर्जन शुरू हो गया है। यमुना में सीधे मूर्ति विसर्जन पर रोक के बीच सरकार ने 78 आर्टिफिशल तालाब तैयार किए हैं। दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति ने लोगों से निर्धारित तालाब या कुंड में ही गणपति और अन्य मूर्तियों का विसर्जन करने की अपील की है।
नई दिल्लीः ‘गणपति बप्पा मोरया… अगले बरस तू जल्दी आ।’ गणेश चतुर्थी के बाद राजधानी में गणपति विसर्जन का सिलसिला शुरू हो गया है। हालांकि मुख्य विसर्जन 24 सितंबर को है, लेकिन घरों में गणेश पूजा कर रहे लोग तीन दिन बाद से विसर्जन शुरू कर देते हैं। विसर्जन को देखते हुए यमुना में सीधे मूर्ति विसर्जन पर रोक लगाई गई है।
लेकिन, विसर्जन में कोई दिक्कत ना हो, इसके लिए सीएम रेखा गुप्ता के निर्देश पर दिल्ली भर में 78 आर्टिफिशल तालाब बनाए गए हैं। दिल्ली वालों से उन तालाबों में ही विसर्जन करने की अपील की गई है। दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति के मुताबिक गणपति और अन्य मूर्तियों का विसर्जन यमुना या किसी प्राकृतिक जलाशय में सीधे नहीं किया जा सकता।
यमुना में सीधे मूर्ति विसर्जन पर रोक
सरकार की ओर से बनाए गए निर्धारित आर्टिफिशल तालाब या कुंड में ही विसर्जन करना होगा। इसके लिए दिल्ली के सभी जिले में शिक्षण संस्थानों के कैंपस, कॉलोनियों, बड़े मैदानों के अंदर विसर्जन के लिए आर्टिफिशल तालाब बनाए गए हैं। सरकार के मुताबिक मूर्तियों का विसर्जन यमुना से दूर रखने के लिए 78 आर्टिफिशल तालाब तैयार किए गए हैं। नई दिल्ली में 5, नॉर्थ-ईस्ट दिल्ली में 9, सेंट्रल नॉर्थ में 2, पुरानी दिल्ली में 2, नई दिल्ली में 3, वेस्ट में 7, सेंट्रल जिले में 3, साउथ जिले में 9, साउथ वेस्ट में 3, साउथ ईस्ट जिले में 7, ईस्ट जिले में 5, नॉर्थ वेस्ट में 6 और आउटर नॉर्थ जिले में कुल 2 आर्टिफिशल तालाब बनाए गए हैं। सीएम रेखा गुप्ता ने अपील की है कि लोग प्रतिमा विसर्जित करने के लिए आर्टिफिशल तालाबों का ही इस्तेमाल करें।

