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तमिलनाडु की तर्ज पर एमपी में भी TET विरोध की उठी मांग, सड़कों पर उतरे शिक्षक, फॉर्म न भरने की खाई कसम

रतलाम में आजाद अध्यापक शिक्षक संघ के बैनर तले शिक्षकों ने TET परीक्षा की अनिवार्यता के खिलाफ जिला स्तरीय बैठक और सामूहिक उपवास किया। शिक्षकों ने परीक्षा के लिए आवेदन न करने का संकल्प लिया है और तमिलनाडु सरकार की तर्ज पर विधानसभा में प्रस्ताव पास करने की मांग की है।

मध्य प्रदेश के रतलाम जिले में शिक्षकों का आक्रोश अब खुलकर सड़कों पर और बैठकों में नजर आने लगा है। आजाद अध्यापक शिक्षक संघ के बैनर तले रविवार को एक बड़ी जिला स्तरीय बैठक, सामूहिक उपवास और TET (शिक्षक पात्रता परीक्षा) के आवेदन न करने की शपथ का आयोजन किया गया। वर्षों से अपनी सेवाएं दे रहे शिक्षकों पर थोपी जा रही TET की अनिवार्यता को लेकर शिक्षकों में भारी नाराजगी देखने को मिली। कार्यक्रम के अंत में संघ के पदाधिकारियों ने मुख्यमंत्री के नाम संबोधित एक ज्ञापन तहसीलदार आशीष उपाध्याय को सौंपा।

‘जब पहले पास कर ली परीक्षा, तो बार-बार क्यों?’

सभा को संबोधित करते हुए संभागाध्यक्ष प्रकाश शुक्ला ने कड़ा विरोध जताते हुए कहा कि लंबे समय से अपनी सेवाएं दे रहे शिक्षकों के लिए अब दोबारा TET की अनिवार्यता पूरी तरह अनुचित है। कई शिक्षक ऐसे हैं जिन्होंने वर्ष 2005 और 2008 में व्यापमं द्वारा आयोजित पात्रता परीक्षा पहले ही पास कर ली थी। वहीं, महिला नेत्री हरनिस सिंह सोलंकी ने अपने तीखे अंदाज में तंज कसते हुए कहा, ‘यह अजीब बात है कि जिस व्यक्ति को फांसी दी जानी है, उसी से कहा जा रहा है कि आप ही फांसी के फंदे के लिए रस्सी खरीदकर लाओ।’

तमिलनाडु की तर्ज पर एमपी सरकार उठाए कदम

जिलाध्यक्ष सुनील कुमार गोंड़ ने मांग उठाई कि जिस प्रकार तमिलनाडु की सरकार ने विधानसभा में TET परीक्षा की अनिवार्यता के विरोध में प्रस्ताव पास करके केंद्र सरकार के पास भेजा है, ठीक उसी तरह मध्य प्रदेश सरकार को भी राज्य के डेढ़ लाख शिक्षकों के हित में कड़ा कदम उठाना चाहिए। संघ के अन्य वक्ताओं ने साफ कहा कि यदि शिक्षक परीक्षा के लिए आवेदन ही नहीं करेंगे, तो सरकार किसकी परीक्षा लेगी। इसलिए सभी ने एकजुट होकर परीक्षा फॉर्म का बहिष्कार करने का ऐलान किया है।

पुरानी पेंशन और अन्य लंबित मांगों को लेकर भी हुंकार

इस बैठक और प्रदर्शन के दौरान सिर्फ TET का मुद्दा ही नहीं छाया रहा, बल्कि शिक्षकों की अन्य समस्याओं पर भी व्यापक चर्चा हुई। ज्ञापन में सितंबर 2022 की हड़ताल अवधि के वेतन भुगतान, प्रथम नियुक्ति दिनांक से सेवा अवधि की गणना कर पेंशन, ग्रेज्युटी और अवकाशों के नगरीकरण का लाभ देने की पुरजोर मांग की गई। साथ ही परिवीक्षा अवधि पूरी कर चुके शिक्षकों को 100 प्रतिशत वेतन और पदोन्नति का लाभ देने की भी मांग दोहराई गई। इस दौरान बड़ी संख्या में शिक्षक साथी उपस्थित रहे।

रतलाम में आजाद अध्यापक शिक्षक संघ ने TET परीक्षा की अनिवार्यता के खिलाफ किया प्रदर्शन।
शिक्षकों ने सामूहिक उपवास रखकर किसी भी स्थिति में TET फॉर्म न भरने का लिया संकल्प।
तमिलनाडु की तर्ज पर मध्य प्रदेश विधानसभा में भी प्रस्ताव पास कर केंद्र को भेजने की उठी मांग।
पुरानी पेंशन, समयमान वेतनमान और हड़ताल अवधि के वेतन भुगतान समेत कई मुद्दों पर हुई चर्चा।

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