लंबित मांगें पूरी न होने पर पूरे गुजरात में कर्मचारी आर-पार की लड़ाई के मूड में, 2 अक्टूबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल की चेतावनी
जमीन पैमाइश, प्रॉपर्टी कार्ड और वारिसई प्रविष्टि जैसे महत्वपूर्ण काम रुकने से आम जनता की बढ़ी मुश्किलें
गांधीनगर/अहमदाबाद : पूरे गुजरात में सरकारी कर्मचारियों में फैला आक्रोश अब खुले विरोध और आंदोलन में बदल चुका है। लंबे समय से लंबित मांगों को सरकार द्वारा स्वीकार न किए जाने के बाद आखिरकार राज्य के कर्मचारियों ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। एक तरफ सिटी सर्वे के कर्मचारियों ने अनिश्चितकालीन हड़ताल का हथियार उठा लिया है, तो दूसरी तरफ ग्रामसेवकों ने भी सरकारी पोर्टल के ऑनलाइन कामकाज का बहिष्कार करके सरकार की चिंता को और बढ़ा दिया है। कर्मचारियों के इस उग्र आंदोलन की वजह से राज्यभर के सरकारी दफ्तरों के प्रशासनिक कामकाज पर भारी असर देखने को मिल रहा है।
सिटी सर्वे कर्मचारियों की हड़ताल से कामकाज ठप
प्राप्त जानकारी के अनुसार, सिटी सर्वे विभाग के कर्मचारियों ने अपनी विभिन्न लंबित मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल का ऐलान किया है। इसके कारण शहरी इलाकों में जमीन की पैमाइश, प्रॉपर्टी कार्ड निकलवाने, सिटी सर्वे के दस्तावेज प्राप्त करने और संपत्ति के दस्तावेजों से जुड़ी हजारों अर्जियां लटक गई हैं। रोजाना दफ्तरों के चक्कर काट रहे फरियादियों को खाली हाथ वापस लौटना पड़ रहा है।
ग्रामसेवकों का ऑनलाइन बहिष्कार, 2 अक्टूबर से उग्र आंदोलन की चेतावनी
सिर्फ सिटी सर्वे ही नहीं, बल्कि ग्रामीण स्तर पर जमीनी कामकाज संभालने वाले ग्रामसेवक भी इस लड़ाई में मैदान में उतर आए हैं। ग्रामसेवकों ने सरकारी पोर्टल पर किए जाने वाले सभी ऑनलाइन कार्यों का पूरी तरह से बहिष्कार कर दिया है। उनकी मुख्य मांगों में समय पर वेतन और ग्रेड पे में सुधार जैसे लंबित मुद्दे शामिल हैं। अगर सरकार द्वारा इस मामले में तत्काल प्रभाव से कोई उचित निर्णय नहीं लिया जाता है, तो ग्रामसेवकों ने आगामी 2 अक्टूबर (गांधी जयंती) से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले जाने की कड़ी और जोरदार चेतावनी दे दी है।
जनता परेशान, प्रशासन में भगदड़
कर्मचारियों की इस हड़ताल और बहिष्कार के कारण ग्रामीण और शहरी दोनों ही क्षेत्रों में आम जनता पिस रही है। जमीन पैमाइश, प्रॉपर्टी कार्ड, वारिसई प्रविष्टि के साथ-साथ सरकार की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन पर सीधा ब्रेक लग गया है। त्योहारों और आने वाले दिनों की पूर्वसंध्या पर कर्मचारियों का यह आंदोलन सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती बनकर खड़ा हो गया है।

