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ओह जादू या भ्रष्टाचार? जनता के जनप्रतिनिधियों की संपत्ति करोड़ों में, लेकिन सूरत महानगरपालिका (SMC) के पास झाड़ू खरीदने तक के पैसे नहीं!

सूरत में बीजेपी के दिग्गज नेता सी.आर. पाटिल के खिलाफ अचानक निकले पोस्टरों से राजनीति में आया भूचाल
“संपत्ति करोड़ों में, तिजोरी खाली” के आरोपों वाले पोस्टर वॉर ने शहर में मचाई सनसनी

सूरत : गुजरात की आर्थिक राजधानी और डायमंड सिटी के रूप में पहचाने जाने वाले सूरत शहर में इस समय सियासत गरमा गई है। सूरत महानगरपालिका (SMC) की आर्थिक स्थिति और प्रशासनिक तंत्र के कामकाज पर सीधे सवाल उठाने वाले रहस्यमयी और आक्रामक पोस्टर सूरत के विभिन्न इलाकों में रातोरात वायरल होने से भारी हड़कंप मच गया है। सत्ताधारी पार्टी के दिग्गज नेता और सांसद सी.आर. पाटिल को निशाना बनाकर शुरू हुए इस ‘पोस्टर वॉर’ (Poster War) से राजनीतिक गलियारों में गर्मी आ गई है।

क्या है इन विवादित पोस्टर्स में?

सूरत शहर में चुनिंदा जगहों पर चिपकाए गए इन पोस्टरों में बेहद तीखे और व्यंग्य भरे शब्द लिखे गए हैं। पोस्टर में सवाल उठाया गया है कि, “कॉरपोरेटर, विधायक और सांसद की संपत्ति आज करोड़ों रुपए तक पहुंच चुकी है, लेकिन सूरत म्युनिसिपल कॉरपोरेशन (SMC) के पास साफ-सफाई के लिए झाड़ू खरीदने तक के पैसे नहीं हैं?” इस तरह के नारों के साथ बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष और सांसद सी.आर. पाटिल के खिलाफ सीधे प्रहार किए गए हैं, जिसे लेकर स्थानीय राजनीति में भारी चर्चाएं शुरू हो गई हैं।

जनता के सवाल या राजनीतिक बदला?

एक तरफ जहां प्रशासन द्वारा स्मार्ट सिटी और विकास के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, वहीं दूसरी तरफ पालिका की आर्थिक स्थिति और बुनियादी सुविधाओं पर खड़े होने वाले सवालों ने सभी को चौंका दिया है। नेताओं की बढ़ती निजी संपत्ति और सरकारी संस्थाओं की खाली होती तिजोरी के बीच की इस विसंगति को इन पोस्टरों में बेहद आक्रामक तरीके से उजागर किया गया है।

पुलिस तंत्र हरकत में आया, जांच शुरू

इन सनसनीखेज पोस्टरों के शहर में सामने आने के बाद सूरत पुलिस और खुफिया एजेंसियां भी एक्शन मोड में आ गई हैं। ये पोस्टर किसने और किस इरादे से लगाए हैं? इसका पता लगाने के लिए पुलिस ने आसपास के सीसीटीवी फुटेज खंगालने की कवायद शुरू कर दी है। आने वाले दिनों में इस मामले के और अधिक तूल पकड़ने की पूरी संभावना है।

महानगर मेट्रो की खास रिपोर्ट: विकास के बड़े दावों के बीच सड़क-रास्तों और सफाई के पीछे बजट के अभाव की चर्चाओं के बीच इस पोस्टर वॉर ने सत्ताधारी पार्टी की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।

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