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राजस्व विभाग के पोर्टल ठप: गुजरात में जमीन-संपत्ति के करोड़ों के लेनदेन अटके, आईओआरए, एनीआरओआर और ई-धरा सर्वर डाउन होने से परेशानी

गांधीनगर। गुजरात सरकार के राजस्व विभाग के अत्यंत महत्वपूर्ण माने जाने वाले ऑनलाइन डिजिटल पोर्टलों में अचानक बड़ी तकनीकी खराबी आने से पूरे राज्य में जमीन, संपत्ति और खेती से जुड़ी ऑनलाइन सेवाएं पूरी तरह से ठप हो गई हैं। अप्रत्याशित तकनीकी खराबी के कारण ई-धरा, आईओआरए (इंटीग्रेटेड ऑनलाइन रेवेन्यू एप्लीकेशन) और एनीआरओआर जैसे जनसंपर्क वाले पोर्टल बंद हो गए हैं। इसके कारण राज्य भर के किसानों, बिल्डरों, वकीलों और आम नागरिकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
अपग्रेडेशन के बाद भी तकनीकी दिक्कतें: इस गुरुवार तक सेवाएं बाधित रहेंगी


राजस्व विभाग के अनुसार, हाल ही में 3 सितंबर से 6 सितंबर के बीच इन तीनों मुख्य पोर्टलों के अपग्रेडेशन का काम किया गया था। 6 सितंबर को सेवाएं फिर से शुरू करने का दावा किया गया था, लेकिन अपग्रेडेशन के तुरंत बाद अचानक नई और जटिल सर्वर समस्याएं उत्पन्न होने से पोर्टल को फिर से ऑफलाइन करना पड़ा है। अधिकारियों के अनुसार, इन तकनीकी खामियों को सुधारने में गुरुवार तक का समय लग सकता है। फिलहाल एनआईसी, गुजरात राज्य डेटा सेंटर और एनकोड की तकनीकी टीमें 24 घंटे लगातार सर्वर मरम्मत के काम में जुटी हुई हैं।

जमीन के कागजातों से लेकर दस्तावेज पंजीकरण तक के सभी काम अटके

राज्य में ये तीन पोर्टल जमीन-संपत्ति के सभी प्रशासन का मुख्य आधार हैं। पोर्टल बंद होने से राज्य भर में निम्नलिखित कार्य ठप हो गए हैं:
एनीआरओआर पोर्टल: जमीन के अधिकार के रिकॉर्ड यानी 7/12, 8-अ और हक पत्रक-6 के डिजिटल उतारे डाउनलोड करना और जमीन के मालिकाना हक का विवरण प्राप्त करना बंद हो गया है।
आईओआरए पोर्टल: गैर-कृषि (एन.ए.) की मंजूरी, किसान सत्यापन प्रमाण पत्र प्राप्त करना, जमीन प्रीमियम का भुगतान, गैर-किसान से किसान बनने की अनुमति और राजस्व विवादों-अपीलों के ऑनलाइन आवेदनों की प्रक्रिया अटक गई है।
ई-धरा पोर्टल: जमीन के रिकॉर्ड में होने वाले सभी प्रकार के बदलाव (कच्ची-पक्की प्रविष्टियां) दर्ज करना असंभव हो गया है।

जनता परेशान: बैंक ऋण और पंजीकरण पर रोक

सर्वर डाउन होने के कारण सब-रजिस्ट्रार कार्यालयों में जमीन-संपत्ति के दस्तावेज पंजीकरण, बैंकों से जमीन पर ऋण प्राप्त करने की प्रक्रिया और गैर-कृषि आवेदनों के सत्यापन जैसे महत्वपूर्ण काम अटक गए हैं। आवेदक और किसान सरकारी कार्यालयों के चक्कर काटने को मजबूर हो गए हैं। अब देखना यह होगा कि तकनीकी टीमें गुरुवार तक इस समस्या का स्थायी समाधान निकाल पाती हैं या फिर नागरिकों की परेशानी और बढ़ेगी।

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