आगरा में यूजीसी के नए नियमों और आरक्षण के विरोध में शुरू हुआ सत्याग्रह आंदोलन मंच पर आपसी विवाद के बाद समाप्त हो गया।
आगरा: यूजीसी के नए नियमों और आरक्षण के विरोध में आगरा में शुरू किया गया सत्याग्रह आंदोलन आपसी खींचतान और विवाद के बीच ही समाप्त हो गया। संजय प्लेस स्थित शहीद स्मारक पर शनिवार को सवर्ण समाज के लोगों के नेतृत्व में शुरू हुए आंदोलन के दौरान मंच पर ही अलग-अलग समाज के लोगों के बीच तकरार हो गई। देखते ही देखते विवाद इतना बढ़ गया कि क्षत्रिय समाज से जुड़े लोग धरना स्थल से उठकर चले गए।
इधर, बिना अनुमति आंदोलन किए जाने की बात सामने आने पर पुलिस ने मौके पर मौजूद प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया। बाद में पुलिस लाइन में पुलिस कमिश्नर दीपक कुमार के साथ हुई बातचीत के बाद प्रदर्शनकारियों को छोड़ दिया गया।
सुबह से जुटने लगी थी भीड़
शनिवार सुबह करीब 10 बजे से संजय प्लेस स्थित शहीद स्मारक पर लोगों का जुटना शुरू हो गया था। भीड़ बढ़ने के साथ ही मौके पर पुलिस बल भी तैनात कर दिया गया। इस दौरान पुलिस अधिकारी आंदोलन कर रहे लोगों से बातचीत करने का प्रयास कर रहे थे। प्रदर्शनकारियों की ओर से मीडियाकर्मियों को भी अपनी बात बताई जा रही थी।
इसी दौरान मंच से ब्राह्मण समाज के पवन समाधिया ने कुछ लोगों के नाम लेते हुए कहा कि आंदोलन से संबंधित बातचीत इन्हीं लोगों से की जाएगी। बताया गया कि जिन लोगों के नाम लिए गए, वे एक ही समाज से जुड़े थे।
कमेटी में नामों को लेकर शुरू हुआ विवाद
मंच से लिए गए नामों को लेकर करणी सेना के उपाध्यक्ष राजीव चौहान ने आपत्ति जताई। उनके विरोध के बाद अन्य लोग भी सामने आ गए और मंच पर विवाद की स्थिति बन गई।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, इसी दौरान मंच से एक व्यक्ति ने बाह की विधायक पक्षालिका सिंह और एत्मादपुर के विधायक डॉ. धर्मपाल सिंह का नाम लेते हुए उनके घेराव और विरोध की बात कही। इस पर क्षत्रिय समाज से जुड़े लोगों ने आपत्ति जताई।
इसके बाद कुछ लोगों की ओर से योगेंद्र उपाध्याय का नाम लेकर भी आपत्तिजनक टिप्पणियां किए जाने का आरोप है। विवाद बढ़ने के साथ ही आंदोलन में शामिल लोगों के बीच मतभेद खुलकर सामने आ गए।
माइक छीनने के बाद धरना स्थल से उठे लोग
विवाद के बीच मंच पर बोल रहे राजीव चौहान से माइक छीने जाने की बात भी सामने आई। इससे नाराज क्षत्रिय समाज से जुड़े लोग धरना स्थल से उठकर चले गए। इस घटनाक्रम के बाद आंदोलन प्रभावी रूप से समाप्त हो गया। जिस सत्याग्रह की शुरुआत यूजीसी के नए नियमों और आरक्षण के विरोध में की गई थी, वह कुछ ही समय में आपसी मतभेद के कारण बिखर गया।
बिना अनुमति आंदोलन पर पुलिस ने हिरासत में लिया
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, यूजीसी के नियमों और आरक्षण से जुड़े मुद्दे राष्ट्रीय स्तर के हैं, लेकिन आंदोलन के लिए आयोजकों की ओर से अनुमति नहीं ली गई थी। बिना अनुमति आंदोलन किए जाने का हवाला देते हुए पुलिस ने मौके पर मौजूद कुछ प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया और उन्हें रिजर्व पुलिस लाइन ले जाया गया।
पुलिस कमिश्नर से हुई बातचीत
पुलिस लाइन में प्रदर्शनकारियों की पुलिस कमिश्नर दीपक कुमार से बातचीत हुई। अधिकारियों के मुताबिक, पुलिस कमिश्नर ने आंदोलनकारियों को आश्वासन दिया कि उनकी बात उचित फोरम तक पहुंचाई जाएगी।
इसके बाद आंदोलन समाप्त कर दिया गया और हिरासत में लिए गए प्रदर्शनकारियों को छोड़ दिया गया।

