गुजरात के सूखाग्रस्त इलाकों में बारिश न होने से किसानों, पशुपालकों, खेत मजदूरों और गरीबों की हालत बहुत खराब हो गई है। 300 से 400 फीट गहरे बोरवेल से भी पानी सूख जाने से फसलें जलकर राख हो गई हैं, बल्कि जानवरों को पानी पिलाने के लिए भी पानी खत्म हो रहा है। ऐसे मुश्किल हालात में आम आदमी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष और किसान नेता यसुदान गढ़वी ने 57 MLA और राज्य के प्रशासन पर तीखा हमला बोला है। एक खास वीडियो मैसेज के जरिए उन्होंने MLA को साफ तौर पर धमकी दी है कि अगर उन्होंने किसानों के सपोर्ट में मुख्यमंत्री को चिट्ठी नहीं लिखी तो उनके नाम पब्लिक कर दिए जाएंगे।
चुनाव के समय पेज प्रेसिडेंट और नेता सामने आते हैं, लेकिन अब जब अन्नदाता मर गया है तो सब गायब हो गए हैं!
किसान नेता यसुदान गढ़वी ने नेताओं के दोहरे रवैये पर हमला करते हुए कहा
वोट पाने का खेल: जब चुनाव आते हैं, तो BJP नेता, जाति-पाति के नेता, तालुका-जिला पदाधिकारी और पेज अध्यक्ष वोट मांगने के लिए घर-घर जाते हैं।
असली ज़रूरत से गायब: आज जब किसान, खेत मज़दूर और पशुपालक बर्बाद हो रहे हैं, तो ये सभी नेता और नेता अंडरग्राउंड हो गए हैं।
निर्दयी नेताओं का पर्दाफ़ाश: जिन्हें MLA चुनकर अन्नदाता के दिलों में जगह बनानी चाहिए थी, वे मुसीबत के समय अपने ही वोटरों का चेहरा देखने को तैयार नहीं हैं।
ईसुदान गढ़वी की 4 मुख्य मांगें और MLAs को चिट्ठी लिखने का अल्टीमेटम
ईसुदान गढ़वी ने 57 सूखा प्रभावित MLAs को चिट्ठी लिखकर अपील की है कि वे बिना किसी राजनीतिक भेदभाव के मुख्यमंत्री के सामने अपनी शिकायतें रखें। उन्होंने 4 मुख्य मांगें दोहराई हैं:
- 108 सूखा प्रभावित तालुकाओं को तुरंत सूखा प्रभावित घोषित किया जाए। 2. DEMO और ‘सोनी योजना’ से खेती के लिए सिंचाई का पानी तुरंत दिया जाए।
- पशुपालकों और गौशालाओं के लिए मुफ़्त और काफ़ी चारे का इंतज़ाम किया जाए।
- किसानों के बिजली के बिल पूरी तरह माफ़ किए जाएं और पैसे की मदद सीधे उनके बैंक अकाउंट में डाली जाए।
जो MLA अपने इलाके के अन्नदाताओं के लिए मुख्यमंत्री को चिट्ठी लिखने की हिम्मत नहीं दिखाते, उन्हें ‘क्रूर’ कहा जाएगा और आने वाले दिनों में उनके नाम पब्लिक किए जाएंगे।
आंदोलन का दूसरा फ़ेज़ 9 सितंबर से: 108 तालुकाओं में किसान क्रांति का शंखनाद
इसुदान गढ़वी ने ऐलान किया है कि ‘सूखा घोषणा सत्याग्रह’ का दूसरा फ़ेज़ 9 सितंबर से शुरू होगा।
108 तालुकाओं के सभी प्रभावित किसानों, पशुपालकों, खेत मज़दूरों और गरीबों से इस बड़े आंदोलन में शामिल होने की अपील की गई है।
हर गांव में 100 लोगों की टीम बनाई जाएगी और किसानों से एप्लीकेशन फ़ॉर्म भरवाए जाएंगे।
यह लड़ाई गांधीनगर के गेट तक ज़ोरदार तरीके से लड़ी जाएगी, जब तक किसानों को उनका हक और राहत का पैसा नहीं मिल जाता।

