दिल्ली में साइबर अपराधों की जांच मजबूत करने के लिए D4C के तहत सभी 15 जिलों में साइबर फॉरेंसिक वैन तैनात करने का प्रस्ताव है। वैन मौके पर डिजिटल सबूत सुरक्षित करेंगी। सेंट्रल साइबर डेटा सेंटर में केस डेटा और फॉरेंसिक रिकॉर्ड भी सुरक्षित रखे जाएंगे।
नई दिल्ली: साइबर अपराधों की जांच को ज़्यादा आधुनिक और तकनीकी रूप से मजबूत बनाने की दिशा में प्रस्तावित दिल्ली साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (D4C) के तहत पुलिस के सभी 15 जिलों के लिए साइबर फॉरेंसिक वैन तैनात होंगी। इनकी मदद से पुलिस घटनास्थल पर ही मोबाइल, कंप्यूटर और अन्य इलेक्ट्रॉनिक इक्विपमेंट्स से जुड़े डिजिटल एविडेंस सुरक्षित कर सकेगी।
पुलिस अफसरों ने बताया कि साइबर क्राइम की जांच में डिजिटल सबूतों को समय रहते सुरक्षित करना बड़ी चुनौती होता है।
इसे देखते हुए सभी जिलों के लिए साइबर फॉरेंसिक वैन उपलब्ध कराने का प्रस्ताव है।
इन वैन में मोबाइल और कंप्यूटर फॉरेंसिक किट, सुरक्षित डेटा स्टोरेज और कम्युनिकेशंस के उपकरण जैसी फैसिलिटी होंगी।
इनका इस्तेमाल घटनास्थल पर तत्काल टेक्निकल सपोर्ट देने और डिजिटल सबूतों को एकत्र करने के लिए होगा।
डिजिटल डिवाइस को लैब भेजने से पहले ही मौके पर ही प्रारंभिक टेक्निकल सपोर्ट मिल सकेगी।
नई दिल्ली के जय सिंह रोड स्थित पुलिस हेडक्वॉर्टर में बनने जा रहे D4C के ऑफिस में एक सेंट्रल साइबर डेटा सेंटर भी स्थापित किया जाएगा।
यह केस डेटा, डिजिटल फॉरेंसिक इमेज, CCTV फुटेज और अन्य जांच संबंधी डिजिटल सबूतों के लिए ‘सेंट्रल स्टोर’ के रूप में काम करेगा।
हैश वेरिफिकेशन से सिक्योारिटी
डिजिटल साक्ष्यों की विश्वसनीयता और उनकी कानूनी स्वीकार्यता बनाए रखना साइबर इन्वेस्टिगेशन का अहम हिस्सा है। इसके लिए डिजिटल एविडेंस मैनेजमेंट सिस्टम का प्रस्ताव है। इसके जरिए डिजिटल सबूतों का पूरा रिकॉर्ड रखा जाएगा। इसमें ऑडिट ट्रेल, हैश वेरिफिकेशन और चेन ऑफ कस्टडी जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएगी। इससे यह सुनिश्चित हो सकेगा कि जांच के दौरान किसी डिजिटल साक्ष्य को कब, किस अधिकारी ने और किस मकसद से एक्सेस किया, इसका रिकॉर्ड उपलब्ध रहे और साक्ष्य की मूल स्थिति की पुष्टि की जा सके।

