Homeटॉप न्यूज़वसुधैव कुटुंबकम" से ही संभव है विश्व का एकीकरण: स्वामी चक्रपाणि महाराज

वसुधैव कुटुंबकम” से ही संभव है विश्व का एकीकरण: स्वामी चक्रपाणि महाराज

लंदन के संत संसद से विश्व शांति और एकीकरण का एक बड़ा और मानवतावादी संदेश सामने आया है। जगद्गुरु सनातन सम्राट स्वामी चक्रपाणि जी महाराज ने अंतरराष्ट्रीय मंच से वैश्विक बिरादरी को “वसुधैव कुटुंबकम” के विचार को अपनाने की अपील की है। महानगर मेट्रो न्यूज़ की इस विशेष रिपोर्ट में जानिए स्वामी जी के इस संबोधन की मुख्य बातें।

युद्ध नहीं, भुखमरी और अशिक्षा के खिलाफ हो लड़ाई

लंदन में आयोजित संत संसद के दौरान अपने संबोधन में स्वामी चक्रपाणि महाराज ने कहा कि आज पूरी दुनिया को युद्ध और संघर्ष की नहीं, बल्कि आपसी सहयोग और भाईचारे की सबसे ज्यादा जरूरत है। उन्होंने कहा कि अगर आज के दौर में लड़ना ही है, तो हथियारों के साथ नहीं, बल्कि गरीबी, भुखमरी, अशिक्षा, अन्याय, अत्याचार और सामाजिक भेदभाव के खिलाफ लड़ा जाना चाहिए। उन्होंने दुनिया के सभी देशों से एकजुट होकर एक ऐसा माहौल बनाने की अपील की, जहां हर इंसान को रोटी, कपड़ा, मकान और तरक्की के बराबर मौके मिल सकें।

परमाणु हथियार मानवता के लिए बड़ा खतरा

दुनिया में व्याप्त मौजूदा तनाव पर चिंता जताते हुए स्वामी जी ने कहा कि आज पूरी दुनिया बारूद के ढेर पर बैठी है और परमाणु हथियार खुद इंसानियत के वजूद के लिए बड़ा खतरा बन चुके हैं। उन्होंने कहा कि इतनी तकनीकी और वैज्ञानिक तरक्की के बावजूद हर देश एक कबीलाई सोच में फंसा हुआ है, जहां सिर्फ “मेरा-मेरा” की संकीर्णता बची है। झूठी राष्ट्रभक्ति और “फूट डालो, राज करो” की नीतियों के जरिए रंगभेद, लिंगभेद, जाति, क्षेत्र और भाषा के नाम पर अपनों का ही शोषण किया जा रहा है, जो बेहद दुखद है।

राजनीति में आध्यात्मिक चेतना की जरूरत

स्वामी जी ने भारत के प्राचीन सनातन दर्शन का जिक्र करते हुए याद दिलाया कि हजारों साल पहले हमारे ऋषियों-मनीषियों ने “वसुधैव कुटुंबकम” यानी पूरा विश्व एक परिवार है, का महामंत्र दिया था। इसी भावना के साथ पूरी दुनिया को एक सूत्र में पिरोया जा सकता है। उन्होंने कहा कि पूरी दुनिया को राजनीति में आध्यात्मिक चेतना का समावेश करना होगा। इसके साथ ही उन्होंने अमेरिका-ईरान और रूस-यूक्रेन जैसे तमाम वैश्विक युद्धों को तुरंत खत्म करने की मांग की और कहा कि वर्चस्व की यह होड़ मानवता को तबाही की तरफ ले जा रही है।

बिना पासपोर्ट और सीमाओं के विश्व भ्रमण का विचार

वैश्विक सीमाओं पर एक बिल्कुल नया और साहसिक दृष्टिकोण रखते हुए स्वामी चक्रपाणि जी ने कहा कि एक ऐसा समय आना चाहिए जब दुनिया का हर नागरिक बिना पासपोर्ट की बाध्यता के, बिना सीमाओं के बंधन के कहीं भी आ-जा सके और रोजगार कर सके। जिस तरह आसमान में पक्षी बिना किसी सीमा के स्वच्छंद होकर उड़ते हैं, ठीक उसी तरह इंसान को भी दुनिया में कहीं भी जाकर रहने और काम करने की आजादी होनी चाहिए, ताकि कोई भी व्यक्ति भूखा न सोए।

दुनिया के धर्मगुरुओं से एकजुट होने का आह्वान

आखिर में उन्होंने दुनिया के तमाम धर्मगुरुओं का आह्वान किया कि जिस तरह सरकारें अपने राजनीतिक एजेंडे पर काम करती हैं, उसी तरह धर्मगुरुओं को भी पूरी दुनिया को जोड़ने और रक्षा करने वाले एक साझे एजेंडे पर काम करना चाहिए। महानगर मेट्रो न्यूज़ के लिए यह विशेष रिपोर्ट।

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