दिल्ली में पानी की मांग और आपूर्ति के अंतर को पूरा करने के लिए बने चंद्रावल और द्वारका के नए वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट पानी की कमी के कारण पूरी तरह चालू नहीं हो पा रहे हैं। दिल्ली जल बोर्ड (DJB) ने इन दोनों प्लांटों के निर्माण पर लगभग ₹880 करोड़ खर्च किए हैं।
नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली में पानी की मांग और सप्लाई के बीच जितना अंतर है उसमें से 155 एमजीडी की भरपाई चंद्रावल और द्वारका में बने नए वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट से हो सकती है, लेकिन दिल्ली जल बोर्ड (DJB) के पास दोनों प्लांटों के लिए पानी ही नहीं है। द्वारका वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट करीब 8 महीने पहले बन चुका है, लेकिन अभी तक इस प्लांट से एक बूंद पानी की भी सप्लाई नहीं हुई है। चंद्रावल में बने नए प्लांट की भी स्थिति अच्छी नहीं है। दोनों वॉटर ट्रीटमेंट प्लांटों के निर्माण पर DJB ने करीब 880 करोड़ रुपये खर्च किए हैं।
जल बोर्ड अफसरों के अनुसार द्वारका में 50 एमजीडी कैपेसिटी का नया वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट बनाया गया है। प्लांट से पानी का प्रोडक्शन शुरू करने के लिए दिल्ली को हरियाणा से अपने सिंचाई के कोटे का 51 क्यूसेक पानी चाहिए था, लेकिन दोनों राज्यों के बीच इस पर सहमति नहीं बन पाई। दिल्ली सरकार अब हरियाणा सरकार को रिठाला एसटीपी में ट्रीट किए पानी को सिंचाई के लिए लेने और इसके बदले पीने के लिए कच्चा पानी देने के लिए मना रही है।
अफसरों का कहना है कि हरियाणा इस प्लान पर कुछ हद तक सहमत है। अगर, हरियाणा 20 एमजीडी कच्चा पानी भी देता है, तो द्वारका वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट से पानी उत्पादन शुरू कर दिया जाएगा। फिलहाल प्लांट से पानी उत्पादन नहीं हो रहा है। प्लांट निर्माण पर जल बोर्ड ने 280.78 करोड़ रुपये खर्च किए हैं।
चंद्रावल : नए प्लांट का ट्रायल पुराने पर निर्भर
चंद्रावल में करीब 90-95 साल पुराना एक प्लांट पहले से बना है, जिसकी क्षमता 90 एमजीडी है। इसी परिसर में 105 एमजीडी कैपेसिटी का नया प्लांट बनाया गया है। पहले यह प्लान था कि मॉनसून में यमुना में जलस्तर बढ़ने के बाद नए प्लांट में पानी उत्पादन का ट्रायल शुरू किया जाएगा। कुछ दिनों तक ट्रायल भी चला, लेकिन इन दिनों में यमुना में पानी कम होने के बाद पुराने प्लांट में जो पानी मिलता है, उसमें कटौती कर नए प्लांट में पानी उत्पादन किया जा रहा है। नए प्लांट से करीब 50-55 एमजीडी पानी उत्पादन हो रहा है। इस प्लांट के निर्माण पर सबसे अधिक 598.57 करोड़ रुपये खर्च किया गया है।

