सरकार के ‘पेड़ लगाओ, पर्यावरण बचाओ’ के नारे की पंचायत ने ही पोल खोली: जागरूक गांववाले ममलतदार ऑफिस पहुंचे, और गुनाह छिपाने के लिए दोपहर 3 बजे लेटर पैड पर झूठ फैलाया!
एक तरफ राज्य और केंद्र सरकारें ‘एक पद मां के नाम’ और ‘पेड़ लगाओ, पर्यावरण बचाओ’ जैसे लुभावने नारे लगाकर और विज्ञापनों पर करोड़ों रुपये खर्च करके प्रकृति की रक्षा की बात करती हैं। लेकिन वडोदरा जिले के डभोई तालुका के फर्टीकुई गांव में एक शर्मनाक मामला सामने आया है कि कानून के रक्षक ही भक्षक बन गए हैं। गांव के बस स्टेशन रोड पर विकास मंडली के पास 4 (चार) बड़े, हरे, 30 साल पुराने, आस्था जैसे और ऑक्सीजन देने वाले गुलमोहर के पेड़ों को बिना किसी एडमिनिस्ट्रेटिव परमिशन या प्रस्ताव के ज़मीन पर गिरा दिया गया है। गांव के जागरूक लोगों ने सरपंच के इस आदेश के खिलाफ आवाज़ उठाई है, जिससे पूरे तालुका में भारी हंगामा हुआ है।
मानसून का बहाना बनाकर सारे पेड़ उखाड़ दिए!
मिली जानकारी के मुताबिक, बस स्टेशन रोड पर विकास मंडली के पास करीब 30 साल पुराने, छोटे गुलमोहर के पेड़ थे। मानसून के मौसम को ध्यान में रखते हुए, पेड़ों की सिर्फ डालियों (ऊपरी हिस्से) को काटने की ज़रूरत थी। लेकिन सरपंच और पंचायत की मिलीभगत से, पूरे हरे, 4 पेड़ों को तने से काट दिया गया, जिससे पर्यावरण को बेरहमी से नुकसान पहुंचा है। पास में स्कूल होने और बिजली के तार जाने जैसे सस्ते बहाने बनाकर इस गंभीर पाप को छिपाने की कोशिश की गई है। रात 12 बजे एप्लीकेशन दी गई और 3 बजे पंचायत ने ‘रातों-रात’ प्रस्ताव पास कर दिया!
गांव के जागरूक नागरिक पटेल रितेश देवेंद्रभाई और पटेल रवि कुमार महेशभाई ने इस गैर-कानूनी और पर्यावरण विरोधी काम के खिलाफ हिम्मत दिखाई। उन्होंने ठीक दोपहर 12:00 बजे डभोई ममलतदार ऑफिस में पेड़ों की गैर-कानूनी कटाई के बारे में एक लिखित एप्लीकेशन दी और कानूनी कार्रवाई की मांग की।
जैसे ही इस ममलतदार ऑफिस की खबर सरपंच तक पहुंची, पंचायत अधिकारियों के पैरों तले से जमीन खिसक गई! अपनी जान बचाने के लिए सरपंच तुरंत पंचायत में बैठे और जल्दबाजी में दोपहर 3:00 बजे के बाद प्रस्ताव पास कर दिया और 18 जुलाई को एक लेटर पैड पर लिखकर बताया कि ‘पंच ने सिर्फ खुद आकर टहनियां काटी हैं’। लेकिन असलियत यह है कि पेड़ टहनियों से नहीं, बल्कि तने से गायब हुए हैं। जागरूक नागरिकों का गुस्सा: पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग
इस मामले में गांव के एक और जागरूक नागरिक मौलिक जशुभाई पटेल ने अपना गुस्सा जाहिर करते हुए कहा कि यह बहुत निंदनीय है कि गांव के जिम्मेदार सरपंच इस तरह से पेड़ हटा रहे हैं, इससे पर्यावरण को बहुत नुकसान हुआ है। वहीं मयूरभाई पटेल ने भी गुस्से में कहा कि ऐसे फालतू हरे पेड़ों को काटने में शामिल सभी लोगों पर फॉरेस्ट एक्ट और कानून की अलग-अलग धाराओं के तहत केस दर्ज कर जेल भेजा जाना चाहिए।
‘महानगर मेट्रो ‘ का बड़ा सवाल: क्या कागज पर लिखे प्रस्तावों से पाप धुल जाएंगे?
अगर कोई आम नागरिक अपने घर के आंगन से भी बिना इजाजत पेड़ काटता है, तो फॉरेस्ट डिपार्टमेंट और प्रशासन जुर्माना लगाने के लिए दौड़ पड़ते हैं। तो फिर फर्टीकुई गांव के सरपंच ने किस हक से 30 साल पुराने पेड़ जो पूरे गांव के फेफड़ों की तरह थे, उन्हें काट दिया? ‘पाको गुजरात न्यूज़’ डभोई मामलतदार और फॉरेस्ट डिपार्टमेंट से एक खुला सवाल पूछता है – क्या दोपहर 12 बजे एप्लीकेशन देने के बाद दोपहर 3 बजे पंचायत के लेटरपैड पर लाया गया यह ‘डमी और लेट रेजोल्यूशन’ माना जाएगा? या पर्यावरण का खून करने वाले इन सरपंच और सदस्यों के खिलाफ कानूनी केस दर्ज होगा और कड़ी कार्रवाई होगी? जनता सब देख रही है, और जब तक इस मामले में इंसाफ नहीं हो जाता, हम पीछे नहीं हटेंगे!

