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गुजरात के बच्चों को ‘स्लो पॉइज़न’ परोसने का काला धंधा: पाटन में 2,000 kg ज़हरीला-मिलावटी नमक ज़ब्त, ब्रांडेड वेफ़र पैकेट भी फेल!

फ़ैक्टरी आज सील होगी और क्या इसे ‘एडमिनिस्टर्ड’ करके कुछ दिनों में फिर से पूरे ज़ोरों पर चलाया जाएगा? ‘पक्को गुजरात न्यूज़’ ने फ़ूड एंड ड्रग्स डिपार्टमेंट की मिलीभगत पर कड़ा हमला किया है!

गुजरात, जिसे ‘खाने-पीने का शौकीन’ राज्य माना जाता है, में जनता की सेहत के साथ खेला जाने वाला एक बहुत ही जानलेवा और खून जमा देने वाला खेल सामने आया है। जो पैकेट हमारे बच्चे हर समय खाते हैं, वे असल में हेल्दी खाना नहीं बल्कि केमिकल और सड़े हुए तेल से बना ‘स्लो पॉइज़न’ हैं! फ़ूड एंड ड्रग्स डिपार्टमेंट ने पाटन में छापा मारकर 2,000 kg (दो हज़ार kg) ज़हरीला, मिलावटी और न खाने लायक नमक ज़ब्त किया है। यह आंकड़ा सिर्फ़ एक फ़ैक्टरी का है, ऐसे मौत के सौदागर पूरे गुजरात में कानून की धज्जियां उड़ा रहे हैं।

2,000 kg ज़हर ज़ब्त हुआ, लेकिन सवाल है कि आगे क्या?

पाटन की इस नमक फैक्ट्री में जिस तरह की गंदगी, सड़ा हुआ सामान और बैन कलर-केमिकल मिले, उसे देखकर कोई भी शरीफ़ इंसान कांप जाएगा। लेकिन जनता अब इस अंधे सिस्टम की हरकतों को जान चुकी है। जनता गुस्से में है कि – “आज यह फैक्ट्री पकड़ी गई है, मीडिया में हेडलाइन बनेंगी, अधिकारी फोटो खींचेंगे और कुछ ही दिनों में पर्दे के पीछे बड़ा ‘एडमिनिस्ट्रेशन’ (रिश्वत) होगा, तो यही मौत की फैक्ट्री फिर से गुलज़ार होगी!” लाइसेंस कैंसिल करने के नाम पर सिर्फ़ कागज़ पर नोटिस फाड़ देना ही संतोषजनक माना जाता है, किसी काली भेड़ के मालिक को उम्रकैद की सज़ा नहीं होती।

बड़े ब्रांड के पैकेट भी फेल: गिप्पी और बालाजी के नाम पर धोखाधड़ी?

लोकल मार्केट में लोकल नमकीन ही नहीं, बल्कि बालाजी वेफर्स के ‘गिप्पी’ जैसे मशहूर ब्रांडेड पैकेट की क्वालिटी पर भी गंभीर सवाल उठ रहे हैं। कंज्यूमर्स का आरोप है कि ब्रांड के नाम पर भी, टमाटर वेफर्स के नाम पर बहुत ज़्यादा प्रिजर्वेटिव और केमिकल कलर वाले बासी स्नैक्स बहुत ज़्यादा दाम लेकर परोसे जा रहे हैं। छोटी फैक्ट्रियां तो ठीक हैं, लेकिन सिस्टम इतने बड़े ब्रांड्स को सख्त फूड सेफ्टी स्टैंडर्ड्स के तहत चेक करने की हिम्मत क्यों नहीं दिखाता? क्या बड़े इंडस्ट्रियलिस्ट्स के दबाव में अधिकारियों की कलम बंद हो जाती है?

आलू, पास्ता और कचौरी के नाम पर कैंसर बेच रहे हैं!

आजकल मार्केट में मिलने वाले आलू वेफर्स, पास्ता, कचौरी और फ्राइट्स जैसे आकर्षक स्नैक्स में इस्तेमाल होने वाला तेल असल में फ्यूल ऑयल है। उसी तेल को पचास बार उबालकर उसमें नमक फ्राई किया जाता है, जो सीधे दिल की बीमारी और कैंसर जैसी जानलेवा बीमारियों को न्योता देता है। सूरत से लेकर पाटन तक, गुजरात के कोने-कोने में ऐसी गैर-कानूनी और हाइजीन को शर्मसार करने वाली फैक्ट्रियां फल-फूल रही हैं।

‘महानगर ‘ का खुला चैलेंज: दोषियों को जेल भेजो!

जब तक इन बदमाशों पर, जो मासूम नागरिकों के लिवर और किडनी में मिलावट करते हैं और उन्हें खराब करते हैं, हत्या की कोशिश (IPC 307) के जुर्म में केस नहीं बनता और उनकी प्रॉपर्टी ज़ब्त नहीं होती, तब तक यह काला धंधा नहीं रुकेगा। ‘पाको गुजरात न्यूज़’ गुजरात के सभी माता-पिता से अपील करता है कि वे अपने बच्चों को ऐसे पैकेट के ज़हर से बचाएं। हम इन फ़ूड माफ़ियाओं और उन्हें बचाने वाले भ्रष्ट अधिकारियों का असली चेहरा सामने लाते रहेंगे, यह लड़ाई जनता की सेहत के लिए है और यह नहीं रुकेगी!

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