अहमदाबाद : गुजरात की गौरवशाली और राज्य की सबसे बड़ी शैक्षणिक संस्था मानी जाने वाली गुजरात यूनिवर्सिटी (Gujarat University) अब विद्या के धाम की जगह भ्रष्टाचार और घोटालों के अड्डे के रूप में बदनाम हो रही है। यूनिवर्सिटी में किए गए काले कारनामों को लेकर एक बेहद चौंकाने वाला खुलासा सामने आया है। शैक्षणिक हलकों में चर्चा की जा रही जानकारी के मुताबिक, यूनिवर्सिटी में लगभग ₹200 करोड़ के आर्थिक घोटाले की बू आ रही है, जिसे लेकर विद्यार्थियों, शिक्षाविदों और पूरे राज्य में भारी सनसनी फैल गई है।
वित्तीय अनियमितताओं, करोड़ों रुपये की ग्रांट के दुरुपयोग और प्रशासनिक लूट के इस मामले में अब सवाल उठ रहे हैं कि इस घोटाले के पीछे असली चेहरे किसके हैं?
क्या है पूरे घोटाले की कहानी? (वित्तीय गड़बड़ियों के गंभीर आरोप)
प्राप्त विवरण के अनुसार, गुजरात यूनिवर्सिटी में पिछले कुछ समय से चल रहे प्रशासनिक वर्चस्व और भ्रष्टाचार के कारण तिजोरी खाली हो रही है:
पहले भी लगे हैं बड़े आरोप: यूनिवर्सिटी में पहले भी विभिन्न छात्र संगठनों (जैसे ABVP और NSUI) द्वारा करोड़ों रुपये की हेराफेरी के आरोप लगाए गए हैं। कहीं ₹34 करोड़, कहीं ₹32 करोड़ तो कहीं ₹40 करोड़ तक के वित्तीय घोटालों के आरोप पहले सतह पर आए थे।
आर्थिक नुकसान और ग्रांट का दुरुपयोग: यूनिवर्सिटी को विभिन्न स्रोतों से मिलने वाली करोड़ों रुपये की ग्रांट और फंड का सही उपयोग करने के बजाय अपने निजी हितों के लिए बर्बाद कर दिए जाने की गंभीर चर्चाएं चल रही हैं। कागजों पर प्रोजेक्ट्स दिखाकर या फालतू खर्चे बताकर करोड़ों रुपये की हेराफेरी किए जाने की आशंका है।
भर्ती और प्रशासनिक घोटाले: यूनिवर्सिटी में नियमों को ताक पर रखकर की गई कर्मचारियों की अवैध भर्ती और पद के दुरुपयोग के मामले भी पहले चर्चा के केंद्र में रहे हैं।
पूर्व प्रशासनिक हलचल और सवालों के घेरे में जिम्मेदार
जब यूनिवर्सिटी में इतने बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताओं की बात सामने आई है, तो जाँच के तार सीधे तौर पर उच्च स्तरीय प्रशासनिक अधिकारियों और पूर्व पदाधिकारियों की ओर इशारा कर रहे हैं। पहले पूर्व कुलपतियों और जिम्मेदार पदाधिकारियों के खिलाफ ग्रांट के आवंटन में गड़बड़ी तथा मनमाने फैसले लेने के गंभीर आरोप लग चुके हैं।
अब सवाल यह उठता है कि:
- क्या यह ₹200 करोड़ का घोटाला केवल अफवाह है या फिर कोई बड़ा काला सच बाहर आने की तैयारी में है?
- यूनिवर्सिटी के विकास के लिए आने वाले करोड़ों रुपये आखिर किस खाते में और किसकी तिजोरी में समा गए?
- क्या शिक्षा के मंदिर को लूटने वाले इन भ्रष्ट माफियाओं के खिलाफ किसी कड़ी जाँच एजेंसी द्वारा छापे मारे जाएंगे?
जाँच में क्या सामने आएगा? (सरकार और एजेंसियों की सख्त नजर)
छात्र संगठनों द्वारा इस मामले में उग्र विरोध प्रदर्शन किए गए हैं और उच्च स्तरीय निष्पक्ष जाँच की माँग उठी है। यदि इस मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) या ऑडिट टीम द्वारा गहराई से जाँच की जाए, तो कई दिग्गजों के नकाब उतर सकते हैं और कई बड़े चेहरे सलाखों के पीछे जा सकते हैं।
विद्या के पवित्र धाम को लूटने वाले इन लुटेरों का पर्दाफाश करने के लिए ‘महानगर मेट्रो’ की टीम लगातार इस मामले पर नजर बनाए हुए है।
गुजरात यूनिवर्सिटी और शिक्षा जगत की ऐसी ही सुलगती, विस्फोटक और अंदर की खबरें सबसे पहले पढ़ने के लिए जुड़े रहें ‘महानगर मेट्रो’ न्यूज़ पेपर के साथ।

