चातुर्मास क्या है और यह क्यों मनाते चातुर्मास यानि चार महिने , वर्ष के बारह महीने व तीन ऋतुएं , एक ऋतु चार महीने तक होती है यही चातुर्मास, तो वर्षा ऋतु वाला चातुर्मास का इतना विशेष महत्व क्यों,
इस ऋतु में बारिश होने के कारण जीवों की उत्पत्ति अधिक होती है। निर्दोष जीवो कि विराधना न हो, इसी कारण ज्ञानी भगवंतों ने श्रमण , श्रमणी भगवंतों को चार महीने एक जगह स्थिर रहकर आराधना करने व कराने आज्ञा दी है।
हमारा कर्तव्य क्या है?
हमें भी बिना कारण इन दिनों में बाहर गांव नहीं जाना चाहिए, साधू महाराज के नियम होते , लेकिन हमारे प्रायः नियम नहीं होते लेकिन जितना हो सके उतना जयणा पालन करना चाहिए,
इन दिनों में भक्ष्य और अभक्ष्य का खास ध्यान रखना
पास के उपाश्रय में जाकर महात्मा से जान लेना कि अभी क्या क्या भक्ष्य हे, और कितने दिन तक चलेगा , ऋतु परिवर्तन के साथ खाने पिने कि वस्तुओं में भी बदलाव होता है कल तक बादाम भक्ष्य थी लेकिन आज से बदाम भी 4 महीने के लिए अब अभक्ष्य होगी , इन चार महीने में बाहर का खाना का पूरा तरह त्याग करना चाहिए ताकि निर्दोष गोचरी का लाभ मिले,
चातुर्मास का विशेष प्राण है तो व जिनवाणी है , जिनवाणी का श्रवण जरूर करें, आज महात्मा का प्रवेश बड़े धूमधाम से शहो रहा है बड़े-बड़े पंडाल उपासरे को बहुत कीमती वस्तुओं से सजाया जाता है लेकिन देखें तो सब प्रवचन हॉल खाली ही रहते हैं । आप अपना समय निकालकर उपाश्रय में जरूर आवे और जिनवाणी का श्रवण करें विशेष कर युवा मित्रों से निवेदन है कि आप ज्यादा से ज्यादा मात्रा में उपाश्रय में पधारे है क्योंकि बिना, जिनवाणी आत्मा का कल्याण नहीं है , प्रभू की वाणी से ही आत्मा का उद्धार होगा
के विक्रम सुराणा

