तालकटोरा स्टेडियम में आयोजित ‘अंतर्राष्ट्रीय धर्म संसद’ में संतों ने लिया ऐतिहासिक संकल्प
केंद्र सरकार से की गई मूल गर्भगृह में पुनः पूजा-अर्चना शुरू कराने की मांग
नई दिल्ली: नई दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में आयोजित ‘अंतर्राष्ट्रीय धर्म संसद’ में हजारों संतों, धर्माचार्यों और श्रीकृष्ण भक्तों ने राष्ट्र रक्षा, गौरक्षा और श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति के लिए ऐतिहासिक सामूहिक संकल्प लिया। कार्यक्रम की अध्यक्षता अखिल भारत हिंदू महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं जगद्गुरु सनातन सम्राट स्वामी चक्रपाणि जी महाराज ने की।
अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में स्वामी चक्रपाणि जी महाराज ने कहा, “जिस प्रकार करोड़ों रामभक्तों के संघर्ष और बलिदान से श्रीराम जन्मभूमि पर भव्य मंदिर का मार्ग प्रशस्त हुआ, उसी प्रकार अब श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति का समय भी आ चुका है।” उन्होंने केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से श्रद्धालुओं की भावनाओं का सम्मान करते हुए इस विषय पर सकारात्मक पहल करने का आग्रह किया।
व्यापक जनआंदोलन की शुरुआत
धर्म संसद में श्रीकृष्ण जन्मभूमि के मूल गर्भगृह में पुनः पूजा-अर्चना, वैदिक अनुष्ठान, अखण्ड दीप प्रज्ज्वलन और भगवान को माखन-मिश्री भोग अर्पित करने की मांग प्रमुखता से उठाई गई। स्वामी चक्रपाणि जी ने स्पष्ट किया कि यह कार्यक्रम मात्र एक आयोजन नहीं, बल्कि एक राष्ट्रव्यापी जनजागरण अभियान का शुभारंभ है, जो आने वाले समय में एक व्यापक जनआंदोलन का रूप लेगा।
देशभर से जुटे दिग्गज संत
इस भव्य समागम में स्वामी चक्रपाणि जी महाराज द्वारा प्रस्तुत संकल्प का उपस्थित जनसैलाब ने दोनों हाथ उठाकर और ‘ॐ’ का उच्चारण कर समर्थन किया। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में महंत नारायण गिरि जी महाराज और विशिष्ट वक्ता के रूप में दादी जी महाराज ने विचार व्यक्त किए। मंच संचालन महामंडलेश्वर नवल किशोर दास जी महाराज ने किया। इस अवसर पर आचार्य लोकेश मुनि, आचार्य विवेक मुनि, महामंडलेश्वर अवधेशानंद सरस्वती सहित देश के कोने-कोने से आए सैकड़ों प्रतिष्ठित संत और हजारों श्रद्धालु उपस्थित रहे।

