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महानगर मेट्रो विशेष: बंगाल में बड़ा सियासी उलटफेर! सीएम शुभेंदु अधिकारी की बैठक में पहुंचे TMC के ६ विधायक

कोलकाता : बंगाल विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस (TMC) की करारी हार के बाद पार्टी के भीतर मचे घमासान ने अब एक नया और बेहद चौंकाने वाला मोड़ ले लिया है। राज्य के राजनीतिक गलियारों में उस वक्त खलबली मच गई, जब मंगलवार को टीएमसी सांसद काकोली घोष सहित पार्टी के छह मौजूदा विधायकों ने पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की प्रशासनिक समीक्षा बैठक में खुलकर हिस्सा लिया। चुनाव नतीजों के बाद टीएमसी के भीतर जारी अंदरूनी कलह और बगावत के बीच इस घटनाक्रम के कई बड़े राजनीतिक मायने निकाले जा रहे हैं।

काकोली घोष की मौजूदगी ने बढ़ाई टीएमसी की धड़कनें

महानगर मेट्रो को मिली जानकारी के अनुसार, टीएमसी के भीतर असंतोष की आग काफी समय से सुलग रही थी। सांसद काकोली घोष ने हाल ही में जिला अध्यक्ष पद से इस्तीफा देकर अपने बागी तेवर साफ कर दिए थे। ऐसे संवेदनशील समय में, राज्य की बीजेपी सरकार के आधिकारिक और प्रशासनिक मंच पर उनकी और अन्य विधायकों की मौजूदगी ने बंगाल की राजनीति में एक नए समीकरण के संकेत दे दिए हैं।
बैठक में शामिल होने वाले टीएमसी नेताओं की सूची:

काकोली घोष (TMC सांसद एवं वरिष्ठ नेता)
अनीसुर रहमान बिस्वास (विधायक, देगंगा)
बीना मंडल (विधायक, स्वरूपनगर)
मोहम्मद अब्दुल मतीन (विधायक, हरोआ)
बसीरहाट क्षेत्र के तीन अन्य विधायक
टीएमसी में बिखराव: सामूहिक इस्तीफों का दौर शुरू

बंगाल चुनाव में शिकस्त का सामना करने के बाद तृणमूल कांग्रेस ताश के पत्तों की तरह बिखरती नजर आ रही है। पार्टी के नेतृत्व से नाराज कई नेता अब खुलकर अपना असंतोष जता रहे हैं। अंदरूनी सूत्रों के मुताबिक, टीएमसी के नियंत्रण वाले कई नगर निकायों (Municipal Bodies) में आपसी गुटबाजी और कलह इस कदर बढ़ चुकी है कि वहां पार्षदों और स्थानीय पदाधिकारियों के सामूहिक इस्तीफों का दौर शुरू हो गया है।

महानगर मेट्रो विश्लेषण: मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की इस अहम बैठक में उत्तर २४ परगना और बसीरहाट इलाके के महत्वपूर्ण टीएमसी चेहरों का शामिल होना यह साफ करता है कि जमीन पर टीएमसी की पकड़ कमजोर हो रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह केवल एक प्रशासनिक बैठक नहीं थी, बल्कि आने वाले दिनों में बंगाल की राजनीति में होने वाले किसी बड़े दलबदल या धमाके की ‘पिक्चर’ का सिर्फ एक ट्रेलर है।

अब देखना यह होगा कि अपने ही विधायकों और सांसदों की इस खुली बगावत पर टीएमसी आलाकमान क्या रुख अपनाता है, और क्या मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी का यह दांव टीएमसी के ताबूत में आखिरी कील साबित होगा?

ब्यूरो रिपोर्ट, महानगर मेट्रो न्यूज़।

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