Homeआर्टिकलजैन संतों को बदनाम कर वसूली करने वाला ‘ब्लैकमेलिंग सिंडिकेट’ बेनकाब!

जैन संतों को बदनाम कर वसूली करने वाला ‘ब्लैकमेलिंग सिंडिकेट’ बेनकाब!

फॉरेंसिक जांच में फेक निकले थे आचार्य श्री सागरचंद्रसागरसूरीश्वर के फोटो; अब अपनी खाल बचाने के लिए साजिशकर्ता फैला रहे हैं भ्रम

विशेष प्रतिनिधि, सूरत/अहमदाबाद : धर्म, आस्था और पूजनीय संतों की आड़ में ब्लैकमेलिंग और वसूली का धंधा चलाने वाले एक शातिर गैंग का पर्दाफाश हुआ है। सूरत के पॉश इलाके वेसू के एक जिनालय के आचार्य श्री सागरचंद्रसागरसूरीश्वर जी महाराज साहब के खिलाफ सोशल मीडिया पर जो कथित तस्वीरें वायरल की गई थीं, वे पूरी तरह से फर्जी, मॉर्फ्ड और एडिटेड थीं। इस घिनौनी साजिश के पीछे अहमदाबाद के जगत पारेख, विक्रम बाफना, कल्पेश सिंघवी और हार्दिक हुडिया का नाम सामने आया है, जिनका मुख्य मकसद सिर्फ और सिर्फ जैन मुनियों को डराकर उनसे मोटी रकम वसूलना और ब्लैकमेल करना था।

गच्छाधिपति के सामने भाग खड़े हुए साजिशकर्ता

मामले की गंभीरता को देखते हुए जब गच्छाधिपति श्री नरदेवसागर सूरीश्वर जी महाराज साहब ने कड़ा रुख अपनाया और इन सभी आरोपियों को तलब किया, तो इनके पैर उखड़ गए। गच्छाधिपति ने इन्हें बार-बार आदेश दिया कि यदि तस्वीरें सच्ची हैं, तो उनके ‘ओरिजिनल सोर्स और प्रमाण’ लेकर सामने आएं। लेकिन हफ्तों बीत जाने और कई बार बुलाए जाने के बाद भी इनमें से एक भी आरोपी महाराज साहब के सामने आने की हिम्मत नहीं जुटा सका।
फॉरेंसिक रिपोर्ट ने खोली पोल, गच्छाधिपति ने दी क्लीनचिट

जब आरोपी सबूत देने में नाकाम रहे, तो गच्छाधिपति श्री नरदेवसागर सूरीश्वर महाराज ने इन कथित तस्वीरों की उच्च स्तरीय फॉरेंसिक जांच (Forensic Lab Investigation) करवाई। जांच रिपोर्ट आते ही झूठ का वह महल ढह गया जो इन ब्लैकमेलर्स ने खड़ा किया था। फॉरेंसिक एक्सपर्ट्स ने साफ किया कि तस्वीरों के साथ छेड़छाड़ की गई थी। इसके बाद गच्छाधिपति जी ने लिखित तौर पर आचार्य श्री सागरचंद्रसागरसूरीश्वर जी को पूर्ण रूप से क्लीनचिट दे दी।

‘महानगर मेट्रो’ को मोहरा बनाने की थी कोशिश; ऐसे हुआ भंडाफोड़

इस साजिश का सबसे खतरनाक पहलू यह था कि ये आरोपी खुद को पाक-साफ दिखाने के लिए मीडिया का इस्तेमाल करना चाहते थे। मास्टरमाइंड हार्दिक हुडिया लगातार ‘महानगर मेट्रो’ के दफ्तर में भ्रामक प्रेसनोट्स और खबरें छपवाने के लिए दबाव बना रहा था।

लेकिन, खोजी पत्रकारिता के सिद्धांतों पर चलने वाले ‘महानगर मेट्रो’ को इस पूरे मामले में गहरी साजिश की बू आई। हमारी टीम ने जब अपने स्तर पर इस मामले की ग्राउंड इन्वेस्टिगेशन और तकनीकी पड़ताल की, तो सच्चाई कुछ और ही निकली। सामने आया कि जगत पारेख (जिस पर पहले से ही कई पुलिस केस दर्ज हैं) और उसका साथी हार्दिक हुडिया मिलकर जैन समाज में भय का माहौल बना रहे थे ताकि मुनियों को ब्लैकमेल किया जा सके।

अब बौखलाहट में पुरानी खबरें वायरल करने का पैंतरा

अब जब इस ब्लैकमेलिंग गैंग का काला चिट्ठा पूरी तरह जनता और कानून के सामने आ चुका है, तो अपनी साख बचाने के लिए ये लोग ‘महानगर मेट्रो’ की ही पुरानी खबरों और कतरनों को सोशल मीडिया पर तोड़-मरोड़ कर वायरल कर रहे हैं। मामला भले ही पुराना हो, लेकिन इस गैंग की गिद्ध दृष्टि आज भी जैन समाज की एकता और शांति पर टिकी हुई है।

महानगर मेट्रो का स्टैंड: अपराधियों को बेनकाब करना हमारा धर्म

‘महानगर मेट्रो’ अपने पाठकों और पूरे जैन समाज को आश्वस्त करता है कि पीत पत्रकारिता और ब्लैकमेलिंग के इस गठजोड़ को हम कभी कामयाब नहीं होने देंगे। संतों की अस्मिता से खिलवाड़ करने वाले ये अपराधी समाज और कानून दोनों के गुनहगार हैं। ऐसे तत्वों से सतर्क रहें और इनके द्वारा फैलाई जा रही किसी भी फेक न्यूज पर विश्वास न करें।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -
Google search engine

Most Popular

Recent Comments