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महा-विस्फोट : अंकलेश्वर में खाकी की ‘दलाली’, वर्दी पर चढ़ा माफिया का खून!

‘मौत’ का सौदागर माफिया विजय, और उसकी रखैल बनी अंकलेश्वर पुलिस! PI चावड़ा और LCB का ‘गंदा’ गठबंधन; चोटा बाज़ार में सजे जुर्म के बाज़ार में नीलाम हुआ मुख्यमंत्री का इक़बाल!

अंकलेश्वर से विशेष खोजी रिपोर्ट : शर्म करो भरूच पुलिस! अगर तुम्हारी रगों में कानून का खून दौड़ता है, तो डूब मरो, क्योंकि अंकलेश्वर की सड़कों पर कानून का जनाज़ा निकल चुका है। जिसे हम रक्षक समझते थे, वो भक्षक बनकर माफिया की गोद में खेल रहे हैं। ‘महानगर मेट्रो’ आज उस ‘खाकी’ को नंगा करने जा रहा है, जिसने चंद रुपयों के लिए अपनी वर्दी का मान और जनता का विश्वास माफिया ‘विजय’ के पैरों में गिरवी रख दिया है।

चोटा बाज़ार: पुलिस के ‘हफ्ते’ का तीर्थस्थान!

रेलवे स्टेशन के पास बसा चोटा बाज़ार अब बाज़ार नहीं, बल्कि ‘पाप की मंडी’ बन चुका है। यहाँ माफिया विजय का काला साम्राज्य चीख-चीख कर कह रहा है कि गुजरात में शराबबंदी सिर्फ कागज़ों पर है। सट्टे के अड्डे, वरली मटका और ‘आसरा’ के नाम पर हज़ारों घरों के चिराग बुझ रहे हैं, लेकिन PI चावड़ा की आँखों पर गांधी के नोटों की पट्टी बंधी है। तार फड़ फड़िया इलाके से जो शराब की बदबू आती है, वो दरअसल पुलिस के भ्रष्टाचार की सड़ांध है।

वर्दीधारी गद्दार: मुखबिरों की बलि चढ़ाती ‘कातिल’ पुलिस!

अंकलेश्वर पुलिस ने जो पाप किया है, उसकी माफ़ी न कानून देगा न खुदा। जब कोई जांबाज नागरिक अपनी जान जोखिम में डालकर इन अवैध अड्डों की सूचना देता है, तो LCB और स्थानीय पुलिस रेड करने के बजाय उस नागरिक का नंबर सीधे माफिया विजय को ‘सुपारी’ के तौर पर दे देती है।
सुन लो अधिकारियों! अगर उस सूचना देने वाले को खरोंच भी आई, तो उसके खून का कतरा-कतरा तुम्हारी वर्दी पर गिरेगा। तुम पुलिस नहीं, अपराधियों के ‘पेड एजेंट’ बन चुके हो।

PI चावड़ा और LCB PI वाला: सवालो से डर या गुनाह का कबूलनामा?

जब ‘महानगर मेट्रो’ ने इन वर्दीधारियों से तीखे सवाल पूछे, तो साहबों की सिट्टी-पिट्टी गुम हो गई। जवाब देने की हिम्मत नहीं थी, इसलिए कायरों की तरह हमारा नंबर ब्लॉक कर दिया।

चावड़ा साहब! नंबर ब्लॉक करने से सच नहीं दबेगा। क्या आप उस दिन का इंतज़ार कर रहे हैं जब जहरीली शराब पीकर अंकलेश्वर की गलियों में लाशों के ढेर लगें?
क्या आप चाहते हैं कि एक और ‘लट्ठाकांड’ हो और गुजरात सरकार की पूरी दुनिया में थू-थू हो?
सत्ता के खिलाफ ‘स्लीपर सेल’: क्या ये पुलिस अधिकारी बागी हैं?

यह महज़ भ्रष्टाचार नहीं, बल्कि राज्य सरकार के खिलाफ खुली बगावत है।

1 सरकार गिराने की साजिश: क्या ये दागी अधिकारी विपक्ष के साथ मिलकर सरकार को बदनाम करने का ‘कॉन्ट्रैक्ट’ ले चुके हैं?
2 SP भरूच का मौन: भरूच के कप्तान साहब, आपकी नाक के नीचे ‘कमानांतर सरकार’ चल रही है। क्या आपका इंटेलिजेंस सो रहा है या फिर इस बहती गंगा में ऊपर तक हाथ धोए जा रहे हैं?
3 SMC की नाकामी: स्टेट मॉनिटरिंग सेल को जानकारी दी गई, लेकिन क्या विजय के काले धन ने गांधीनगर की दलीलों को भी खामोश कर दिया है?
मुख्यमंत्री जी, अब हंटर चलाइये!

गुजरात के मुख्यमंत्री और गृहमंत्री जी, आपकी शराबबंदी को ये अधिकारी अपने जूतों के नीचे कुचल रहे हैं। ये अधिकारी मुख्यमंत्री के आदेशों को नहीं, बल्कि माफिया विजय के इशारों को सलाम ठोकते हैं। जनता पूछ रही है—अंकलेश्वर पुलिस स्टेशन है या माफिया का हेडक्वार्टर?

अंतिम चेतावनी!

‘महानगर मेट्रो’ रुकने वाला नहीं है। हमारी कलम अब तेज़ाब उगल रही है। जब तक चोटा बाज़ार का यह पाप का गढ़ ध्वस्त नहीं होता और भ्रष्ट अधिकारियों की वर्दी नहीं उतरती, हम चैन से नहीं बैठेंगे।

अंकलेश्वर की जनता जाग चुकी है, अब इन भेड़ियों की खैर नहीं!

ब्यूरो रिपोर्ट: महानगर मेट्रो न्यूज़

(हम नहीं डरते किसी के नंबर ब्लॉक करने से, हम तो सिस्टम को अनब्लॉक करना जानते हैं!)

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