गजब घोटाला : अय्याशी के लिए चपरासी ने खाली कर दी सरकारी तिजोरी, 98 ट्रांजैक्शन से उड़ाए करोड़ों रुपये
महानगर मेट्रो ब्यूरो : उत्तर प्रदेश से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसे सुनकर अच्छे-अच्छे ‘मास्टरमाइंड’ दंग रह जाएं। यहाँ एक मामूली पद पर तैनात चपरासी ने अपनी ‘लक्जरी लाइफ’ और महिलाओं के शौक पूरे करने के लिए सरकारी खजाने में ऐसी सेंध लगाई कि विभाग को कानों-कान खबर तक नहीं हुई। 3 पत्नियों और कई प्रेमिकाओं के खर्चे उठाने के चक्कर में इस शख्स ने ₹8 करोड़ का घोटाला कर डाला।
अय्याशी का ‘सरकारी’ बिल
कहने को वह एक साधारण चपरासी था, लेकिन उसकी जीवनशैली किसी बड़े अधिकारी से भी ऊपर थी। पुलिस जांच में सामने आया है कि इस ‘रंगीनमिजाज’ चपरासी ने सरकारी पोर्टल पर फेक आईडी बनाई और कुल 98 ट्रांजैक्शन के जरिए ₹8 करोड़ रुपये अपने मित्रों और रिश्तेदारों के खातों में ट्रांसफर कर दिए।
बीबियों पर मेहरबानी: घोटाले की रकम का बड़ा हिस्सा उसने अपनी पत्नियों पर लुटाया। जांच में पता चला है कि लगभग ₹1 करोड़ तो उसने अपनी एक ही पत्नी के नाम कर दिए थे।
आलीशान जिंदगी: चपरासी ने अवैध कमाई से महंगे फ्लैट खरीदे और अपनी प्रेमिकाओं को शाही जिंदगी का अहसास कराया।
7 महिला साथी भी गिरफ्तार
पुलिस ने जब इस जालसाजी का पर्दाफाश किया, तो चौंकाने वाली कड़ियां जुड़ती गईं। इस घोटाले में केवल चपरासी ही शामिल नहीं था, बल्कि उसे सहयोग देने वाली 7 महिला साथियों को भी गिरफ्तार किया गया है। ये महिलाएं कथित तौर पर उसकी प्रेमिकाएं और इस पूरे खेल की राजदार थीं।
सिस्टम की खामी का उठाया फायदा
हैरानी की बात यह है कि एक चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी कैसे इतने बड़े स्तर पर डिजिटल ट्रांजैक्शन करने में सफल रहा? उसने विभाग के आईडी-पासवर्ड की चोरी की और धीरे-धीरे करोड़ों रुपये पार कर दिए। जब ऑडिट में बड़ी विसंगतियां पाई गईं, तब जाकर इस ‘हाई-प्रोफाइल’ चपरासी का कच्चा चिट्ठा खुला।
महानगर मेट्रो कमेंट
यह मामला प्रशासन की सुरक्षा प्रणाली पर एक बड़ा तमाचा है। जब एक चपरासी करोड़ों का वारा-न्यारा कर सकता है, तो सिस्टम की निगरानी पर सवाल उठना लाजिमी है। फिलहाल, आरोपी चपरासी और उसकी ‘मंडली’ सलाखों के पीछे है, लेकिन सरकारी खजाने को जो चपत लगी है, उसकी भरपाई मुश्किल दिख रही है।

