हनीट्रैप और फर्जी पत्रकारों के सिंडिकेट ने शुरू किया संतों को बदनाम करने का ‘गंदा खेल’ | आखिर कौन है इस षड्यंत्र का मास्टरमाइंड?
ब्यूरो रिपोर्ट: महानगर मेट्रो : अहमदाबाद/मुंबई: अहिंसा और संयम के स्तंभ जैन धर्म पर आज बाहरी खतरों से ज्यादा आंतरिक ‘दीमक’ का हमला तेज हो गया है। जैसे-जैसे जैन समुदाय के गच्छाधिपति और संत भगवंत शासन की प्रभावना को विश्व स्तर पर ले जा रहे हैं, वैसे-वैसे समाज के भीतर छिपे कुछ स्वयंभू रक्षक और अपराधी प्रवृत्ति के लोग उन्हें बदनाम करने की साजिश रच रहे हैं। महानगर मेट्रो की विशेष जांच में एक ऐसे गिरोह का खुलासा हुआ है जो चंद रुपयों और झूठे वर्चस्व के लिए पूरे जैन संघ को दांव पर लगा रहा है।
जगत पारेख: ‘रक्षक’ का मुखौटा पहने ‘बहिष्कृत’ अपराधी
इस पूरे खेल का सबसे चर्चित नाम जगत पारेख है। खुद को जैन माहासंघ का उप-प्रमुख बताकर रसूख झाड़ने वाले इस व्यक्ति का सच बेहद डरावना है। सूत्रों के अनुसार, इसकी संदिग्ध और अनैतिक गतिविधियों के कारण जैन संघ इसे बहुत पहले ही निष्कासित (Expel) कर चुका है। पारेख पर न केवल धोखाधड़ी के कई मुकदमे दर्ज हैं, बल्कि अहमदाबाद क्राइम ब्रांच भी इसकी धरपकड़ कर चुकी है। सवाल यह उठता है कि जिस व्यक्ति का अपना दामन दागदार है, वह पूज्य संतों पर उंगली उठाने की हिम्मत कैसे कर सकता है?
हनीट्रैप और फर्जी पत्रकारिता का ‘कॉम्बिनेशन’
साजिश का जाल केवल एक व्यक्ति तक सीमित नहीं है। इसमें कल्पेश सिंघवी, विक्रम बाफना और कथित पत्रकार हार्दिक हुडिया जैसे चेहरों की एक पूरी चेन जुड़ी हुई है। इनका ‘मोडस ऑपेरंडी’ (काम करने का तरीका) बेहद घिनौना है:
1 षड्यंत्र: प्रभावशाली संतों को टारगेट करना जो समाज में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं।
2 हनीट्रैप: फर्जी महिलाओं और जाली वीडियो के जरिए संतों को फंसाने की कोशिश करना।
3 ब्लैकमेलिंग: फर्जी पत्रकारों की फौज खड़ी कर समाज में बदनामी का डर फैलाना और मोटी रकम की उगाही करना।
समाज को ‘अल्पसंख्यक’ बनाने की अंदरूनी लड़ाई
आज जब जैन समुदाय पहले से ही संख्या बल में कम (अल्पसंख्यक) है, तब समुदायवाद की यह लड़ाई समाज की जड़ों को खोखला कर रही है। ये लोग जैन शासन की रक्षा की बात तो करते हैं, लेकिन असल में वे संतों की छवि खराब कर आम श्रावकों का विश्वास धर्म से उठा रहे हैं। पैसा लेकर और जैन संघों में अपना अवैध प्रभाव दिखाने के लिए किया गया यह कृत्य न केवल पाप है, बल्कि समाज के साथ सबसे बड़ा विश्वासघात है।
महानगर मेट्रो का संकल्प: जारी रहेगा पर्दाफाश
महानगर मेट्रो न्यूज़ उन सभी चेहरों को बेनकाब करने के लिए प्रतिबद्ध है जो धर्म की आड़ में अपना धंधा चला रहे हैं। यह तो सिर्फ शुरुआत है। हमारे पास उन लोगों की पूरी सूची और सबूत मौजूद हैं जिन्होंने पैसा लेकर जैन समुदाय की साख बेचने का सौदा किया है।
“जो खुद कांच के घरों में रहते हैं, उन्हें दूसरों के चरित्र पर पत्थर फेंकने से पहले अपने अतीत के दाग देख लेने चाहिए। जैन शासन सत्य पर टिका है, और सत्य कभी पराजित नहीं होगा।”
संपादकीय चेतावनी: यह रिपोर्ट प्राप्त साक्ष्यों और सूत्रों के दावों पर आधारित है। महानगर मेट्रो समाज को सतर्क करना चाहता है कि वे ऐसे गिरोहों के बहकावे में न आएं और अपने धर्म व संतों की गरिमा की रक्षा करें।

