Homeभारतगुजरातअंकलेश्वर का 'खूनी' गठबंधन: खाकी की गोद में माफिया, क्या शहर में...

अंकलेश्वर का ‘खूनी’ गठबंधन: खाकी की गोद में माफिया, क्या शहर में बिछेंगी लाशें?

चोटा बाज़ार बना जुर्म का ‘वॉरुम’, PI चावड़ा और LCB की ‘वफादारी’ विजय के कदमों में; सरकार को बदनाम करने की गहरी साजिश!

गुजरात में शराबबंदी? मजाक है! कानून का राज? झूठ है! अंकलेश्वर की सड़कों पर आज संविधान नहीं, बल्कि माफिया ‘विजय’ का काला कानून चल रहा है। और सबसे शर्मनाक बात ये है कि इस काले साम्राज्य का चौकीदार कोई और नहीं, बल्कि वर्दी को कलंकित करने वाले वो अधिकारी हैं जिन्हें जनता की सुरक्षा की जिम्मेदारी दी गई थी।

चोटा बाजार: जहाँ पुलिस की ‘वर्दी’ गिरवी रखी है

रेलवे स्टेशन के बगल में बसा चोटा बाजार अब अंकलेश्वर का ‘कैंसर’ बन चुका है। यहाँ कानून की धज्जियां उड़ती नहीं, कुचली जाती हैं। ‘विजय’ नाम का यह माफिया यहाँ का अघोषित सुल्तान बना बैठा है। वरली मटका, आसरा और सट्टे का यह जाल सिर्फ अंकलेश्वर तक सीमित नहीं है, बल्कि वापी, वलसाड और सूरत से आने वाली ‘बर्बादी’ की भीड़ यहाँ अपना घर लुटा रही है।

विश्वासघात का खौफनाक खेल: मुखबिरों की ‘सुपारी’ दे रही पुलिस!

महानगर मेट्रो के इस स्टिंग ऑपरेशन में जो सच सामने आया है, उसे सुनकर किसी भी सभ्य इंसान का खून खौल उठेगा। स्थानीय पुलिस और LCB के अधिकारियों ने भ्रष्टाचार की सारी हदें पार कर दी हैं:

गद्दार खाकी: जागरूक नागरिक जब पुलिस को अवैध अड्डों की सूचना देते हैं, तो रेड मारने के बजाय ये अधिकारी मुखबिर का नंबर सीधे माफिया ‘विजय’ को दे देते हैं। यानी पुलिस अब अपराधियों के लिए ‘इंफोर्मर’ का काम कर रही है!

‘सेटिंग’ की चाय वाली रेड: LCB की टीमें आती हैं, माफिया की खातिरदारी स्वीकार करती हैं, और ‘सब ठीक है’ का लिफाफा लेकर लौट जाती हैं। क्या यह पुलिसिंग है या अपराधियों के साथ पार्टनरशिप?

महानगर मेट्रो का तीखा प्रहार: PI चावड़ा और वाला का ‘मौन’

जब हमारे संवाददाताओं ने ए-डिवीजन PI चावड़ा और LCB PI वाला से जवाब मांगा, तो उन्होंने सवालों का सामना करने के बजाय ‘महानगर मेट्रो’ का नंबर ही ब्लॉक कर दिया।

साहब! नंबर ब्लॉक कर दोगे, लेकिन जनता की आवाज कैसे दबाओगे?

PI चावड़ा के संरक्षण में चल रहा केमिकल युक्त जहरीली शराब का धंधा किसी बड़े लट्ठाकांड की आहट है। क्या ये अधिकारी चाहते हैं कि अंकलेश्वर की सड़कों पर बेगुनाहों के जनाजे उठें?

बड़ी साजिश: क्या सरकार के खिलाफ ‘स्लीपर सेल’ हैं ये अधिकारी? सवाल अब राजनीतिक भी है और गंभीर भी।

1 क्या PI चावड़ा जैसे दागी अधिकारी आने वाले विधानसभा चुनाव में सरकार को गिराने के लिए विपक्ष के ‘एजेंट’ के तौर पर काम कर रहे हैं?
2 क्या जानबूझकर ऐसा माहौल बनाया जा रहा है कि एक बड़ा ‘लट्ठाकांड’ हो और राज्य सरकार की छवि वैश्विक स्तर पर धूमिल हो जाए?
3 भरूच एसपी साहब! क्या आपका खुफिया तंत्र इतना पंगु हो गया है कि आपकी नाक के नीचे ‘कमानांतर प्रशासन’ चल रहा है और आपको खबर तक नहीं?

निष्कर्ष: अब सिर्फ SMC से उम्मीद!

स्थानीय प्रशासन माफिया की ‘गोद’ में सो चुका है। अब मुख्यमंत्री और गृहमंत्री से हमारी सीधी मांग है—स्टेट मॉनिटरिंग सेल (SMC) को यहाँ तुरंत भेजिए। इससे पहले कि ‘विजय’ और उसके वर्दीधारी आका अंकलेश्वर को श्मशान बना दें, इन भेड़ियों की जगह जेल की सलाखों के पीछे होनी चाहिए।

महानगर मेट्रो चुप नहीं बैठेगा। हमारी कलम तब तक आग उगलेगी, जब तक चोटा बाजार से जुर्म का यह हेडक्वार्टर उखड़ नहीं जाता और भ्रष्टाचार के इन सौदागरों की वर्दी नहीं उतर जाती।

सावधान अंकलेश्वर… संघर्ष जारी है!

ब्यूरो रिपोर्ट: महानगर मेट्रो न्यूज़

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -
Google search engine

Most Popular

Recent Comments