विशेष रिपोर्ट : कांग्रेस का तीखा पलटवार— “सत्ता को चुनौती देने वाली महिलाएं भाजपा को बर्दाश्त नहीं”
महानगर मेट्रो ब्यूरो, अहमदाबाद : गुजरात की राजनीति में उस वक्त उबाल आ गया जब भाजपा के प्रदेश नेतृत्व द्वारा कांग्रेस की महिला सांसद गेनीबेन ठाकोर पर कथित तौर पर अभद्र टिप्पणी की गई। इस घटना ने न केवल राजनीतिक मर्यादाओं को तार-तार किया है, बल्कि ‘नारी शक्ति’ और ‘सशक्तिकरण’ के नारों पर भी बड़े सवालिया निशान लगा दिए हैं। कांग्रेस ने इसे भाजपा की ‘विकृत और महिला विरोधी’ मानसिकता का प्रमाण बताया है।
“नारी वंदन” या नारी अपमान?
कांग्रेस ने बेहद आक्रामक रुख अपनाते हुए कहा है कि भाजपा का ‘नारी वंदन’ केवल एक चुनावी जुमला और मुखौटा है। गेनीबेन ठाकोर, जो अपनी निडरता और जनता की आवाज बुलंद करने के लिए जानी जाती हैं, उन पर की गई टिप्पणी ने यह साफ कर दिया है कि भाजपा उन महिलाओं को बर्दाश्त नहीं कर पाती जो सत्ता की आंखों में आंखें डालकर सवाल पूछती हैं।
भाजपा की विचारधारा पर कड़ा प्रहार
पार्टी सूत्रों और विपक्ष का कहना है कि यह केवल एक बयान नहीं, बल्कि भाजपा की उस मनुवादी विचारधारा का असली चेहरा है, जो महिलाओं को बराबरी का अधिकार देने के बजाय उन्हें अपमानित करने में विश्वास रखती है।
सवाल: क्या यही भाजपा का महिला सशक्तिकरण है?
आरोप: जब भी कोई महिला नेता मजबूती से खड़ी होती है, भाजपा की भाषा और मर्यादा क्यों गिर जाती है?
प्रधानमंत्री के ‘मौन’ पर उठे सवाल
रिपोर्ट में इस बात का भी जिक्र किया गया है कि एक तरफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वयं कहते हैं कि “नारी सब भूल सकती है, पर अपना अपमान कभी नहीं भूलती”, वहीं दूसरी ओर उनकी ही पार्टी के जिम्मेदार पदों पर बैठे लोग एक महिला सांसद का सार्वजनिक अपमान कर रहे हैं। कांग्रेस ने तंज कसते हुए कहा कि प्रधानमंत्री खुद संसद में महिला सांसदों के सवालों का सामना करने के बजाय मैदान छोड़कर भाग रहे हैं।
हिंदुस्तान की नारी देगी मुंहतोड़ जवाब
विपक्ष ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि भाजपा यह न भूले कि गुजरात सहित पूरे देश की महिलाएं इस अपमान को देख रही हैं। आने वाले समय में देश की आधी आबादी भाजपा के इस अहंकार और महिला-विरोधी रवैये का जवाब वोटों के जरिए देगी।
महानगर मेट्रो का नजरिया:
लोकतंत्र में वैचारिक मतभेद हो सकते हैं, लेकिन किसी महिला जनप्रतिनिधि के खिलाफ अभद्र भाषा का प्रयोग राजनीति के गिरते स्तर का परिचायक है। यदि भाजपा वास्तव में नारी वंदन की पक्षधर है, तो उसे अपने नेताओं की बेलगाम जुबान पर लगाम लगानी होगी।

