विपक्ष का सूपड़ा साफ: ‘आप’ के किले ढहे, कांग्रेस का अस्तित्व खतरे में; डायमंड सिटी ने विकास पर लगाई मुहर
ब्यूरो रिपोर्ट, महानगर मेट्रो : सूरत: गुजरात की आर्थिक राजधानी और ‘डायमंड सिटी’ के नाम से मशहूर सूरत ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि वह भाजपा का अभेद्य किला है। स्थानीय निकाय चुनाव के आए नतीजों ने विपक्षी खेमे में सन्नाटा पसरा दिया है। सूरत नगर निगम की कुल 120 सीटों में से भारतीय जनता पार्टी ने रिकॉर्ड 115 सीटों पर ऐतिहासिक जीत दर्ज की है। वहीं, पिछले चुनाव में मुख्य विपक्षी दल बनकर उभरी आम आदमी पार्टी (AAP) महज 4 सीटों पर सिमट गई है, जबकि कांग्रेस को केवल 1 सीट से संतोष करना पड़ा।
मोदी मैजिक और पन्ना प्रमुखों की रणनीति का कमाल
सूरत की इस प्रचंड जीत के पीछे भाजपा की जमीनी स्तर की तैयारी और ‘पन्ना प्रमुख’ मॉडल को मुख्य कारण माना जा रहा है। चुनाव परिणामों के रुझान सुबह से ही भाजपा के पक्ष में थे। जैसे-जैसे नतीजे साफ हुए, यह स्पष्ट हो गया कि सूरत की जनता ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और मुख्यमंत्री के विकास कार्यों पर अटूट विश्वास जताया है।
विपक्ष की करारी हार के मायने
आप (AAP) का पतन: पिछले चुनाव में 27 सीटें जीतकर सबको चौंकाने वाली आम आदमी पार्टी के लिए यह नतीजे किसी बड़े झटके से कम नहीं हैं। पार्टी के गढ़ माने जाने वाले पाटीदार बहुल इलाकों में भी इस बार भाजपा ने सेंध लगा दी है।
कांग्रेस का सन्नाटा: कांग्रेस की स्थिति सूरत में और भी दयनीय हो गई है। महज 1 सीट के साथ पार्टी अब शहर की राजनीति में हाशिए पर खड़ी नजर आ रही है।
जश्न में डूबा शहर
जीत की घोषणा होते ही भाजपा कार्यालयों पर जश्न का माहौल छा गया। कार्यकर्ताओं ने आतिशबाजी की, ढोल-नगाड़ों पर थिरके और ‘जय श्री राम’ व ‘भारत माता की जय’ के नारों से पूरा शहर गूंज उठा। भाजपा के स्थानीय नेताओं ने इस जीत को जनता की जीत बताते हुए कहा कि सूरत ने नकारात्मक राजनीति को पूरी तरह नकार दिया है।
महानगर मेट्रो का विश्लेषण
सूरत के ये नतीजे केवल एक चुनाव के परिणाम नहीं हैं, बल्कि यह भविष्य की राजनीति का संकेत हैं। भाजपा की यह 115 सीटों वाली जीत दर्शाती है कि शहर की जनता विकास की निरंतरता चाहती है। अब चुनौती निर्वाचित प्रतिनिधियों के सामने है कि वे इस भारी बहुमत के सम्मान में शहर को विश्वस्तरीय सुविधाएं प्रदान करें।

